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सेंट्रल मार्केट प्रकरण : व्यापारियों के खिलाफ दायर याचिका वापस लेगा आवास विकास, सामने आई ये वजह
Wed, 03 Dec 2025 09:02 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Wed, 03 Dec 2025 09:02 PM IST
सार
Meerut News: सेंट्रल मार्केट के भूखंड 661/6 पर कार्रवाई न होने से पहले व्यापारियों के खिलाफ जनहित याचिका डाली गई थी। बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्रार कोर्ट में सुनवाई होगी।
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सेंट्रल मार्केट में अवैध काम्पलेक्स हुआ जमीदोज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आवास विकास परिषद सेंट्रल मार्केट के भूखंड 661/6 के दुकानदारों के खिलाफ सितंबर में न्यायालय में दायर अवमानना याचिका को वापस लेने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में 16 सितंबर से पेंडिंग चल रही इस याचिका पर बृहस्पतिवार को रजिस्ट्रार कोर्ट में सुनवाई होनी है। माना जा रहा है कि आवास विकास अपने बचाव में यह कदम उठा रहा है।
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हालांकि एक दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने पैरा 22 पर सुनवाई करते हुए आवास विकास परिषद को शास्त्रीनगर और जागृति विहार के बाकी सभी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के लिए दो माह का समय दिया है। विभाग को अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद न्यायालय में हलफनामा दाखिल करना होगा। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद आवास विकास परिषद की अवमानना याचिका पर लिए गए निर्णय पर अगली कार्रवाई क्या होगी, यह सुनवाई के बाद ही तय होगा।
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दरअसल आवास विकास परिषद की आवासीय कॉलोनी शास्त्रीनगर और जागृति विहार में लोगों ने आवासीय भूखंडों का स्वरूप बदलकर व्यवसायिक भवनों का निर्माण कर लिया था। इन्हीं अवैध निर्माणों में शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के भूखंड 661/6 भी शामिल रहा है।
15 सितंबर तक अवैध कॉम्प्लेक्स के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय ने आवास विकास परिषद को फटकार लगाई थी। उस समय आवास विकास परिषद ने अपने बचाव में 16 सितंबर को न्यायालय में व्यापारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी। जिसमें विभाग ने व्यापारियों पर दुकान खाली न करने, विभाग द्वारा अवैध दुकानों पर नोटिस चस्पा करने जैसे जानकारी दी थी। अक्तूबर में आवास विकास ने अवैध कॉम्प्लेक्स की 22 दुकानों को गिरा दिया था।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट आवास विकास की इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है। एक दिसंबर को न्यायालय में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई का हलफनामा दाखिल करने पहुंचे अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने बाकी सभी अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी किए थे। आवास विकास परिषद को इस कार्रवाई के लिए दो माह का समय भी दिया हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद से सभी व्यापारियों में दहशत है। व्यापारियों ने एकजुटता के लिए सोशल मीडिया पर वार भी छेड़ दिया है। इसी बीच आवास विकास परिषद ने व्यापारियों के खिलाफ न्यायालय में डाली गई अवमानना याचिका को वापस लेने की पहल की है। इस पर न्यायालय में बृहस्पतिवार को सुनवाई होनी है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद से सभी व्यापारियों में दहशत है। व्यापारियों ने एकजुटता के लिए सोशल मीडिया पर वार भी छेड़ दिया है। इसी बीच आवास विकास परिषद ने व्यापारियों के खिलाफ न्यायालय में डाली गई अवमानना याचिका को वापस लेने की पहल की है। इस पर न्यायालय में बृहस्पतिवार को सुनवाई होनी है।
कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शास्त्रीनगर और जागृति में 1500 से अधिक आवासीय भूखंडों पर अवैध कॉमर्शियल भवनों के खिलाफ भी कार्रवाई के आदेश दिए हुए हैं। न्यायालय ने आवास विकास के अधिकारियों को कार्रवाई के बाद शपथ पत्र दाखिल करने के आदेश भी दिए हैं।
उधर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता तुषार जैन का कहना है कि आवास विकास परिषद के अधिकारी एक के बाद एक गलती करते चले आ रहे हैं। पूर्व में सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका को वापस लेना भी कोर्ट के आदेश की अवमानना ही है। क्योंकि एक दिसंबर को न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश पर अभी अमल नहीं किया गया है।
मेरठ प्रशासन और आवास विकास की तरफ से जो एक अवैध निर्माण पर कार्रवाई का शपथपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया, उससे न्यायालय संतुष्ट नहीं हुआ है। न्यायालय ने मेरठ प्रशासन और आवास विकास को दो माह का समय देते हुए शास्त्रीनगर और जागृति विहार के सभी अवैध निर्माणों को गिराने और कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शास्त्रीनगर और जागृति में 1500 से अधिक आवासीय भूखंडों पर अवैध कॉमर्शियल भवनों के खिलाफ भी कार्रवाई के आदेश दिए हुए हैं। न्यायालय ने आवास विकास के अधिकारियों को कार्रवाई के बाद शपथ पत्र दाखिल करने के आदेश भी दिए हैं।
उधर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता तुषार जैन का कहना है कि आवास विकास परिषद के अधिकारी एक के बाद एक गलती करते चले आ रहे हैं। पूर्व में सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका को वापस लेना भी कोर्ट के आदेश की अवमानना ही है। क्योंकि एक दिसंबर को न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश पर अभी अमल नहीं किया गया है।
मेरठ प्रशासन और आवास विकास की तरफ से जो एक अवैध निर्माण पर कार्रवाई का शपथपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया, उससे न्यायालय संतुष्ट नहीं हुआ है। न्यायालय ने मेरठ प्रशासन और आवास विकास को दो माह का समय देते हुए शास्त्रीनगर और जागृति विहार के सभी अवैध निर्माणों को गिराने और कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए हैं।
व्यापारियों को फंसाता जा रहा है आवास विकास
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना का कहना है कि शास्त्रीनगर और जागृति विहार के उन सभी लोगों को आवास विकास परिषद फंसाता जा रहा है, जिनके अवैध निर्माण को ढहाने के लिए न्यायालय ने आदेश जारी किए हुए हैं। आवास विकास के अधिकारियों को चाहिए था कि वह शासन और प्रशासन स्तर पर व्यापारियों के हित में उठाए जा रहे बाजार स्ट्रीट के कदम और आवेदनों पर की जा रही कार्रवाई का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराते। कोर्ट से एक-दो माह का समय मांगा जाता तो हो सकता है कि इस बीच व्यापारियों को कुछ राहत मिलती।
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना का कहना है कि शास्त्रीनगर और जागृति विहार के उन सभी लोगों को आवास विकास परिषद फंसाता जा रहा है, जिनके अवैध निर्माण को ढहाने के लिए न्यायालय ने आदेश जारी किए हुए हैं। आवास विकास के अधिकारियों को चाहिए था कि वह शासन और प्रशासन स्तर पर व्यापारियों के हित में उठाए जा रहे बाजार स्ट्रीट के कदम और आवेदनों पर की जा रही कार्रवाई का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराते। कोर्ट से एक-दो माह का समय मांगा जाता तो हो सकता है कि इस बीच व्यापारियों को कुछ राहत मिलती।
व्यापारी मान रहे न्यायालय के आदेश पर होगा अमल
सेंट्रल मार्केट के भूखंड 661/6 के गिराए गए अवैध कॉम्प्लेक्स के दुकानदारों का दर्द सामने आ रहा है। व्यापारी किशोर वाधवा ने सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई और अपने नुकसान की बात कही है। वाधवा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश अपनी जगह खड़ा है। हमें अब कुछ कहने में कोई डर नहीं है। हमें जो खोना था खो चुके हैं। हम पर कुछ लोगों ने लांछन लगाए कि हमने पैरवी नहीं की। अब सभी लोगों को इस आदेश के खिलाफ अच्छी पैरवी करके अपने पक्ष में फैसला ले आना चाहिए। इसके बाद हम भी मानेंगे कि हमसे पैरवी में चूक हुई थी।
सेंट्रल मार्केट के भूखंड 661/6 के गिराए गए अवैध कॉम्प्लेक्स के दुकानदारों का दर्द सामने आ रहा है। व्यापारी किशोर वाधवा ने सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई और अपने नुकसान की बात कही है। वाधवा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश अपनी जगह खड़ा है। हमें अब कुछ कहने में कोई डर नहीं है। हमें जो खोना था खो चुके हैं। हम पर कुछ लोगों ने लांछन लगाए कि हमने पैरवी नहीं की। अब सभी लोगों को इस आदेश के खिलाफ अच्छी पैरवी करके अपने पक्ष में फैसला ले आना चाहिए। इसके बाद हम भी मानेंगे कि हमसे पैरवी में चूक हुई थी।
वाधवा का कहना है कि हमारी बिल्डिंग ध्वस्त होने के बाद व्यापारी नेताओं, प्रतिनिधियों व संगठन के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाई। स्ट्रीट बाजार की घोषणा की गई। अब व्यापारिक संगठनों के नेता कुछ न होने देने की चेतावनी दे रहे हैं। हम प्रार्थना करते हैं कि बाकी बचे व्यापारियों को राहत मिले लेकिन सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि जो भी इन आदेशों का पालन ठीक से नहीं करेगा और विरोध करेगा उसके खिलाफ भी अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।