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52 भट्ठों की आग में तप रहे एनजीटी के आदेश  

Thu, 04 May 2017 11:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Thu, 04 May 2017 11:13 AM IST
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bhatte are working without licence
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

प्रशासनिक साठगांठ के खेल में एनजीटी के आदेशों को बिना एनओसी चल रहे 52 ईंट भट्ठों की आग में झोंक दिया गया है। इन भट्ठों के संचालन के लिए पर्यावरण विभाग से प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य है। लेकिन नियम और आदेशों का उल्लंघन कर सेटिंग के चलते बरसात तक इन्हें चलाने की प्रशासन से मौन स्वीकृति ले ली गई। खास बात यह है कि इनमें 28 भट्ठे प्रतिबंधित वन अभ्यारण्य क्षेत्र में संचालित हैं। इसे लेकर दूसरे भट्ठा संचालकों से लेकर प्रशासनिक हलके में चर्चाओं का बाजार गरम है।

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ये है भट्ठा संचालन का नियम 
ईंट भट्ठे संचालन को लेकर दायर याचिका पर एनजीटी के आदेशों के तहत पर्यावरण मंत्रालय से प्रमाणपत्र लेना जरूरी है। हालांकि बाद में शासन ने इस बेहद परेशानी भरी कार्यवाही को सरल करते हुए जिला स्तर पर ही कमेटियां गठित कर वहीं से प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया था। लेकिन इस प्रमाणपत्र को लेने के लिए जरूरी औपचारिकताएं ही भट्ठा संचालक पूरी नहीं कर पाए और जिले के 215 भट्ठा संचालकों में से कुछ को ही यह प्रमाणपत्र अभी तक मिल पाया है। 
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सब मवाना तहसील में
जैसे ही कुछ भट्ठों को प्रमाणपत्र मिला, तो बाकी भट्ठे भी सीजन आते ही शुरू हो गए। इन भट्ठा मालिकों ने किसानों से जमीन लीज पर लेकर मिट्टी खनन करना शुरू कर दिया। प्रशासन ने दिखावे के लिए नोटिस भी जारी किए। ये 52 भट्ठे मवाना तहसील अंतर्गत आते हैं। जिनमें से 28 ऐसे हैं जो वन अभ्यारण्य क्षेत्र की सीमा में या आसपास लगते हैं।
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सेटिंग से मिली मौन सहमति 
तीन दिन पूर्व इन 52 भट्ठा मालिकों की परीक्षितगढ़ में बैठक हुई। जहां प्रशासन से मिले नोटिस पर चर्चा के बाद तय हुआ कि कैसे भी करके बरसात तक भट्ठे चलाने की अनुमति ले ली जाए। इसके बाद प्रशासनिक हलके में पकड़ रखने वाले दो भट्ठा संचालकों ने सेटिंग कर बरसात तक चलाने की मौन स्वीकृति प्रदान करा दी। 

यहां भी नियमों का उल्लंघन 
भट्ठा संचालकों को डेढ़ फुट गहरायी तक मिट्टी खनन की इजाजत है। जिसकी रायल्टी जमा करने के बाद अनुमति दी जाती है। लेकिन सेटिंग में ये संचालक दो से पांच फुट तक खनन कर रहे हैं। जो सीधे नियमों का उल्लंघन है। 

इस चुप्पी में रहस्य
भट्ठा संचालकों को प्रदूषण नियंत्रण विभाग से भी एनओसी लेनी होती है। लेकिन प्रशासनिक साठगांठ से चल रहे इन भट्ठों पर इस विभाग की चुप्पी यह रहस्य और बढ़ा रही है।

वन विभाग ने खारिज किया आवेदन
मवाना तहसील क्षेत्र में वन अभ्यारण्य क्षेत्र से जुड़े तमाम भट्ठा मालिकों ने एनओसी के लिए वन विभाग में आवेदन किया था। लेकिन विभाग ने इनके आवेदन निरस्त कर दिए। बावजूद इसके संचालन जारी है। 


मोटी डीलिंग की चर्चा आम 
इन 52 भट्ठों के बरसात तक संचालन करने की मौन स्वीकृति के पीछे मोटी डीलिंग की चर्चा आम है। कलक्ट्रेट में जहां यह चर्चा जोरों पर है, तो कुछ भट्ठा संचालकों ने भी दबे स्वर में इसे स्वीकार किया है। 

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