सच बोलने का अंजाम: अस्पताल में भर्ती पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक पर CBI की चार्जशीट, सियासत गरमाई
CBI द्वारा पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के खिलाफ कीरू हाइड्रो प्रोजेक्ट मामले में चार्जशीट दाखिल करने पर विपक्षी दलों ने प्रतिक्रिया दी है। हिसावदा गांव में भी नाराजगी जताई गई है, जहां मलिक की तबीयत खराब होने के बावजूद कार्रवाई को अनुचित बताया गया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बागपत में सीबीआई के जम्मू-कश्मीर के कीरू हाइड्रो प्रोजेक्ट के मामले पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल करने से सियासत गरमा गई। विपक्षी दलों के नेताओं ने इसपर कहा कि सच बोलने वालों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उनके पैतृक गांव हिसावदा के भी लोगों ने चार्जशीट को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक जब अस्पताल में भर्ती हैं, तब चार्जशीट दायर करना उचित नहीं है।
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक बागपत के हिसावदा गांव के मूल निवासी हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के कीरू हाइड्रो प्रोजेक्ट के मामले में 150 करोड़ रुपये की रिश्वत का ऑफर मिलने के बाद उसे ठुकराने का बयान दिया था। इस बयान को लेकर सीबीआई ने मुकदमा दर्ज करके जांच शुरू कर दी थी।
यह भी पढ़ें: Meerut Bribe Case: तीन लाख नहीं दिए तो चार्जशीट लगा दूंगा! ...सैनिक बोला-रिश्वत नहीं दूंगा; पकड़वाना चाहता हूं
22 फरवरी 2024 को गाजियाबाद से सीबीआई के इंस्पेक्टर ऋषभराज के नेतृत्व में सात सदस्यों की टीम ने पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक की संपत्ति का पता लगाने के लिए हिसावदा में उनकी हवेली पर पहुंचकर खानदान के लोगों से पूछताछ की थी। इसके साथ ही संपत्ति का ब्योरा लिया था, लेकिन वहां कुछ मिला नहीं था।
अब सीबीआई ने उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसपर हिसावदा के नवीन मलिक तथा पवन आदि ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सच बोलने पर यह कार्रवाई की जा रही है। भाजपा तथा रालोद के नेता इसपर खुलकर बोलने से बचे तो विरोधी दलों तथा किसान संगठनों के नेता पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का पक्ष लेते दिखे।
भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की छत्रछाया में राजनीतिक सफर शुरू करने वाले सत्यपाल मलिक मेरठ काॅलेज के छात्रसभा के अध्यक्ष भी रहे। वह सबसे पहले वर्ष 1974 में बागपत से विधायक चुने गए थे। वर्ष 1977 में जब जनता पार्टी बुलंदी पर थी, तब सत्यपाल मलिक की चौधरी साहब से राह जुदा हो गई। 15 जुलाई 1979 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की सरकार गिर गई। इसके बाद सत्यपाल मलिक चौधरी साहब के पास लौट आए।
वह वर्ष 1980 में राज्यसभा गए और वर्ष 1984 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद भी उनको राज्यसभा भेजा गया। 1987 में बोफोर्स मामला उछलने पर उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा देकर वीपी सिंह के नेतृत्व वाले जनता दल से वर्ष 1989 में अलीगढ़ से चुनाव लड़ा और सांसद बन गए। तब वह केंद्रीय राज्यमंत्री बनाए गए थे। मगर 1996 में अलीगढ़ से दोबारा लोकसभा चुनाव लडक़र हार गए।
फिर भाजपा में शामिल हो गए। वर्ष 2004 में बागपत से लोकसभा चुनाव लड़कर हार गए। वह वर्ष 2017 में बिहार का राज्यपाल बनाए गए और इसके बाद वह जम्मू कश्मीर, गोवा तथा मेघालय के राज्यपाल रहे। दिल्ली में 13 महीने तक चले किसान आंदोलन पर वह खुलकर बोले।
सरकार की पोल खोलने पर पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के खिलाफ यह कार्रवाई की है। अब मलिक साहब गंभीर बीमार है और अस्पताल में भर्ती है। इसलिए ऐसे समय में सरकार को इस तरह का कदम नहीं उठाना चाहिए था। कांग्रेस इसका विरोध करती है। - नवाब अहमद हमीद, प्रदेश महासचिव कांग्रेस
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक खुलकर सरकार के खिलाफ बोल रहे थे। वह उनकी कार्यप्रणाली की पोल खोलने से नहीं डरते थे। इसलिए उन्हें घेरने के लिए सीबीआई ने अब उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। - रविंद्र देव, सपा जिलाध्यक्ष
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के खिलाफ षडयंत्र रचा गया है। क्योंकि वह सरकार के खिलाफ मुखर होकर बोलते रहे। सच बोलने पर उनके खिलाफ चार्जशीट दायर की गई। उन्होंने जिन पर रिश्वत की पेशकश करने का आरोप लगाया, उनके खिलाफ कुछ नहीं किया गया। - चौ. प्रताप सिंह गुर्जर, भाकियू जिलाध्यक्ष
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने हमेशा नैतिक मूल्यों तथा ईमानदारी की राजनीति की है। किसानों तथा अन्य जनता के मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ बोलने पर सीबीई ने चार्जशीट दायर की जो कतई उचित नहीं है। - अन्नू मलिक, किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं निवासी हिसावदा
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक एवं अन्य के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई है। इसमें न्यायालय में सबकुछ देखा जाएगा और उनके खिलाफ साक्ष्य होंगे तो न्यायालय फैसला लेगा। नहीं तो वह निर्दोष साबित हो जाएंगे। - ओमबीर ढाका, रालोद के क्षेत्रीय सचिव