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सेना ने रोका रास्ता तो भड़की जनता
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Tue, 19 Apr 2016 02:23 AM IST
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मेरठ कैंट में रास्ता रोकने पर जवान से भिड़ते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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सेना ने सोमवार को भगत चौक से कैंट स्टेशन वाले रास्ते को स्कूल शुरू होने और छुट्टी के समय बंद कर दिया। किसी भी वाहन को एंट्री नहीं दी। बिना पास के अभिभावकों को भी नहीं जाने दिया। इससे लोग परेशान हो गए। तपती धूप में उनकी जवानों से नोकझोंक हो गई।
पिछले दिनों आर्मी स्कूल के सामने फायरिंग की घटना हो गई थी। सुरक्षा के लिहाज से सेना ने रास्ता बंद करने का प्लान बनाया था। मीडिया के माध्यम से लोगों तक सूचना पहुंचा दी गई थी। सोमवार को दूसरी बार सेना ने सुबह छह बजे से लेकर सात बजे तक रोड बंद कर दी।
सेना की स्कूल बस के अलावा किसी वाहन को एंट्री नहीं दी। स्कूल बंद होने के समय दोपहर एक बजे से लेकर पौने दो बजे तक फिर रास्ता रोक दिया गया। आर्मी स्कूल में पढ़ रहे बच्चों को लेने पहुंचे अभिभावकों को भी रोक दिया गया। रोहटा रोड निवासी नरेंद्र सिंह ने बच्चे का आईकार्ड दिखाया, लेकिन जवानों ने स्कूल से जारी पास मांग लिया। नरेंद्र सिंह ने पास नहीं मिलने की बात कही तो उन्हें जाने से मना कर दिया। सरिता पाठक और अरुणा देवी को भी पास न होने पर रोका गया। दर्शन एकेडमी से अपने बच्चों को लेकर जा रहे कासमपुर निवासी शम्मी भारद्वाज की जवानों से बहस हो गई। काफी बहस के बाद भारद्वाज को जाने दिया।
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अधिकारियों को भी रोका
इस दौरान वहां से गुजरे सेना के जवानों और अधिकारियों ने अपने आईकार्ड दिखाए, लेकिन क्यूआरटी ने जाने नहीं दिया। सेना के जवानों को भी वैकल्पिक रास्तों से होकर गुजरना पड़ा।
जवानों से भिड़े अभिभावक
तेज धूप में अभिभावक परेशान हो गए। ऋषभ एकेडमी से अपने दो बच्चों को लेकर गोविंदपुरी जा रहे अशोक सतीजा, एमपीएस से बच्चों को लेकर जा रहे अमित जायसवाल, जेजे सिंह और आर्मी स्कूल में बच्चे को लेेने जा रहे एके राणा, आसिफ व संजय आदि ने विरोध किया। लोगों ने सेना की इस कार्रवाई को गैर वाजिब बताया। कार्रवाई से पहले अभिभावकों को पास दिए जाने चाहिए थे।
‘पहले पास जारी होने चाहिए थे’
अभिभावक नरेंद्र सिंह, सरिता पाठक, अरुणा देवी, एके राणा आदि ने कहा कि नई व्यवस्था लागू करने से पहले सेना को पास जारी करने चाहिए थे। इसमें अभिभावकों की क्या गलती है। उन्हें तो अपने बच्चों को लाने और छोड़ने जाना ही है। इस रूट से होकर घर जाने वाले लोगों ने भी कहा सुरक्षा की दृष्टि से रास्ता बंद किया जाना तो ठीक है, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था भी करनी चाहिए।
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पिछले दिनों आर्मी स्कूल के सामने फायरिंग की घटना हो गई थी। सुरक्षा के लिहाज से सेना ने रास्ता बंद करने का प्लान बनाया था। मीडिया के माध्यम से लोगों तक सूचना पहुंचा दी गई थी। सोमवार को दूसरी बार सेना ने सुबह छह बजे से लेकर सात बजे तक रोड बंद कर दी।
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सेना की स्कूल बस के अलावा किसी वाहन को एंट्री नहीं दी। स्कूल बंद होने के समय दोपहर एक बजे से लेकर पौने दो बजे तक फिर रास्ता रोक दिया गया। आर्मी स्कूल में पढ़ रहे बच्चों को लेने पहुंचे अभिभावकों को भी रोक दिया गया। रोहटा रोड निवासी नरेंद्र सिंह ने बच्चे का आईकार्ड दिखाया, लेकिन जवानों ने स्कूल से जारी पास मांग लिया। नरेंद्र सिंह ने पास नहीं मिलने की बात कही तो उन्हें जाने से मना कर दिया। सरिता पाठक और अरुणा देवी को भी पास न होने पर रोका गया। दर्शन एकेडमी से अपने बच्चों को लेकर जा रहे कासमपुर निवासी शम्मी भारद्वाज की जवानों से बहस हो गई। काफी बहस के बाद भारद्वाज को जाने दिया।
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अधिकारियों को भी रोका
इस दौरान वहां से गुजरे सेना के जवानों और अधिकारियों ने अपने आईकार्ड दिखाए, लेकिन क्यूआरटी ने जाने नहीं दिया। सेना के जवानों को भी वैकल्पिक रास्तों से होकर गुजरना पड़ा।
जवानों से भिड़े अभिभावक
तेज धूप में अभिभावक परेशान हो गए। ऋषभ एकेडमी से अपने दो बच्चों को लेकर गोविंदपुरी जा रहे अशोक सतीजा, एमपीएस से बच्चों को लेकर जा रहे अमित जायसवाल, जेजे सिंह और आर्मी स्कूल में बच्चे को लेेने जा रहे एके राणा, आसिफ व संजय आदि ने विरोध किया। लोगों ने सेना की इस कार्रवाई को गैर वाजिब बताया। कार्रवाई से पहले अभिभावकों को पास दिए जाने चाहिए थे।
‘पहले पास जारी होने चाहिए थे’
अभिभावक नरेंद्र सिंह, सरिता पाठक, अरुणा देवी, एके राणा आदि ने कहा कि नई व्यवस्था लागू करने से पहले सेना को पास जारी करने चाहिए थे। इसमें अभिभावकों की क्या गलती है। उन्हें तो अपने बच्चों को लाने और छोड़ने जाना ही है। इस रूट से होकर घर जाने वाले लोगों ने भी कहा सुरक्षा की दृष्टि से रास्ता बंद किया जाना तो ठीक है, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था भी करनी चाहिए।