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बीओटी मार्गों पर सिस्टम की नाकामी का अंधेरा
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Mon, 21 Nov 2016 02:08 AM IST
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सड़क के बीच में टूटी पड़ी रेलिंग।
- फोटो : अमर उजाला
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बीओटी मार्गों और चौराहों पर सिस्टम की नाकामी का अंधेरा छाया हुआ है। हालात यह हैं कि ट्रैफिक और स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। कहीं-कहीं तो स्ट्रीट लाइटों के खंभे भी गायब हो गए हैं। डिवाइडर, स्ट्रीट लाइटों के पोल और ग्रिल की रंगाई-पुताई का काम भी बंद है। यहां हो रहा है तो सिर्फ अवैध होर्डिंग और यूनिपोल का खेल। इससे नगर निगम को आर्थिक नुकसान हो रहा है तो बड़े-बड़े यूनिपोल जनता के सिर पर मौत बनकर झूल रहे हैं। वहीं, बीओटी का ठेका छोड़ते समय बड़े-बड़े दावे करने वाले अफसर व्यवस्था सुधारने के बजाय एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ने में व्यस्त हैं। फिलहाल, एसपी ट्रैफिक आलोक प्रियदर्शी के हस्तक्षेप के बाद नगरायुक्त देवेंद्र कुशवाहा ने इस मामले को संज्ञान में लिया। जब पता चला कि खेल मिलीभगत का है तो रविवार को होर्डिंग प्रभारी को बीओटी के रिकॉर्ड के साथ तलब किया।
नगर निगम प्रशासन ने शहर की जनता को सुंदर मार्ग, दिन ढलते ही रोशनी से नहाई सड़क और चौराहे, जाम से निजात दिलाने और सुचारु यातायात व्यवस्था के लिए ट्रैफिक लाइटें और चौराहों को हराभरा बनाने का सपना दिखाया था। बीओटी (बिल्ट, ऑपरेट, ट्रांसफर) पर निगम और ठेकेदार के बीच हुए करार में भी यह बातें थीं। लेकिन, निगम प्रशासन की लापरवाही और ठेकेदारों से साठगांठ के कारण सुंदर शहर तो दूर, जनता को जरूरी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। स्थिति यह है कि बीओटी पर दिए गए छह मुख्य मार्गों पर टूटे डिवाइडर, बगैर रिफ्लेक्टर लगे कट और जगह-जगह टूटी रेलिंग कब हादसों का सबब बन जाएं, कुछ नहीं कह सकते।
रिपोर्ट में खुलेगी अधिकारियों की पोल
बीओटी मार्गों और चौराहों पर अनुबंध के तहत अब तक क्या काम हुआ और क्या नहीं हुआ? नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की? इन सभी बिंदुओं पर इसी सप्ताह नगर निगम निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एके सिंह और मोइनुद्दीन शहर को दो हिस्सों में बांटकर निरीक्षण करेंगे। इसकी रिपोर्ट नगरायुक्त को सौंपी जाएगी। इससे उम्मीद है कि बीओटी पर अब तक हुए खेल का भी खुलासा हो जाएगा।
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छह मार्गों पर बीओटी अनुबंध की शर्तें
- साल में दो बार रेलिंग, डिवाइडर और डिवाइडर पर लगे विद्युत पोल की रंगाई-पुताई होगी।
- सभी विद्युत पोलों पर लाल, पीली और सफेद रिफ्लेक्टिव पट्टी लगाई जाएगी।
- डिवाइडरों पर लगे विद्युत पोल को सुरक्षा और लाइटों को जलाने-बुझाने का जिम्मा।
- लाइट खराब होने पर तीन दिन से अधिक बंद रहने की दशा में ठेकेदार पर पांच रुपये प्रति लाइट की दर से जुर्माना वसूली। इसके बाद 100 रुपये प्रति लाइट की दर से दंड लगेगा।
चौराहों पर बीओटी अनुबंध की शर्तें
- बीओटी पर दिए गए 17 चौराहों की ट्रैफिक लाइट, फुटपाथ और पोल का रखरखाव, ट्रैफिक लाइटों को जलाने-बुझाने की व्यवस्था।
- वर्ष में दो बार ट्रैफिक लाइट और पोल की सफाई व रंगाई-पुताई का जिम्मा।
- ट्रैफिक पोल पर छह बाई छह इंच की लाल, पीली और सफेद रिफ्लेक्टिव टेप लगाना।
- चौराहों पर ग्रीन बेल्ट को हरा-भरा रखने के साथ उनका मेंटेनेंस और फुटपाथ के किनारे साल में एक बार पेंटिंग।
ये नहीं हो रहा है मार्ग और चौराहों पर
- मार्गों से गायब हो रहे हैं स्ट्रीट लाइट के खंभे
- मार्गों पर नियमित नहीं जलतीं स्ट्रीट लाइटें
- डिवाइडर पर लगे विद्युत पोलों की न तो पुताई हो रही है और न ही रिफ्लेक्टिव टेप लगी है
- जगह-जगह टूटे पड़े हैं डिवाइडर और रेलिंग
- रखरखाव के अभाव में चौराहों से ग्रीन बेल्ट गायब
- चौराहों पर लगी ट्रैफिक लाइट अव्यवस्थित, कहीं-कहीं ही चमकती हैं रिफ्लेक्टिव टेप
हाईकोर्ट में है बीओटी का मामला
- अनुबंध निर्माण विभाग ने किया। ठेकेदार से बीओटी मार्गों का रखरखाव कराने की जिम्मेदारी निर्माण विभाग की ही है। इसी तरह स्ट्रीट पोल और लाइटें पथ प्रकाश विभाग के हिस्से में आती हैं। मेरी जिम्मेदारी सिर्फ होर्डिंग का किराया वसूलने की है। बीओटी ठेकेदारों द्वारा लगाए जा रहे अवैध होर्डिंग का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। इसमें नगर निगम अपना पक्ष दे चुका है। - राजेश कुमार, संपत्ति अधिकारी, नगर निगम
शर्तें पूरी नहीं तो निरस्त होगा ठेका
- चार माह से होर्डिंग प्रभारी ने कभी इस मामले को मेरे सामने नहीं रखा। अब एसपी ट्रैफिक के जरिये मुझे जानकारी हुई है। मामला गंभीर लग रहा है। मैंने होर्डिंग प्रभारी से बीओटी मार्ग और चौराहों की फाइलें तलब कर ली हैं। जांच टीम भी गठित कर दी है। अगर बीओटी ठेकेदार अनुबंध की शर्तों को पूरा नहीं कर रहे हैं तो ठेका निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। - देवेंद्र कुमार कुशवाहा, नगरायुक्त
विद्युत निगम के कारण बंद हैं लाइटें
- हम अनुबंध की शर्तों के मुताबिक काम कर रहे हैं। परतापुर, रुड़की रोड और गढ़ रोड पर तीन स्थानों पर विद्युत निगम के कारण स्ट्रीट लाइटें बंद हैं। इस संबंध में निगम प्रशासन को अवगत भी कराया गया है। डिवाइडरों की रंगाई-पुताई, रिफ्लेक्टिव टेप लगाने का काम भी होता रहा है। जांच करा ली जाए, सब सामने आ जाएगा। - सचिन चौधरी, अभिनव एडवरटाइजिंग कंपनी
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नगर निगम प्रशासन ने शहर की जनता को सुंदर मार्ग, दिन ढलते ही रोशनी से नहाई सड़क और चौराहे, जाम से निजात दिलाने और सुचारु यातायात व्यवस्था के लिए ट्रैफिक लाइटें और चौराहों को हराभरा बनाने का सपना दिखाया था। बीओटी (बिल्ट, ऑपरेट, ट्रांसफर) पर निगम और ठेकेदार के बीच हुए करार में भी यह बातें थीं। लेकिन, निगम प्रशासन की लापरवाही और ठेकेदारों से साठगांठ के कारण सुंदर शहर तो दूर, जनता को जरूरी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। स्थिति यह है कि बीओटी पर दिए गए छह मुख्य मार्गों पर टूटे डिवाइडर, बगैर रिफ्लेक्टर लगे कट और जगह-जगह टूटी रेलिंग कब हादसों का सबब बन जाएं, कुछ नहीं कह सकते।
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रिपोर्ट में खुलेगी अधिकारियों की पोल
बीओटी मार्गों और चौराहों पर अनुबंध के तहत अब तक क्या काम हुआ और क्या नहीं हुआ? नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की? इन सभी बिंदुओं पर इसी सप्ताह नगर निगम निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एके सिंह और मोइनुद्दीन शहर को दो हिस्सों में बांटकर निरीक्षण करेंगे। इसकी रिपोर्ट नगरायुक्त को सौंपी जाएगी। इससे उम्मीद है कि बीओटी पर अब तक हुए खेल का भी खुलासा हो जाएगा।
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छह मार्गों पर बीओटी अनुबंध की शर्तें
- साल में दो बार रेलिंग, डिवाइडर और डिवाइडर पर लगे विद्युत पोल की रंगाई-पुताई होगी।
- सभी विद्युत पोलों पर लाल, पीली और सफेद रिफ्लेक्टिव पट्टी लगाई जाएगी।
- डिवाइडरों पर लगे विद्युत पोल को सुरक्षा और लाइटों को जलाने-बुझाने का जिम्मा।
- लाइट खराब होने पर तीन दिन से अधिक बंद रहने की दशा में ठेकेदार पर पांच रुपये प्रति लाइट की दर से जुर्माना वसूली। इसके बाद 100 रुपये प्रति लाइट की दर से दंड लगेगा।
चौराहों पर बीओटी अनुबंध की शर्तें
- बीओटी पर दिए गए 17 चौराहों की ट्रैफिक लाइट, फुटपाथ और पोल का रखरखाव, ट्रैफिक लाइटों को जलाने-बुझाने की व्यवस्था।
- वर्ष में दो बार ट्रैफिक लाइट और पोल की सफाई व रंगाई-पुताई का जिम्मा।
- ट्रैफिक पोल पर छह बाई छह इंच की लाल, पीली और सफेद रिफ्लेक्टिव टेप लगाना।
- चौराहों पर ग्रीन बेल्ट को हरा-भरा रखने के साथ उनका मेंटेनेंस और फुटपाथ के किनारे साल में एक बार पेंटिंग।
ये नहीं हो रहा है मार्ग और चौराहों पर
- मार्गों से गायब हो रहे हैं स्ट्रीट लाइट के खंभे
- मार्गों पर नियमित नहीं जलतीं स्ट्रीट लाइटें
- डिवाइडर पर लगे विद्युत पोलों की न तो पुताई हो रही है और न ही रिफ्लेक्टिव टेप लगी है
- जगह-जगह टूटे पड़े हैं डिवाइडर और रेलिंग
- रखरखाव के अभाव में चौराहों से ग्रीन बेल्ट गायब
- चौराहों पर लगी ट्रैफिक लाइट अव्यवस्थित, कहीं-कहीं ही चमकती हैं रिफ्लेक्टिव टेप
हाईकोर्ट में है बीओटी का मामला
- अनुबंध निर्माण विभाग ने किया। ठेकेदार से बीओटी मार्गों का रखरखाव कराने की जिम्मेदारी निर्माण विभाग की ही है। इसी तरह स्ट्रीट पोल और लाइटें पथ प्रकाश विभाग के हिस्से में आती हैं। मेरी जिम्मेदारी सिर्फ होर्डिंग का किराया वसूलने की है। बीओटी ठेकेदारों द्वारा लगाए जा रहे अवैध होर्डिंग का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। इसमें नगर निगम अपना पक्ष दे चुका है। - राजेश कुमार, संपत्ति अधिकारी, नगर निगम
शर्तें पूरी नहीं तो निरस्त होगा ठेका
- चार माह से होर्डिंग प्रभारी ने कभी इस मामले को मेरे सामने नहीं रखा। अब एसपी ट्रैफिक के जरिये मुझे जानकारी हुई है। मामला गंभीर लग रहा है। मैंने होर्डिंग प्रभारी से बीओटी मार्ग और चौराहों की फाइलें तलब कर ली हैं। जांच टीम भी गठित कर दी है। अगर बीओटी ठेकेदार अनुबंध की शर्तों को पूरा नहीं कर रहे हैं तो ठेका निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। - देवेंद्र कुमार कुशवाहा, नगरायुक्त
विद्युत निगम के कारण बंद हैं लाइटें
- हम अनुबंध की शर्तों के मुताबिक काम कर रहे हैं। परतापुर, रुड़की रोड और गढ़ रोड पर तीन स्थानों पर विद्युत निगम के कारण स्ट्रीट लाइटें बंद हैं। इस संबंध में निगम प्रशासन को अवगत भी कराया गया है। डिवाइडरों की रंगाई-पुताई, रिफ्लेक्टिव टेप लगाने का काम भी होता रहा है। जांच करा ली जाए, सब सामने आ जाएगा। - सचिन चौधरी, अभिनव एडवरटाइजिंग कंपनी