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अपराजिता: देश की इन बेटियों पर हर किसी को होगा गर्व, छात्राओं को मुफ्त में दे रहीं ट्रेनिंग

Tue, 20 Nov 2018 09:25 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर Updated Tue, 20 Nov 2018 09:25 PM IST
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Aparajita, proud of three daughters in Bijnor and they were training for girls of free
ताइक्वांडो सिखातीं छात्राएं - फोटो : अमर उजाला

बेटियां अगर फूलों की तरह कोमल होती हैं तो वक्त आने पर फौलाद की तरह मजबूती भी दिखाती हैं। बस, इन्हें मजबूती का अहसास कराने की जरूरत है। जिले की तीन बेटियां ताइक्वांडो के जरिए महिलाओं को सशक्त बना रही हैं। पुलिस की कार्यशालाओं में भी इन्हें बतौर ट्रेनर बुलाया जाता है। ये तीनों बिना किसी शुल्क के छात्राओं को ट्रेनिंग देती हैं। 

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गृहणी शालिनी, बीएससी की छात्रा दीपिका और कक्षा 11 की शिवानी सिंह बिजनौर की रहने वाली हैं। तीनों ने करीब दो साल पहले ताइक्वांडो सीखना शुरू किया था। इसी दौरान महसूस किया कि महिला सुरक्षा के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन महिलाएं व छात्राएं खुद ही अपनी सुरक्षा के लिए गंभीर नहीं हैं। विशेषकर छात्राओं को अपनी सुरक्षा के लिए गंभीर होना होगा। अगर छात्राएं ताइक्वांडो जैसी विधाओं की जानकारी रखेंगी तो उन्हें आत्मरक्षा के लिए किसी का मोहताज नहीं होना होगा। छेड़खानी करने वालों को भी खुद ही सबक सिखा सकती हैं। इसी सोच के साथ तीनों ने खुद ही स्कूल-कॉलेज में जाकर कार्यक्रम करने शुरू कर दिए।

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कॉलेज प्रबंधन के पदाधिकारियों ने भी इनके प्रस्ताव को स्वीकार किया। तीनों ने स्कूल-कॉलेजों में जाकर ताइक्वांडो की ट्रेनिंग देनी शुरू की। दो छात्राएं हैं, लेकिन शालिनी दो बच्चों की मां हैं। अपने व्यस्त जीवन के बावजूद तीनों ताइक्वांडो ट्रेनिंग दे रही हैं। धीरे-धीरे इनका प्रयास रंग ला रहा है। कई स्कूलों ने छात्राओं को ताइक्वांडो सिखाने का इनसे आग्रह किया है। प्रदर्शन के दौरान ये छात्राओं को तलवारबाजी भी करके दिखाती हैं और टाइल्स आदि भी एक ही मुक्के के वार से तोड़ती हैं। इनमें शिवानी ताइक्वांडो में ब्लेक बैल्ट हैं। अक्तूबर माह में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा मिशन साहसी का आयोजन किया गया था। छात्राओं को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए जिले भर के स्कूल-कॉलेज में कैंप लगाए गए। इन कैंप में शालिनी, दीपिका और शिवानी ने छात्राओं को प्रशिक्षित किया। तीनों ने करीब पांच हजार छात्राओं को ताइक्वांडो के जरिए आत्मरक्षा के गुर सिखाए। 

छात्राओं को अपनी सुरक्षा के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। अगर कोई छींटाकशी करता है तो उसे तुरंत सबक सिखाना चाहिए। -शालिनी, ताइक्वांडो ट्रेनर

छात्राओं के लिए छींटाकशी आम बात है। विरोध नहीं किया तो यह स्थिति और बिगड़ जाएगी। छात्राओं को आत्मरक्षा के लिए खुद को मजबूत करना चाहिए। -दीपिका, ताइक्वांडो ट्रेनर 

ताइक्वांडो को स्कूल-कॉलेज के कोर्स में शामिल किया जाना चाहिए। सभी छात्राएं ताइक्वांडो, जूड़ो-कराटे सीख लें तो छेड़खानी की घटनाएं कम हो जाएंगी। -शिवानी सिंह, ताइक्वांडो ट्रेनर

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