भाजपा सांसद के गोद लिए गांव का हाल 'बेहाल', तीन साल में नहीं हुआ विकास का कोई काम
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सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत मेरठ के भाजपा सांसद द्वारा गोद लिए गांव भगवानपुर चट्टावन में विकास तो दूर की बात है। गांव की सफाई व्यवस्था भी चरमरा गई है। ग्रामीणों के अनुसार सांसद ने गांव को गोद तो लिया परंतु विकास के नाम पर सौतेला व्यवहार किया। तीन वर्ष पूर्व गोद लिए गांव में सांसद अनेक बार आए परंतु विकास नहीं हो पाया। सांसद आदर्श गांव से दस किलोमीटर की दूरी पर मेरठ शहर चाणक्यपुरी में सांसद निवास करते है। दो दिन के अंदर होने वाले अपर मुख्य सचिव के दौरे को लेकर जिला स्तर के अधिकारियों ने गांव की ओर दौड़ लगाई। बुधवार को सरकारी संस्थानों स्कूल व स्वास्थ्य केंद्र आदि की रंगाई व पुताई के साथ अन्य व्यवस्था दुरुस्त कराते नजर आए।
भगवानपुर चट्टावन को भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने गोद लिया तो गांव की जनता ने खुशी मनाई। तीन वर्ष पूर्व मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री द्वारा जारी आदर्श गांव का खाका देखा तो इस गांव की जनता फूले नहीं समाई थी। योजना में चयनित होने के बाद रजपुरा ब्लॉक के कर्मचारियों ने गांव के प्रधान एवं गणमान्य लोगों से गांव के विकास पर चर्चा की। उस समय ग्रामीणों को लगा कि वास्तव में ही अब अच्छे दिन आएंगे। तीन वर्ष बाद गोद लेने वाले सांसद राजेंद्र अग्रवाल व अधिकारियों ने गांवों के दर्जनों बार दौरे करते हुए पीएमओ द्वारा सांसद एवं शासन प्रशासन को कई दर्जन विकास के बिंदुओं को गांव की जनता के सामने रखकर विकास का खाका तैयार किया। अब ग्रामीणों का कहना है कि तीन वर्ष का समय बीत गया परंतु गांव में विकास कार्य होना तो दूर अधिकारियों व सांसद ने गांव के साथ सौतेली मानसिकता दिखायी। ग्रामीण सुमेश, रामकुमार, कलवा, रमेश चंद, राधेश्याम, उमेश कुमार आदि का कहना है कि विकास योजनाओं के नाम पर लोगों को मुगेंरी लाल के सपने दिखाए विकास नहीं हुआ।
कहां गया मोदी जी के मॉडल गांव का सपना
देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र में सरकार बनने के बाद लोकनायक जयप्रकाश के जन्मदिन पर सांसद आदर्श गांव की योजना शुरू की थीं। परंतु सांसद राजेंद्र अग्रवाल द्वारा गोद लिया गांव भगवानपुर चट्टावन आज भी बुनियादी स्तर पर बदलाव की बांट जो रहा है। गांव के निवासी चर्चा कर कहते है कि प्रधानमंत्री के विकास का सपना शायद मजाक ही था और इस गांव की जनता अपने आप को ठगा सा महसूस कर रही है।
तालाबों पर अतिक्रमण एवं खुला नाला जी का जंजाल
ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव की तीन सीमाओं पर काफी बड़े तालाब है परंतु उन पर या तो अतिक्रमण है या फिर सफाई के अभाव में अटे होने के चलते गांव की निकासी का पानी जिस खुले नाले से तालाबों में जाता है। वहां गंदगी के अंबार लग जाते है। ग्राम प्रधान अनिल कुमार का कहना है कि जब से वह प्रधान बने है उन्होंने काफी विकास कार्य कराए है।
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