कनिष्ठ लेखा अधिकारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा, गिरफ्तार
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मेरठ में आवास एवं विकास परिषद के कनिष्ठ लेखा अधिकारी रामपाल भास्कर को बृहस्पतिवार दोपहर एंटी करप्शन टीम ने रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। घटना के बाद आवास विकास कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई। टीम आरोपी को सीधे नौचंदी थाने ले गई। यहां एंटी करप्शन के इंस्पेक्टर ने केस दर्ज कराया।
ब्रह्मपुरी के मुमताज नगर निवासी नौशाद पुत्र महफूज ने 2012 में शास्त्रीनगर में आरटीओ कार्यालय के पास गुलफाम से एक दुकान खरीदी थी। दुकान का बैनामा भी करा लिया था। नौशाद दुकान में फोटो स्टेट का काम करता है। नौशाद ने दुकान को अपने नाम पर कराने के लिए आवास विकास कार्यालय में कागजों का ब्यौरा भी दिया। नौशाद ने नियमानुसार कागजात जमा कर नाम बदलने की बात कही, लेकिन संपत्ति विभाग के कनिष्ठ लेखा अधिकारी रामपाल भास्कर नहीं माने। उन्होंने दुकान का नाम बदलने के नाम पर 20 हजार रुपये मांगे थे। बाद में 15 हजार रुपये देने पर बात तय हुई।
बुधवार को पीड़ित नौशाद ने एंटी करप्शन के अफसरों से शिकायत की थी। बृहस्पतिवार को एंटी करप्शन के सीओ अरविंद यादव, इंस्पेक्टर जेके तोमर, उदयवीर सिंह सिरोही, केपी सिंह और विजयवीर सिंह ने पूरी तैयारी के बाद नौशाद को केमिकल लगे 15 हजार रुपये दिए। नौशाद ने जैसे ही रामपाल को रुपये दिए एंटी करप्शन टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। एसओ नौचंदी संजय तोमर ने बताया कि इंस्पेक्टर केपी सिंह ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया है। शुक्रवार को आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा जाएगा।
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एक साल बचा है रिटायरमेंट का
कनिष्ठ लेखा अधिकारी रामपाल भास्कर का 2019 में रिटायरमेंट है। नौचंदी थाने में आरोपी ने हाथ जोड़कर अधिकारियों से माफी मांगते हुए कहा कि वह निर्दोष है, नौशाद ने उसे जबरन पैसे थमा दिए। वह कुछ समझ पाता उससे पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया।
पहले भी परिषद की छवि हुई थी धूमिल
दो साल पहले भी आवास विकास परिषद के एक लिपिक फूल सिंह को एंटी करप्शन की टीम ने दस हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। दो माह पहले एंटी करप्शन टीम ने नर्सिंगहोम के पंजीकरण के नाम पर डिप्टी सीएमओ को ढाई लाख रुपये लेते गिरफ्तार किया था। बुढ़ानागेट चौकी पर तैनात महिला दरोगा को आठ माह पहले बीस हजार रुपये के साथ दबोचा गया था। पीवीवीएनएल के दो लिपिक भी रिश्वत लेते गिरफ्तार किए गये थे।
संपत्ति की जांच कराने की मांग
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने आवास विकास परिषद के आयुक्त एवं शासन को शिकायती पत्र भेजकर रामपाल भास्कर की संपत्ति की जांच कराने की मांग की है। आरोप है कि संपत्ति विभाग में तैनाती के दौरान रामपाल पर पहले भी आरोप लगते रहे हैं। उसकी 16 साल से इसी विभाग में मेरठ में तैनाती है। लग्जरी गाड़ी से आने में भी चर्चाओं में रहे हैं। प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त में भी खेल किया जाता था।
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