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बसपा जिलाध्यक्ष सुनील पर गिरी गाज
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 14 Dec 2016 01:52 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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खैरनगर के नासिर हत्याकांड में बसपा जिलाध्यक्ष सुनील जाटव पर गाज गिर गई। दरअसल, इस मामले में नासिर को बसपा कार्यकर्ता बताने, ना बताने के खेल में ऐसी पटकथा तैयार हुई, जिसका परिणाम इस अदला बदली के रूप में सामने आया। सुनील से पहले जिलाध्यक्ष रहे अश्वनी जाटव को फिर से जिलाध्यक्ष बना दिया गया। जबकि सुनील जाटव को यहां से हटाकर बागपत का जिला प्रभारी बनाया गया है।
बसपा के वेस्ट यूपी प्रभारी अतर सिंह राव ने मंगलवार देर रात इस परिवर्तन का पत्र जारी कर दिया। हालांकि पत्र में सिर्फ इतना कहा गया है कि उच्च निर्देशानुसार यह फैसला लिया गया है। इसका कोई कारण नहीं बताया गया है। हालांकि यह चर्चा आम है कि नासिर हत्याकांड के कारण ही यह सब हुआ। दरअसल बसपा कार्यकर्ता नासिर की नौ दिसंबर को सरेशाम हत्या हो गई थी। इस प्रकरण में हालांकि यह स्पष्ट था कि नासिर बसपा कार्यकर्ता ही था। लेकिन जिलाध्यक्ष सुनील जाटव पर गलत बयानबाजी का आरोप लगा। कहा गया कि नासिर को बसपा का कार्यकर्ता नहीं समझा जा रहा है। इसका विरोध हुआ। बसपाइयों से नाराजगी जताई। इसका असर यह रहा कि बसपा आलाकमान डैमेज कंट्रोल में जुट गया।
वेस्ट यूपी प्रभारी अतर सिंह राव और पार्टी के सभी पूर्व विधायक, प्रत्याशी नासिर के घर गए और सांत्वना दी। एक लाख का चेक सौंपा और दो लाख की मदद का आश्वासन दिया। इस पूरे प्रकरण को आला कमान के सामने रखा गया। माना जा रहा है कि बसपा सुप्रीमो ने इसे गंभीरता से लिया और सुनील को यहां से हटाने का फरमान जारी कर दिया। अब उन्हें बागपत जिला प्रभारी के तौर पर भेजा गया है। वहां से अश्वनी जाटव को यहां भेजा गया है।
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विरोध तो बहाना था, इरादा हटाना था
नासिर हत्याकांड में सुनील को टारगेट पर रखना दरअसल बसपा आलाकमान के लिए बहाना था। सुनील को हटाने की पटकथा तो काफी पहले तैयार की जा रही थी। बस पार्टी आलाकमान उचित मौके की तलाश में था। चुनाव सिर पर हैं और बसपाई आपसी राजनीति और खींचतान से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप प्रत्यारोप के दौर चल रहे हैं। प्रत्याशियों को हटाया जा रहा है। यही कारण है कि बसपाई असहज महसूस कर रहे हैं। सुनील को हटाने से भी बसपाइयों में यही चर्चा है। एक धड़े का यह कहना है कि पार्टी के मुख्य सिपहसालार बसपा सुप्रीमो मायावती को गलत रिपोर्ट दे रहे हैं। जो पदाधिकारी मुख्य सिपहसालारों के नजदीक है उसे ही अच्छे पदों पर तरजीह दी जा रही है। बाकी को साइड किया जा रहा है। यदि किसी वजह से ऐसे कार्यकर्ता को जिम्मेदारी मिल भी जाए तो उसके पर कतरने को पूरी ताकत मुख्य सिपहसालार लगा रहे हैं। हालांकि मुख्य जोन कोऑर्डिनेटर अतर सिंह राव कहते हैं कि पार्टी में आपसी खींचतान नहीं है। अनुशासन को सर्वोपरि रखा गया है।
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बसपा के वेस्ट यूपी प्रभारी अतर सिंह राव ने मंगलवार देर रात इस परिवर्तन का पत्र जारी कर दिया। हालांकि पत्र में सिर्फ इतना कहा गया है कि उच्च निर्देशानुसार यह फैसला लिया गया है। इसका कोई कारण नहीं बताया गया है। हालांकि यह चर्चा आम है कि नासिर हत्याकांड के कारण ही यह सब हुआ। दरअसल बसपा कार्यकर्ता नासिर की नौ दिसंबर को सरेशाम हत्या हो गई थी। इस प्रकरण में हालांकि यह स्पष्ट था कि नासिर बसपा कार्यकर्ता ही था। लेकिन जिलाध्यक्ष सुनील जाटव पर गलत बयानबाजी का आरोप लगा। कहा गया कि नासिर को बसपा का कार्यकर्ता नहीं समझा जा रहा है। इसका विरोध हुआ। बसपाइयों से नाराजगी जताई। इसका असर यह रहा कि बसपा आलाकमान डैमेज कंट्रोल में जुट गया।
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वेस्ट यूपी प्रभारी अतर सिंह राव और पार्टी के सभी पूर्व विधायक, प्रत्याशी नासिर के घर गए और सांत्वना दी। एक लाख का चेक सौंपा और दो लाख की मदद का आश्वासन दिया। इस पूरे प्रकरण को आला कमान के सामने रखा गया। माना जा रहा है कि बसपा सुप्रीमो ने इसे गंभीरता से लिया और सुनील को यहां से हटाने का फरमान जारी कर दिया। अब उन्हें बागपत जिला प्रभारी के तौर पर भेजा गया है। वहां से अश्वनी जाटव को यहां भेजा गया है।
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विरोध तो बहाना था, इरादा हटाना था
नासिर हत्याकांड में सुनील को टारगेट पर रखना दरअसल बसपा आलाकमान के लिए बहाना था। सुनील को हटाने की पटकथा तो काफी पहले तैयार की जा रही थी। बस पार्टी आलाकमान उचित मौके की तलाश में था। चुनाव सिर पर हैं और बसपाई आपसी राजनीति और खींचतान से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप प्रत्यारोप के दौर चल रहे हैं। प्रत्याशियों को हटाया जा रहा है। यही कारण है कि बसपाई असहज महसूस कर रहे हैं। सुनील को हटाने से भी बसपाइयों में यही चर्चा है। एक धड़े का यह कहना है कि पार्टी के मुख्य सिपहसालार बसपा सुप्रीमो मायावती को गलत रिपोर्ट दे रहे हैं। जो पदाधिकारी मुख्य सिपहसालारों के नजदीक है उसे ही अच्छे पदों पर तरजीह दी जा रही है। बाकी को साइड किया जा रहा है। यदि किसी वजह से ऐसे कार्यकर्ता को जिम्मेदारी मिल भी जाए तो उसके पर कतरने को पूरी ताकत मुख्य सिपहसालार लगा रहे हैं। हालांकि मुख्य जोन कोऑर्डिनेटर अतर सिंह राव कहते हैं कि पार्टी में आपसी खींचतान नहीं है। अनुशासन को सर्वोपरि रखा गया है।