{"_id":"619b697ea778d2876cb9409c83a60e70","slug":"ccsu-news-hindi-news-44","type":"story","status":"publish","title_hn":"ग्रांट नहीं आई, उधार कराई पढ़ाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ग्रांट नहीं आई, उधार कराई पढ़ाई
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Tue, 05 Jan 2016 02:25 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूजीसी ग्रांट भेजने में कंजूसी कर रही है। पैसा मंजूर करने के बावजूद महीनों तक ग्रांट नहीं आ रही। फेलोशिप से लेकर रेमेडियल कोचिंग तक पर असर पड़ रहा है। मेरठ कॉलेज में रेमेडियल कोचिंग बंद कर दी गई है। कॉलेज ने दो साल शिक्षकों से उधार पढ़वा लिया। एक साल का भुगतान अपनी ओर से कर दिया, लेकिन एक साल का लटका है।
यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) ने दो साल पहले मेरठ कॉलेज को रेमेडियल कोचिंग चलाने की मंजूरी दी थी। रेमेडियल में एससी, एसटी, ओबीसी और कुछ जनरल छात्रों को यूजीसी नेट, विषय और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई गई थी। मंजूरी के बाद कॉलेज की ओर से दो साल तक कोचिंग कराई गई।
इसमें बाहर से भी कुछ शिक्षक बुलाए थे। करीब 12 लाख रुपये खर्च आया। शिक्षकों को जब काफी दिनों तक पैसा नहीं मिला तो कॉलेज ने अपनी से एक साल का करीब छह लाख रुपये भुगतान कर दिया। अभी एक साल का बचा है। पैसा नहीं मिलने की वजह से कॉलेज ने कोचिंग बंद कर दी। कागजों में कोचिंग चलाने की मंजूरी है।
विज्ञापन
फेलोशिप में भी फंस रहा पंगा
कॉलेज को नैक में ए ग्रेड मिलने के बाद यूजीसी ने 45 लाख रुपये की ग्रांट मंजूरी की थी। करीब दो साल हो गए। 12 लाख रुपये की एक किस्त मिली है। सबसे ज्यादा परेशानी जेआरएफ (जूनियर रिसर्च फेलोशिप) और एसआरएफ (सीनियर रिसर्च फेलोशिप) कैंडीडेट्स को हो रही है। दो-दो साल से कैंडीडेट्स को फेलोशिप नहीं मिली है। ऐसे में वह रिसर्च कैसे करें, यह परेशानी है।
विज्ञापन
यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) ने दो साल पहले मेरठ कॉलेज को रेमेडियल कोचिंग चलाने की मंजूरी दी थी। रेमेडियल में एससी, एसटी, ओबीसी और कुछ जनरल छात्रों को यूजीसी नेट, विषय और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई गई थी। मंजूरी के बाद कॉलेज की ओर से दो साल तक कोचिंग कराई गई।
विज्ञापन
इसमें बाहर से भी कुछ शिक्षक बुलाए थे। करीब 12 लाख रुपये खर्च आया। शिक्षकों को जब काफी दिनों तक पैसा नहीं मिला तो कॉलेज ने अपनी से एक साल का करीब छह लाख रुपये भुगतान कर दिया। अभी एक साल का बचा है। पैसा नहीं मिलने की वजह से कॉलेज ने कोचिंग बंद कर दी। कागजों में कोचिंग चलाने की मंजूरी है।
विज्ञापन
फेलोशिप में भी फंस रहा पंगा
कॉलेज को नैक में ए ग्रेड मिलने के बाद यूजीसी ने 45 लाख रुपये की ग्रांट मंजूरी की थी। करीब दो साल हो गए। 12 लाख रुपये की एक किस्त मिली है। सबसे ज्यादा परेशानी जेआरएफ (जूनियर रिसर्च फेलोशिप) और एसआरएफ (सीनियर रिसर्च फेलोशिप) कैंडीडेट्स को हो रही है। दो-दो साल से कैंडीडेट्स को फेलोशिप नहीं मिली है। ऐसे में वह रिसर्च कैसे करें, यह परेशानी है।