बाइक बोट घोटाले में बड़ी गिरफ्तारी: वेस्ट यूपी में बैंक खोलकर विजय शर्मा ने अर्जित की करोड़ों की संपत्ति
- नोबेल बैंक के संस्थापक और निदेशक विजय कुमार शर्मा की गिरफ्तारी का मामला
- 3500 करोड़ रुपए के बाइक बोट घोटाले में 57 मुकदमों की विवेचना कर रही है ईओडब्ल्यू मेरठ
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3500 करोड़ रुपए के बाइक बोट घोटाले में जहां नोएडा में दर्ज 57 मुकदमों की जांच यूपी पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा मेरठ सेक्टर की पुलिस कर रही है। वही ईओडब्ल्यू मेरठ की टीम ने गुरुवार को नोबेल बैंक के संस्थापक और सीईओ विजय कुमार शर्मा की नोएडा से गिरफ्तारी की है।
ईओडब्ल्यू मेरठ सेक्टर के एसपी डॉक्टर राम सुरेश यादव का कहना है की विजय कुमार शर्मा ने वेस्ट यूपी में नोबेल बैंक खोलकर करोड़ों रुपए की अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित की है। अभी तक की जांच में सामने आया है कि करीब 150 करोड़ रुपए की संपत्ति अर्जित की है। ईओडब्ल्यू मेरठ की टीम बाइक बोट घोटाले में अभी तक 18 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
ईओडब्ल्यू मेरठ सेक्टर के एसपी डॉ राम सुरेश यादव के अनुसार, विजय कुमार शर्मा ने साल 2003 में नोबेल बैंक की स्थापना की। तथा 4 जिलों में 8 ब्रांच खोली। जिनमें चार ब्रांच नोएडा में स्थापित हैं इनके अलावा मेरठ, बुलंदशहर, बिजनौर में भी ब्रांच खोली गई।
वर्तमान में इस बैंक के विजय कुमार सीईओ हैं। इसी बैंक में विजय कुमार का बेटा गोविंद भारद्वाज बैंक का लीगल एडवाइजर व पर्सनल सेक्रेटरी है। जबकि दूसरा बेटा राघव भारद्वाज बैंक का डिप्टी सीईओ है।
2018 में बिजेंद्र सिंह हुड्डा, संजय भाटी द्वारा अपनी जीआईपीएल कंपनी व अन्य कंपनियों के इसी बैंक में बिना केवाईसी की शर्तों को पूरा किए विजय कुमार शर्मा के सहयोग से खाते खुलवाए गए।
संजय भाटी की कंपनी जीआईपीएल बिजेंद्र सिंह हुड्डा की कंपनियों के जुड़ने के बाद बैंक में ज्यादा काम आने लगा। जीआईपीएल कंपनी में निवेशकों का जो 70 करोड़ नगद आया था। उसको विजय कुमार शर्मा ने संजय भाटी से मिलीभगत कर अपनी कंस्ट्रक्शन कंपनी वाइट हाउस ग्रेटर नोएडा में लगा लिया था। और करीब साढे सात करोड़ रुपए जीआईपीएल व आईटीवी के खातों से इसी कंस्ट्रक्शन कंपनी में गया।
संजय भाटी ने अपने दो डायरेक्टर श्यान आरिफ, विवेक सिंह को नियम विरुद्ध विजय कुमार शर्मा की सहमति से बैंक में जीआईपीएल कंपनी में निवेशकों के धन राशि को समायोजन करने के लिए बैठाया।
जबकि इन दोनों की बैंक में न तो नियुक्ति थी। और न ही अधिकारी थे। विजय कुमार शर्मा ने मनमाफिक रूप से बिजेंद्र सिंह हुड्डा की कंपनी पीटीपीएल, आईटीवी व गर्वित इन्फोटेक के नाम पर गाड़ियों के लिए 2 करोड़ 10 लाख का लोन मनमानी तरीके से अपने बैंक से दिलाया।
जीआईपीएल के निवेशकों को पैसा मिलना बंद हो गया। तभी लोग दुखी होकर झगड़ा करने लगे। लेकिन संजय भाटी, बिजेंद्र सिंह हुड्डा के कहने पर वीके शर्मा ने गैरकानूनी तरीके से आपराधिक षड्यंत्र के तहत लाखों चेक नोबेल बैंक की छपवाये और उसमें से 2.61लाख चैक निवेशकों को दे दिए गए।
यह बात विजय कुमार शर्मा को अच्छी तरीके से पता थी कि निवेशकों को जो चैक दिए जा रहे हैं वह फर्जी हैं और उनका कोई मूल्य नहीं है। लेकिन विजय कुमार शर्मा ने कार्य किया। और इस प्रकार जीआईपीएल के डायरेक्टर व नोबेल बैंक के चेयरमैन वीके शर्मा आपस में मिलीभगत करके लाखों निवेशकों को फर्जी चैक देने में सफल हुए।
निवेशकों ने इन सभी चैकों को बैंक खातों में जमा कराया गया तो खातों में पैसा न होने पर फर्जी होने के कारण सारे चेक बाउंस हो गए। वीके शर्मा के सारे राजफाश खुले। उन्होंने सारा दोष बैंक के मैनेजर आरके नागपाल निवासी अलीगढ़ पर लगा दिया और दोषी मानते हुए बर्खास्त कर दिया। तत्कालीन नोबेल बैंक के मैनेजर आरके नागपाल ने अपने लिखित बयान में बताया कि जो भी बैंक की गतिविधि व सारे कार्य वीके शर्मा के कहने पर किए जाते थे।