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स्वास्थ्य विभाग का कारनामा : सिफारिश एक्शन की, दे डाला अटैचमेंट का तोहफा
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Tue, 29 Nov 2016 12:47 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट का खेल नहीं रुक रहा है। शासन से लेकर जिला प्रशासन निर्देश दे रहा है कि काम न करने वाले चिकित्सकों व स्टाफ पर कार्रवाई की जाए। लेकिन उसके बजाय अटैचमेंट का तोहफा दिया जा रहा है। भूड़बराल सीएचसी पर तैनात ईएनटी चिकित्सक डॉ. रजत के खिलाफ एसीएमओ ने एक्शन की सिफारिश की। लेकिन कार्रवाई के बजाय उन्हें सीएमओ कार्यालय में तैनात कर दिया गया।
डॉ. रजत पर आरोप था कि वे पोस्टमार्टम हाउस पर ड्यूटी से लेकर विकलांग बोर्ड तक में जाने से आनाकानी करते हैं। जिस पर एसीएमओ ने सीएमओ को पत्र लिखकर यहां तक कहा कि डॉ. रजत का उच्चस्तरीय पैनल से मेडिकल परीक्षण कराया जाए। क्योंकि वे ड्यूटी वाले दिन बीमार रहते हैं और अगले ही दिन स्वस्थ हो जाते हैं। दरअसल मामला 22 अक्तूबर की रात हुए एक पोस्टमार्टम से जुड़ा है। यह पोस्टमार्टम डॉ. रजत को करना था, क्योंकि रोस्टर के हिसाब से उन्हीं की ड्यूटी थी। लेकिन वे न तो पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और न ही उन्होंने फोन रिसीव किया। ऐसे में एसीएमओ को रात एक बजे जाकर पोस्टमार्टम करना पड़ा। अगले दिन डॉ. रजत से जवाब मांगा गया तो उन्होंने अपनी तबियत खराब बताई। इसके बाद ही एसीएमओ ने सीएमओ से डॉ. रजत के खिलाफ कार्रवाई और मेडिकल परीक्षण कराने की संस्तुति की। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
स्वास्थ्य विभाग का झूठा शपथ पत्र
दो माह पूर्व शासन से सभी सीएमओ को निर्देश दिए गए थे कि जो भी चिकित्सक अटैचमेंट पर हैं, उन्हें मूल तैनाती स्थल पर भेजा जाए। सीएमओ शपथपत्र दें कि उनके यहां पर कोई चिकित्सक अटैचमेंट पर नहीं है। शासन को इस आशय का शपथपत्र दिया गया। लेकिन उसके बाद डॉ. रजत को नेशनल हेल्थ मिशन के तहत संचालित होने वाले नॉन कम्यूनिकेबल डिजीज (एनसीडी) प्रोग्राम का सीएमओ दफ्तर में ही प्रभारी बना दिया गया। जबकि उनकी मूल तैनाती भूड़बराल सीएचसी में है। ‘अमर उजाला’ के पास उपलब्ध रिकॉर्ड बता रहा है कि तैनाती सीएमओ दफ्तर में चल रही है। यानी शासन के निर्देशों को दरकिनार कर एक चिकित्सक पर खासी मेहरबानी दिखाई जा रही है। ऐसे हालात में बड़े सुधार की क्या उम्मीद की जा सकती है। उधर, इस प्रकरण में सीएमओ डॉ. वीपी सिंह से प्रतिक्रिया लेनी चाही तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।
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डॉ. रजत पर आरोप था कि वे पोस्टमार्टम हाउस पर ड्यूटी से लेकर विकलांग बोर्ड तक में जाने से आनाकानी करते हैं। जिस पर एसीएमओ ने सीएमओ को पत्र लिखकर यहां तक कहा कि डॉ. रजत का उच्चस्तरीय पैनल से मेडिकल परीक्षण कराया जाए। क्योंकि वे ड्यूटी वाले दिन बीमार रहते हैं और अगले ही दिन स्वस्थ हो जाते हैं। दरअसल मामला 22 अक्तूबर की रात हुए एक पोस्टमार्टम से जुड़ा है। यह पोस्टमार्टम डॉ. रजत को करना था, क्योंकि रोस्टर के हिसाब से उन्हीं की ड्यूटी थी। लेकिन वे न तो पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और न ही उन्होंने फोन रिसीव किया। ऐसे में एसीएमओ को रात एक बजे जाकर पोस्टमार्टम करना पड़ा। अगले दिन डॉ. रजत से जवाब मांगा गया तो उन्होंने अपनी तबियत खराब बताई। इसके बाद ही एसीएमओ ने सीएमओ से डॉ. रजत के खिलाफ कार्रवाई और मेडिकल परीक्षण कराने की संस्तुति की। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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स्वास्थ्य विभाग का झूठा शपथ पत्र
दो माह पूर्व शासन से सभी सीएमओ को निर्देश दिए गए थे कि जो भी चिकित्सक अटैचमेंट पर हैं, उन्हें मूल तैनाती स्थल पर भेजा जाए। सीएमओ शपथपत्र दें कि उनके यहां पर कोई चिकित्सक अटैचमेंट पर नहीं है। शासन को इस आशय का शपथपत्र दिया गया। लेकिन उसके बाद डॉ. रजत को नेशनल हेल्थ मिशन के तहत संचालित होने वाले नॉन कम्यूनिकेबल डिजीज (एनसीडी) प्रोग्राम का सीएमओ दफ्तर में ही प्रभारी बना दिया गया। जबकि उनकी मूल तैनाती भूड़बराल सीएचसी में है। ‘अमर उजाला’ के पास उपलब्ध रिकॉर्ड बता रहा है कि तैनाती सीएमओ दफ्तर में चल रही है। यानी शासन के निर्देशों को दरकिनार कर एक चिकित्सक पर खासी मेहरबानी दिखाई जा रही है। ऐसे हालात में बड़े सुधार की क्या उम्मीद की जा सकती है। उधर, इस प्रकरण में सीएमओ डॉ. वीपी सिंह से प्रतिक्रिया लेनी चाही तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।
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