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मजरूबी चिट्ठी में जिंदगी से हार गया प्रदीप

Fri, 14 Oct 2016 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
अमर उजाला ब्यूरों Updated Fri, 14 Oct 2016 02:09 AM IST
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bajboori chitti me jindgi
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
इसे बेपरवाह सरकारी सिस्टम कहें या फिर किसी की जिंदगी से कीमती कानूनी कायदे। बुधवार रात बुरी तरह तड़पते जिस प्रदीप को कंकरखेड़ा पुलिस को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए था, उसे थाने लेकर पहुंच गई। प्रदीप की जिंदगी के लिए उस समय एक-एक पल कीमती था। लेकिन पुलिस ने मजरूबी चिट्ठी बनवाने में ही दो घंटे लगा दिए। घटना को जीडी में दर्ज करने के बाद जब उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंची तो बहुत देर हो चुकी थी। सिस्टम से हारे प्रदीप ने अस्पताल की चौखट पर ही दम तोड़ दिया।
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प्रदीप की मौत का कारण जहां दोनों नामजद दोस्त रहे तो कंकरखेड़ा पुलिस भी कम दोषी नहीं है। उसकी मौत के तीन घंटे बाद कंकरखेड़ा पुलिस ने परिजनों को घटना की सूचना दी तो परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस के खिलाफ आक्रोश इतना था कि बृहस्पतिवार सुबह ही सैकड़ों लोग जिला अस्पताल में पहुंच गये। भीड़ के आक्रोश को देखकर जिला अस्पताल को छावनी में तब्दील कर दिया गया। परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश साफ था कि हत्या का आरोप दोस्तों पर नहीं बल्कि पुलिस पर लगाया।
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परिजनों के अनुसार बुधवार रात करीब 9:30 बजे प्रदीप घायल हुआ था और 9:45 बजे पुलिस मौके पर पहुंची। घटना स्थल से कंकरखेड़ा में रीता नर्सिंग होम की दूरी सिर्फ 500 मीटर थी। लेकिन पुलिस घायल को लेकर थाने में बैठी रही और रात 11.26 बजे जब जिला अस्पताल में प्रदीप को ले जाया गया तो डॉक्टरों ने साफ संकेत दे दिया। खुद पुलिस का कहना है कि घायल तड़प रहा था। प्राईवेट अस्पताल में तुरंत इलाज मिल जाता तो प्रदीप जिंदा होता। लेकिन पुलिस की बड़ी लापरवाही प्रदीप की जिंदगी पर भारी पड़ गई। पुलिस प्राईवेट गाड़ी से घायल को लेकर पहुंची। रालोद नेता राजकुमार संागवान, निर्वाण सिंह और अन्य ने सीओ सरधना से साफ कहा कि सीओ साहब, इलाज की मजरूबी चिट्ठी को रख लेना, हमारा प्रदीप तो दुनिया से ही चला गया।
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आशीष बोला हमने नहीं पुलिस ने मारा
प्रदीप की हत्या के मुख्यारोपी उसके दोस्त आशीष की बात पर विश्वास किया जाए तो प्रदीप की हत्या पुलिस द्वारा बेरहमी से की गई पिटाई के कारण हुई। प्रदीप के परिजनों ने आशीष से फोन पर बात की तो उसने बताया कि उन्होंने कार में बैठकर आराम से शराब पी और बाद में होटल में खाना खाने के लिए गए। इस दौरान उनके बीच किसी बात को लेकर कहासुनी होने लगी और मारपीट शुरू हो गई। जिसकी सूचना किसी ने पुलिस को दे दी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। जिसे देखते ही आशीष और पुष्पदेव तो फरार हो गए। लेकिन पुलिस ने प्रदीप को पकड़ लिया। प्रदीप ने नशे में पुलिस के साथ अभद्र व्यवहार किया। जिसके चलते पुलिस वालों ने उसकी बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी। उसके बाद उसे थाने ले जाकर पीटा। जिससे उसकी थाने में ही मौत हो गई। बाद में पुलिस उसे मृत हालत में ही जिला अस्पताल लेकर पहुंची और उसकी हत्या का आरोप उसके दोस्तों पर ही लगा दिया। परिजनों ने कहा कि पुलिस के खिलाफ भी तहरीर देंगे। वहीं जिला अस्पताल में परिजनों के पूछने पर चिकित्सकों ने बताया कि प्रदीप को जब अस्पताल लाया गया तो वह मृत था। जबकि पुलिस का दावा है कि उसकी उपचार के दौरान मौत हुई।

शोभापुर चौकी इंचार्ज हुआ गायब
घटना के बाद शोभापुर पुलिस चौकी इंचार्ज दिनेश कुमार अचानक से गायब हो गया। बुधवार रात वह लूट की सूचना पर गश्त पर था। इस दौरान झगड़े की सूचना आने पर वह खुद ही जीप लेकर होटल पहुंचा था और प्रदीप को घायलावस्था में जीप में डालकर थाने लेकर गया था। परिजनों ने चौकी इंचार्ज पर भी कार्रवाई को लेकर हंगामा किया।

12 साल की थी दोस्ती
परिजनों ने बताया कि आशीष व पुष्पदेव की दोस्ती प्रदीप से 12 साल पुरानी थी। तीनों ने एक साथ ही मेरठ कॉलेज मेरठ से ग्रेजुएशन की और बाद में दिल्ली में एक साथ जॉब भी की। शादी होने के बाद प्रदीप ने नौकरी छोड़ दी और प्राईवेट में कोचिंग पढ़ाने लगा। जबकि वे दोनों अभी दिल्ली में ही नौकरी कर रहे हैं। आशीष के पिता राजपाल व पुष्पदेव के पिता इंद्रपाल दिल्ली पुलिस में दरोगा थे। दोनों की मौत हो चुकी हैं।

परिवार में मचा कोहराम:
प्रदीप की शादी नौ वर्ष पूर्व मुरादनगर के गांव जलालाबाद की रहने वाली रिंकी नाम की एक युवती से हुई थी। सात साल की बेटी अंशिका और तीन साल का बेटा हंस है। प्रदीप का बड़ा भाई अमरीश और छोटा भाई अमित हैं।  कोट

मौके पर चौकी इंचार्ज दिनेश कुमार पहुंचे थे। घायल को थाने लेकर पहुंचने के बाद चिट्ठी बनवाकर तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। थाने में प्रदीप की पिटाई करने के आरोप गलत हैं। कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस निजी अस्पताल में भर्ती नहीं करा सकती थी। दोस्तों पर केस दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।- यादराम यादव, एसओ कंकरखेड़ा
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