कैराना लोकसभा उपचुनाव में बड़े मुद्दे गायब, दंगा, पलायन और जातीय समीकरण हावी
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कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में अभी तक स्थानीय समस्याएं मुद्दा नहीं बन सकी। नेताओं को न तो यूपी हरियाणा सीमा विवाद दिखाई दे रहा है और न ही मेरठ करनाल मार्ग पर दो राज्यों के बीच परिवहन व्यवस्था का अभाव। गिरते भूजल स्तर के कारण जिले के पांचों ब्लाक डार्क जोन में हैं, तो कृष्णा नदी का प्रदूषित पानी बीमारियां बांटता है। बावजूद इसके मुजफ्फरनगर का सांप्रदायिक दंगा, कैराना पलायन प्रकरण और जातीय समीकरण चुनावी मुद्दों में हावी हैं।
आलम यह है कि चुनावी सभाओं में नेताओं की जुबां पर इन मुद्दों का जिक्र तक नहीं होता, बल्कि मुजफ्फरनगर का सांप्रदायिक दंगा और कैराना पलायन प्रकरण ही हावी रहता है। इसके साथ ही जातीय समीकरणों को साधने में भी नेताओं का ध्यान केंद्रित है, ताकि किसी तरह अपनी जीत सुनिश्चित की जा सके। सवाल यह है कि आखिर जनता की बड़ी समस्याओं को चुनाव में मुद्दा क्यों नहीं बनाया जाता है।
यूपी हरियाणा सीमा विवाद
करीब चार दशक से उत्तर प्रदेश और हरियाणा के किसानों के बीच यमुना खादर में कृषि भूमि के स्वामित्व का विवाद चल रहा है। विवाद के निस्तारण के लिए पूर्व में दीक्षित आयोग का गठन भी हुआ था, जिसके बाद यमुना खादर में सीमांकन के लिए पिलर लगाए गए थे। बावजूद इसके विवाद खत्म नहीं हुआ। हर साल ही फसल कटाई के दौरान दोनों प्रदेशों के किसानों में टकराव होता है। एक महीना पूर्व ही यमुना खादर में जबरन फसल काटने के विरोध पर झिंझाना क्षेत्र के गांव बल्हेड़ा निवासी किसान राजेश की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वहीं, कैराना क्षेत्र में भी जबरन फसल काटने और आग लगाने और कांधला क्षेत्र में यूपी-हरियाणा के किसानों में टकराव की घटनाएं हो चुकी हैं।
मेरठ करनाल परिवहन सेवा
यूपी और हरियाणा के बीच पानीपत-खटीमा मार्ग पर बसों का आवागमन होता है, लेकिन मेरठ-करनाल मार्ग पर यह सेवा नहीं है। यूपी की बसें करनाल रोड पर बिडौली तक ही जाती हैं, तो हरियाणा की बसें भी यमुना पुल बॉर्डर तक आती हैं। इस कारण करनाल जाने वाले यात्रियों को बिड़ौली चेकपोस्ट से पैदल चलकर हरियाणा की बसों में सवार होना पड़ता है। कई दशक से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन इसका समाधान नहीं हो सका।
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गिरता भूजल स्तर
शामली जनपद में भूजल स्तर करीब 200 फीट से नीचे पहुंच गया है। इस कारण जिले के शामली, कैराना, ऊन, थानाभव और कांधला पांचों ब्लाक डार्क जोन घोषित हो चुके हैं। गिरता भूजल स्तर भविष्य में पानी के संकट का संकेत देता है, लेकिन राजनीतिक दलों की निगाह में यह मुद्दा नजर नहीं आ रहा है।
मैली हुई कृष्णा नदी
सहारनपुर जनपद से प्रारंभ होकर कृष्णा नदी शामली जनपद से होते हुए 45 किलोमीटर तक बागपत की हिंडन नदी में जाकर गिरती है। शामली जनपद में कृष्णा नदी मृत प्राय हो चुकी है, जिसका बड़ा कारण कृष्णा नदी में प्रदूषित पानी है। एक समय था जब कृष्णा नदी बिल्कुल साफ होती थी, लेकिन अब तो इसके प्रदूषण का असर आसपास के गांवों तक दिखाई देता है। जलालाबाद क्षेत्र के गांव चंदेनामाल, दभेड़ी सहित कई गांवों में हैंडपंपों से भी प्रदूषित पानी आता है और बीमारियां भी फैल रही हैं। बीमारियों की वजह से पूर्व में कई लोगों की मौत तक हो चुकी हैं। जिले के करीब 37 गांव ऐसे चिह्नित हैं, जो कृष्णा नदी के आसपास हैं और वहां प्रदूषित पानी की समस्या है, लेकिन राजनीतिक दलों के एजेंडे से यह समस्या दूर है।
ट्रैफिक जाम
शामली शहर रोजाना ट्रैफिक जाम से जूझता है। पानीपत-खटीमा, दिल्ली-सहारनपुर और मेरठ करनाल हाइवे शहर के बीच से गुजरते हैं। वाहनों की अधिकता के साथ ही ओवरलोड वाहनों की आवाजाही बढ़ने के कारण ट्रैफिक जाम के कारण समस्या और विकराल हो गई है। शहर के व्यापारी से लेकर आम लोग तक ट्रैफिक जाम के कारण परेशान रहते हैं, लेकिन कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में ट्रैफिक जाम भी नेताओं के मुद्दों से गायब है।
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