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सीसीएसयू दीक्षांत समारोह: कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल बोलीं- समाज नहीं चेता तो मरती रहेंगी बेटियां

Thu, 15 Dec 2022 11:52 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Thu, 15 Dec 2022 11:52 PM IST
सार

सीसीएसयू दीक्षांत समारोह : कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि समाज नहीं चेता तो बेटियां मरती रहेंगी। पढ़िए राज्यपाल ने और क्या-क्या कहा है।

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CCSU Convocation: Governor Anandiben Patel said that If society does not alert, daughters will continue to die
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के 34वें दीक्षांत समारोह में 195 छात्र-छात्राओं को मेडल पहनाने के बाद कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने समाज को चेताया कि अगर पहल नहीं की गई तो दहेज की खातिर बेटियां मरती रहेंगी, आत्महत्याएं करती रहेंगी। समाज को इस पर शर्म आनी चाहिए। 

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कुलाधिपति ने कहा कि समारोह में 70 फीसदी बेटियों को स्वर्ण पदक मिले हैं। कितनी पढ़ी-लिखी बच्चियां हैं, कितनी होनहार हैं। बताया कि गृह विभाग में एक विषय सामने आया कि 2017 से 2021 तक देश में दहेज के कारण 35 हजार नौ सौ महिलाओं ने आत्महत्याएं कीं। चिंताजनक यह है कि इनमें उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 11 हजार आठ सौ महिलाओं ने आत्महत्याएं की हैं। सोचिए, क्या समाज को इसकी चिंता नहीं होती है। क्या दहेज प्रथा बंद नहीं करा सकते हैं। आप चाहते हैं कि लड़की की मां आपको एक बंगला दे दे और आपका बेटा उस बंगले में रहे। खाए भी और आराम करे। कहां गए हमारे शिक्षाविद, कहां गए हमारे सर्टिफिकेट। दहेज प्रथा के खिलाफ आंदोलन करें। हमारे प्रतिनिधि इसको लेकर कार्य करें। 
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कुलाधिपति ने कहा कि बाल विवाह कैसे हो सकता है, छोटी बच्चियां का विवाह करने में शर्म नहीं आती क्या। अभी हाल ही में महाराजगंज की छोटी-छोटी बच्चियां मुझसे मिलने आईं। वे बाल विवाह और दहेज प्रथा पर रोक लगाने की मांग कर रहीं थीं। उन लड़कियों में इतनी हिम्मत है तो हममें में क्यों नहीं है। मैं चाहती हूं कि यूनिवर्सिटी के शिक्षक-छात्र गांव गांव जाएं, नाटक आदि के माध्यम से लोगों को जागरूक करें। 
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अगर कहीं बाल विवाह हो रहा है तो पुलिस कार्रवाई करे। ये न कह दे कि हमारे पास तो कोई शिकायत नहीं है। ये कानून, रोकना पड़ेगा। बेटियों से उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर बनकर जिओ। उन्होंने कहा कि मैं छात्र-छात्राओं को जेल विजिट पर भेजती हूं फिर उनसे पूछती हूं कि क्या देखा, वे बताते हैं कि दहेज के लिए सास ने बहू को मार दिया, अब वह सजा काट रही है। दहेज हत्या के मामलों में बहुत महिलाएं जेल में हैं। 

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उन्होंने कहा कि समाज की इन कुरीतियों को दूर करने की जिम्मेदारी समाज की ही है, जब तक हम अग्रसर नहीं बनेंगे तब यह चलता रहेगा, हमारी बेटियां मरती ही रहेंगी। हम वहां जाकर शोक व्यक्त करेंगे, बैठकर वापस आ जाएंगे। इससे आगे बढ़ना होगा।

दीक्षा के बाद का समय महत्वपूर्ण, जीवन में है ऊंचा स्थान: डॉ. बजाज 
मुख्य अतिथि पद्मश्री डा. जेके बजाज ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि अब आप जीवन की एक अवस्था को पूरी कर दूसरी में प्रवेश कर रहे हैं। दीक्षांत वह समय है जब आप ब्रह्मचर्याश्रम से गृहस्थाश्रम की ओर बढ़ते हैं। अब तक आप विद्यार्थी थे अपने भरण एवं संरक्षण के लिये परिवार समाज एवं राष्ट्र पर निर्भर थे, लेकिन इसके बाद आप खुद जीविका खोजेंगे और रोजगार करेंगे। उन्होंने कहा कि जीवन जिस अवस्था में आप प्रवेश कर रहे हैं उसका जीवन में बहुत ऊंचा स्थान है। 

महाभारत के प्रसंग का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब युधिष्ठिर अपने बंधुओं से लड़ने से बचने के लिए विरक्ति की ओर होने लगते हैं तो उनके चारों भाई, अर्जुन, सहदेव, नकुल और भीम बारी-बारी से उन्हें गृहस्थाश्रम का महत्व समझाते हैं। अंत में द्रोपदी उन्हें बताती है कि सभी का भरण-पोषण और संरक्षण करना ही उनके लिए धर्म मार्ग है। इससे बचकर संन्यास की बात करना कायरता है। उन्होंने कहा कि छात्रों को तैत्तिरीयोपनिषद् की शीक्षावल्ली के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए।

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