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प्रमुखी की दौड़ में दो दिग्गजों में जंग
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Tue, 19 Jan 2016 12:44 AM IST
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दौराला ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में इस बार दो दिग्गजों में जंग होगी। भाजपा भले ही हाथ खड़े कर चुकी हो लेकिन सपा के मजबूत प्रत्याशी के सामने चुनौती भाजपा नेता के भाई (निर्दलीय प्रत्याशी) से ही मिल रही है। दोनों प्रत्याशी बीडीसी सदस्यों पर डोरे डालने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
चुनाव हो गया दिलचस्प
चुनाव की तैयारियां दो माह से चल रही हैं। बीडीसी सदस्यों का चुनाव होते ही प्रत्याशी उनके संपर्क में हैं। वैसे भी इस बार ब्लॉक प्रमुख का पद सामान्य होने से यह चुनाव दिलचस्प हो गया है। बसपा नेता विनीत भराला, पूर्व विधायक चंद्रवीर सिंह के भतीजे संजय पधान, पूर्व प्रमुख राहुल देव के भाई सचिन अहलावत, भाजपा नेता सुनील भराला के भाई अजय भारद्वाज भराला और बीडीसी सदस्य मनीष अहलावत मैदान में उतरे। लेकिन अब जहां सचिन अहलावत सपा से प्रत्याशी हैं तो निर्दलीय के रूप में गन्ना समिति के पूर्व डायरेक्टर अजय भारद्वाज ही जमे हैं। दोनों प्रत्याशी जोड़तोड़ की राजनीति में लगे हैं। दोनों में ही कांटे की टक्कर है।
हर एक वोट कीमती
प्रमुख का चुनाव करने के लिए 70 बीडीसी सदस्य वोट डालेंगे। कहने को तो जिसके पास 35 से ज्यादा वोट होंगी, वही जीतेगा। लेकिन वोटों का ऊंट कब किस करवट बैठ जाए, कह नहीं सकते। यह तो वक्त ही बताएगा कि कितने सदस्य वोट करेंगे। हो सकता है कि केवल एक वोट ही निर्णायक साबित हो। वैसे आठ वोट ऐसी हैं जो दोनों प्रत्याशी अपने खेमे में मानकर चल रहे हैं। सदस्यों को अपने पक्ष में करने के लिए करीब 50 सदस्यों को मसूरी और अन्य हिल स्टेशन की सैर कराई जा रही है। सदस्य भी इसका पूरा लाभ उठा रहे हैं। एक वोट के रेट तीन लाख तक पहुंच गए हैं।
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यह राजनीति है मेरे भाई
राजनीति में कोई किसी के पक्ष में खुलकर आता है तो कोई बैक डोर से। सूत्रों के अनुसार अजय को सपा के ही एक नेता का समर्थन है। और वह एक समाज की वोटों को भी उसके पक्ष में कर रहा है। अंदरखाने की राजनीति में एक दूसरे नेता ने भी अजय को जिताने के लिए मोहरे बिछा रखे हैं। सचिन अहलावत की बात करें तो उन्हें जहां सपा का समर्थन है तो उनके काम ब्लॉक प्रमुखी की पुरानी राजनीति का अनुभव आएगा। दोनों ही प्रत्याशी अलग-अलग कारणों से मजबूत स्थिति में हैं।
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चुनाव हो गया दिलचस्प
चुनाव की तैयारियां दो माह से चल रही हैं। बीडीसी सदस्यों का चुनाव होते ही प्रत्याशी उनके संपर्क में हैं। वैसे भी इस बार ब्लॉक प्रमुख का पद सामान्य होने से यह चुनाव दिलचस्प हो गया है। बसपा नेता विनीत भराला, पूर्व विधायक चंद्रवीर सिंह के भतीजे संजय पधान, पूर्व प्रमुख राहुल देव के भाई सचिन अहलावत, भाजपा नेता सुनील भराला के भाई अजय भारद्वाज भराला और बीडीसी सदस्य मनीष अहलावत मैदान में उतरे। लेकिन अब जहां सचिन अहलावत सपा से प्रत्याशी हैं तो निर्दलीय के रूप में गन्ना समिति के पूर्व डायरेक्टर अजय भारद्वाज ही जमे हैं। दोनों प्रत्याशी जोड़तोड़ की राजनीति में लगे हैं। दोनों में ही कांटे की टक्कर है।
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हर एक वोट कीमती
प्रमुख का चुनाव करने के लिए 70 बीडीसी सदस्य वोट डालेंगे। कहने को तो जिसके पास 35 से ज्यादा वोट होंगी, वही जीतेगा। लेकिन वोटों का ऊंट कब किस करवट बैठ जाए, कह नहीं सकते। यह तो वक्त ही बताएगा कि कितने सदस्य वोट करेंगे। हो सकता है कि केवल एक वोट ही निर्णायक साबित हो। वैसे आठ वोट ऐसी हैं जो दोनों प्रत्याशी अपने खेमे में मानकर चल रहे हैं। सदस्यों को अपने पक्ष में करने के लिए करीब 50 सदस्यों को मसूरी और अन्य हिल स्टेशन की सैर कराई जा रही है। सदस्य भी इसका पूरा लाभ उठा रहे हैं। एक वोट के रेट तीन लाख तक पहुंच गए हैं।
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यह राजनीति है मेरे भाई
राजनीति में कोई किसी के पक्ष में खुलकर आता है तो कोई बैक डोर से। सूत्रों के अनुसार अजय को सपा के ही एक नेता का समर्थन है। और वह एक समाज की वोटों को भी उसके पक्ष में कर रहा है। अंदरखाने की राजनीति में एक दूसरे नेता ने भी अजय को जिताने के लिए मोहरे बिछा रखे हैं। सचिन अहलावत की बात करें तो उन्हें जहां सपा का समर्थन है तो उनके काम ब्लॉक प्रमुखी की पुरानी राजनीति का अनुभव आएगा। दोनों ही प्रत्याशी अलग-अलग कारणों से मजबूत स्थिति में हैं।