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कैंटर की टक्कर से युवक की मौत, तीन घंटे जाम
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Thu, 20 Oct 2016 02:28 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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रोहटा रोड स्थित दिलावरा गांव के सामने बुधवार को भैंसों से भरे कैंटर की टक्कर से साइकिल सवार युवक की मौत हो गई। घटना के बाद चालक कैंटर समेत फरार हो गया। परिजनों और ग्रामीणों ने रोहटा रोड पर शव रखकर जाम लगा दिया। इस दौरान जाम में फंसे वाहनों में तोड़फोड़ की कोशिश की गई। करीब तीन घंटे बाद सपा विधायक और सीओ ने जैसे-तैसे परिजनों को समझाबुझा कर जाम खुलवाया। परिजनों ने तहरीर दी है।
पुलिस के अनुसार गांव पूठखास रोहटा निवासी सलमान मलिक (19) पुत्र सलीम मलिक दिल्ली पुलिस में भर्ती होने की तैयारी कर रहा था। उसका फिजिकल और मेडिकल हो चुका था। जबकि लिखित परीक्षा के लिए वह रोहटा रोड स्थित एक कोचिंग इंस्टीट्यूट से कोचिंग ले रहा था। बुधवार को वह साइकिल से इंस्टीट्यूट जा रहा था। इस दौरान दिलावरा गांव के सामने पीछे से आ रहे कैंटर ने उसे टक्कर मार दी। टक्कर लगने के बाद सलमान साइकिल सहित कैंटर में उलझ गया। चालक ने कैंटर रोकने के बजाय और दौड़ा दिया। जिससे सलीम कैंटर के साथ काफी दूर तक घिसटता चला गया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
सूचना पर सीओ दौराला और एसओ कंकरखेड़ा मौके पर पहुंचे। वहीं, घटना का पता चलते ही सलमान के परिजन और काफी संख्या में ग्रामीण भी पहुंच गए। उन्होंने पुलिस पर कैंटर चालक को भगाने का आरोप लगाते हुए सलमान का शव सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। रोहटा रोड पर करीब तीन घंटे तक जाम लगने से वाहनों की कतारें लग गईं। इस दौरान ग्रामीणों ने वहां से जबरन निकलने वाले वाहनों में तोड़फोड़ का भी प्रयास किया। बाद में विधायक गुलाम मोहम्मद, सपा नेता रियाज खान व मनोज चपराणा आदि ने परिजनों को समझाबुझा कर शांत करने का प्रयास किया। काफी जद्दोजहद के बाद आर्थिक मदद का आश्वासन मिलने पर परिजनों ने जाम खोला। एसओ यादराम यादव का कहना है कि तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
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कैंटर में बैठी थीं महिलाएं
ग्रामीणों ने बताया कि कैंटर में कटान के लिए पशु भरे हुए थे। आगे महिलाएं भी बैठी हुई थी। घटना के तुरंत बाद ही उन्होंने पुलिस को सूचना दे दी थी। लेकिन उसके बावजूद पुलिस ने गंभीरता नहीं बरती। शोभापुर पुलिस चौकी पर पुलिस के सामने ही आरोपी चालक कैंटर लेकर फरार हो गया।
परिवार में कोहराम मचा
सलमान का पिता सलीम मजदूरी करता है जबकि छोटा भाई सोनू इंटर कर रहा है। उसकी दो अविवाहित बहनें हैं। सलीम के अनुसार मजदूरी करने के बावजूद वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला रहा है ताकि वे अच्छी नौकरी पर लग सकें। सलमान भी दिल्ली पुलिस में भर्ती होने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था। लेकिन परिवार के सपने धरे रह गए। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था।
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पुलिस के अनुसार गांव पूठखास रोहटा निवासी सलमान मलिक (19) पुत्र सलीम मलिक दिल्ली पुलिस में भर्ती होने की तैयारी कर रहा था। उसका फिजिकल और मेडिकल हो चुका था। जबकि लिखित परीक्षा के लिए वह रोहटा रोड स्थित एक कोचिंग इंस्टीट्यूट से कोचिंग ले रहा था। बुधवार को वह साइकिल से इंस्टीट्यूट जा रहा था। इस दौरान दिलावरा गांव के सामने पीछे से आ रहे कैंटर ने उसे टक्कर मार दी। टक्कर लगने के बाद सलमान साइकिल सहित कैंटर में उलझ गया। चालक ने कैंटर रोकने के बजाय और दौड़ा दिया। जिससे सलीम कैंटर के साथ काफी दूर तक घिसटता चला गया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
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सूचना पर सीओ दौराला और एसओ कंकरखेड़ा मौके पर पहुंचे। वहीं, घटना का पता चलते ही सलमान के परिजन और काफी संख्या में ग्रामीण भी पहुंच गए। उन्होंने पुलिस पर कैंटर चालक को भगाने का आरोप लगाते हुए सलमान का शव सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। रोहटा रोड पर करीब तीन घंटे तक जाम लगने से वाहनों की कतारें लग गईं। इस दौरान ग्रामीणों ने वहां से जबरन निकलने वाले वाहनों में तोड़फोड़ का भी प्रयास किया। बाद में विधायक गुलाम मोहम्मद, सपा नेता रियाज खान व मनोज चपराणा आदि ने परिजनों को समझाबुझा कर शांत करने का प्रयास किया। काफी जद्दोजहद के बाद आर्थिक मदद का आश्वासन मिलने पर परिजनों ने जाम खोला। एसओ यादराम यादव का कहना है कि तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
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कैंटर में बैठी थीं महिलाएं
ग्रामीणों ने बताया कि कैंटर में कटान के लिए पशु भरे हुए थे। आगे महिलाएं भी बैठी हुई थी। घटना के तुरंत बाद ही उन्होंने पुलिस को सूचना दे दी थी। लेकिन उसके बावजूद पुलिस ने गंभीरता नहीं बरती। शोभापुर पुलिस चौकी पर पुलिस के सामने ही आरोपी चालक कैंटर लेकर फरार हो गया।
परिवार में कोहराम मचा
सलमान का पिता सलीम मजदूरी करता है जबकि छोटा भाई सोनू इंटर कर रहा है। उसकी दो अविवाहित बहनें हैं। सलीम के अनुसार मजदूरी करने के बावजूद वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला रहा है ताकि वे अच्छी नौकरी पर लग सकें। सलमान भी दिल्ली पुलिस में भर्ती होने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था। लेकिन परिवार के सपने धरे रह गए। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था।