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सांध्यकालीन कक्षाओं पर सीसीएसयू के कॉलेजों का इंकार
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Tue, 03 Nov 2015 01:49 AM IST
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इस सत्र से कॉलेजों में सांध्यकालीन कक्षाएं नहीं चलेंगी। कॉलेजों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। सीसीएसयू अब शासन को अगले साल के लिए प्रस्ताव भेजेगी। इस फैसले से छात्रों को झटका लगा है।
मेरठ और सहारनपुर मंडल के 10 एडेड और राजकीय कॉलेजों के प्रिंसिपल के साथ कुलपति और रजिस्ट्रार ने सोमवार को बैठक की। मेरठ से आरजी डिग्री कॉलेज और एनएएस कॉलेज के प्रिंसिपल शामिल रहे। तय यह हुआ कि कॉलेज इस सत्र से सांध्यकालीन कक्षाएं चलाने के लिए तैयार नहीं हैं।
सत्र शुरू हो चुका है, आवश्यक सुविधाएं जुटाने में कठिनाई होगी। अब दिवाली की छुट्टी हैं। छात्रसंघ चुनाव होने हैं। लिहाजा अगले सत्र से सांध्यकालीन कक्षाओं के लिए प्रस्ताव भेजा जाए। अब विवि शासन को यह रिपोर्ट भेजेगा। सीट कम होने और प्रवेशार्थी एडमिशन से वंचित होने की वजह से शासन से सांध्यकालीन कक्षाएं शुरू करने की मांग की जा रही थी।
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विवि भी हर साल शासन को प्रस्ताव भेज रहा था। शासन ने जब गेंद विवि के पाले में डालकर रिपोर्ट मांगी तो मामले ने यू टर्न ले लिया है। हर साल विवि शासन को प्रस्ताव भेजता था, लेकिन शासन कोई जवाब नहीं देता था और मामला ठंडे बस्ते में चला जाता था। इस बार शासन ने देर से गंभीरता दिखाई तो कॉलेज मना कर रहे हैं।
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मेरठ और सहारनपुर मंडल के 10 एडेड और राजकीय कॉलेजों के प्रिंसिपल के साथ कुलपति और रजिस्ट्रार ने सोमवार को बैठक की। मेरठ से आरजी डिग्री कॉलेज और एनएएस कॉलेज के प्रिंसिपल शामिल रहे। तय यह हुआ कि कॉलेज इस सत्र से सांध्यकालीन कक्षाएं चलाने के लिए तैयार नहीं हैं।
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सत्र शुरू हो चुका है, आवश्यक सुविधाएं जुटाने में कठिनाई होगी। अब दिवाली की छुट्टी हैं। छात्रसंघ चुनाव होने हैं। लिहाजा अगले सत्र से सांध्यकालीन कक्षाओं के लिए प्रस्ताव भेजा जाए। अब विवि शासन को यह रिपोर्ट भेजेगा। सीट कम होने और प्रवेशार्थी एडमिशन से वंचित होने की वजह से शासन से सांध्यकालीन कक्षाएं शुरू करने की मांग की जा रही थी।
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विवि भी हर साल शासन को प्रस्ताव भेज रहा था। शासन ने जब गेंद विवि के पाले में डालकर रिपोर्ट मांगी तो मामले ने यू टर्न ले लिया है। हर साल विवि शासन को प्रस्ताव भेजता था, लेकिन शासन कोई जवाब नहीं देता था और मामला ठंडे बस्ते में चला जाता था। इस बार शासन ने देर से गंभीरता दिखाई तो कॉलेज मना कर रहे हैं।