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रालोद को आखिर क्यों भूल गए 'बुआ और बबुआ', उठ रहे ये बड़े सवाल

Sun, 13 Jan 2019 02:56 AM IST
कपिल kapil मदन बालियान, अमर उजाला, बागपत
मदन बालियान, अमर उजाला, बागपत Published by: कपिल kapil Updated Sun, 13 Jan 2019 02:56 AM IST
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Baghpat, Mayawati Akhilesh have not included RLD in SP BSP coalition
अखिलेश यादव और मायावती - फोटो : अमर उजाला

सपा और बसपा ने लखनऊ में गठबंधन के एलान में फिलहाल पश्चिम यूपी में खासा वजूद रखने वाले रालोद का जिक्र नहीं किया गया है, लेकिन सियासत में अभी कई दांव बाकी हैं। फिलहाल रालोद को हाशिए पर छोड़ दिए जाने से सियासी गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। बात कहां और क्यों बिगड़ी या फिर से बात बन जाएगी। ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब तो वक्त के साथ मिलेंगे, लेकिन वर्तमान की बात करें तो रालोद के गढ़ बागपत में बसपा और सपा का गठबंधन नया गुल खिलाने की ताकत रखता है। एक या दो नहीं बल्कि पिछले 23 साल के नतीजे बताते हैं कि कभी बसपा तो कभी सपा ने रालोद के लिए लोकसभा चुनाव में चुनौती पेश की। 

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लोकसभा चुनाव 2014 के आंकडे़ ही रालोद पर भारी पड़ रहे हैं। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद भाजपा और मोदी लहर में बागपत सीट से सपा के उम्मीदवार गुलाम मोहम्मद 213609 लाख  वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे थे। जबकि बसपा के प्रशांत चौधरी ने 141743 लाख वोट हासिल किए थे। बसपा और बसपा के वोट जोड़ दें तो यह 355352 लाख होंगे। रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह को मिले थे 199516 लाख वोट। इस गणित को ही अगर आधार बनाए तो बागपत में बसपा और सपा का गठबंधन नया गुल खिलाने की ताकत रखता है।

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 साल 2014 के नतीजे :
पार्टी              प्रत्याशी                वोट
भाजपा        सत्यपाल सिंह          423475
सपा          गुलाम मोहम्मद          213609
रालोद        चौधरी अजित सिंह    199516
बसपा        प्रशांत चौधरी            141743

रालोद के लिए अभी बंद नहीं हुए दरवाजे
सपा और बसपा गठबंधन के ऐलान से सियासी गलियों में फिर से गणित बाजी लगाई जानी शुरू हो गई है। शनिवार को बदले समीकरण से सपा और बसपा की बराबरी की तस्वीर साफ हो गई है। रालोद का जिक्र भले ही फिलहाल नहीं किया गया हो, लेकिन बागपत और मथुरा की सीट इस गठबंधन में रालोद के लिए रिजर्व रखे जाने की बात मानी जा रही है। रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच गठबंधन पर बातें हुई हैं, जबकि रालोद की बसपा के साथ बातचीत नहीं हो सकी। ऐसे में दो सीटों के अलावा सपा के खाते से दो सीट और रालोद को मिलने की संभावना है, इनमें मुजफ्फरनगर की सीट भी शामिल है।

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