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एंटीबायोटिक दवाओं में धोखा
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Tue, 05 Jul 2016 02:28 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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एंटीबायोटिक दवाओं में मरीज के साथ धोखा किया जा रहा है। बड़े स्तर पर दवाओं के सैंपल फेल हो रहे हैं। छह माह में 20 दवाएं ऐसी मिली हैं जो मानक के अनुरूप नहीं हैं। तीन दवाओं के सैंपल हाल ही में फेल हुए हैं। खाद्य एवं औषधि विभाग (एफडीए) के अधिकारियों की मानें तो 200 एमजी से लेकर 625 एमजी तक की दवाएं इसमें शामिल हैं। कंपनियां जितने साल्ट की दवा बनाकर बाजार में बेच रही हैं, उनमें उस लेवल का सॉल्ट होता ही नहीं है। ऐसी स्थिति में शासन हरकत में आया है और गोपनीय अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
पिछले कुछ समय में विभाग ने सरकारी और निजी मेडिकल स्टोर से दवाओं के सैंपल लिए। अधिकांश सैंपल फेल हो गए। इनमें सबसे ज्यादा एंटीबायोटिक दवाएं शामिल हैं। इससे सरकार चिंता में है। क्योंकि किसी भी बीमारी को ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का सबसे बड़ा रोल रहता है। दवा कंपनियां 625 एमजी सॉल्ट के नाम पर मात्र 200 एमजी ही सॉल्ट दे रही हैं। कुछ कंपनियां एंटीबायोटिक दवा में दो सॉल्ट मिले होने का दवा कर रही हैं, लेकिन जांच में दूसरा सॉल्ट मिला ही नहीं है। हाल ही में तीन और दवाओं के सैंपल मिले हैं जिसमें से हिमाचल प्रदेश (सोलन) स्थित जेएम रेमेडीज कंपनी की बीमॉक टीबी 625 फेल हो गई है। हरियाणा स्थित रेवियन फार्मूलेशन प्राइवेट लिमिटेड की वीक्सिम ओजेड के साथ ग्रोमोर लेब्रोटरीज हरिद्वार से स्पेशसेस 200 का सैंपल मानक पर खरा नहीं उतरा है।
कम सॉल्ट से मरीज होगा रजिस्टेंट
चिकित्सक मरीज के वजन और बीमारी को देखकर दवा देते हैं। सही सॉल्ट मिलने पर ही मरीज ठीक होता है। मान लीजिए अगर चिकित्सक ने मरीज को 625 एमजी की दवा दी है, लेकिन दवा में सॉल्ट कम निकला तो मरीज ठीक नहीं होगा। उसकी तबियत और बिगड़ जाएगी। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. तुनराज सिरोही का कहना है कि मरीज उस दवा का आदि हो जाएगा, इस स्थिति को रजिस्टेंट कहते हैं। अगर किसी टीबी के मरीज को कम डोज की दवा दी जाए तो वह मल्टी ड्रग रजिस्टेंट (एमडीआर) का मरीज बन जाता है।
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शासन ने दिया अभियान चलाने का निर्देश
एंटीबायोटिक दवाओं के सैंपल फेल होने का सिलसिला बढ़ने के बाद शासन सख्त हो गया है। हर जिले को व्यापक स्तर पर अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। हर जिले को हर महीने 10 मेडिकल स्टोर की लिस्ट भेजी जाएगी। जहां पर निरीक्षण के साथ ही ड्रग इंस्पेक्टर सैंपल भर मुख्यालय को भेजेंगे। पहले चरण में मेरठ जैसे महानगरों से अभियान की शुरुआत हो चुकी है। इसके बाद बाकी जिलों में अभियान चलेगा।
जून में इनका हुआ निरीक्षण
स्वास्तिक मेडिकल स्टोर - कंकरखेड़ा
ईश कृपा फार्मेसी - शास्त्रीनगर
कृष्ण मेडिकल स्टोर - कंकरखेड़ा
वशिष्ठ मेडिकल कंपनी - गढ़ रोड
फराह मेडिकल स्टोर - सोहराब गेट
ओलंपिक मेडिकल - हापुड़ रोड
न्यू जनता मेडिकल - दबथुआ
सिंह मेडिकल - माधवपुरम
एनी मेडिकल - गढ़ रोड
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पिछले कुछ समय में विभाग ने सरकारी और निजी मेडिकल स्टोर से दवाओं के सैंपल लिए। अधिकांश सैंपल फेल हो गए। इनमें सबसे ज्यादा एंटीबायोटिक दवाएं शामिल हैं। इससे सरकार चिंता में है। क्योंकि किसी भी बीमारी को ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का सबसे बड़ा रोल रहता है। दवा कंपनियां 625 एमजी सॉल्ट के नाम पर मात्र 200 एमजी ही सॉल्ट दे रही हैं। कुछ कंपनियां एंटीबायोटिक दवा में दो सॉल्ट मिले होने का दवा कर रही हैं, लेकिन जांच में दूसरा सॉल्ट मिला ही नहीं है। हाल ही में तीन और दवाओं के सैंपल मिले हैं जिसमें से हिमाचल प्रदेश (सोलन) स्थित जेएम रेमेडीज कंपनी की बीमॉक टीबी 625 फेल हो गई है। हरियाणा स्थित रेवियन फार्मूलेशन प्राइवेट लिमिटेड की वीक्सिम ओजेड के साथ ग्रोमोर लेब्रोटरीज हरिद्वार से स्पेशसेस 200 का सैंपल मानक पर खरा नहीं उतरा है।
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कम सॉल्ट से मरीज होगा रजिस्टेंट
चिकित्सक मरीज के वजन और बीमारी को देखकर दवा देते हैं। सही सॉल्ट मिलने पर ही मरीज ठीक होता है। मान लीजिए अगर चिकित्सक ने मरीज को 625 एमजी की दवा दी है, लेकिन दवा में सॉल्ट कम निकला तो मरीज ठीक नहीं होगा। उसकी तबियत और बिगड़ जाएगी। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. तुनराज सिरोही का कहना है कि मरीज उस दवा का आदि हो जाएगा, इस स्थिति को रजिस्टेंट कहते हैं। अगर किसी टीबी के मरीज को कम डोज की दवा दी जाए तो वह मल्टी ड्रग रजिस्टेंट (एमडीआर) का मरीज बन जाता है।
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शासन ने दिया अभियान चलाने का निर्देश
एंटीबायोटिक दवाओं के सैंपल फेल होने का सिलसिला बढ़ने के बाद शासन सख्त हो गया है। हर जिले को व्यापक स्तर पर अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। हर जिले को हर महीने 10 मेडिकल स्टोर की लिस्ट भेजी जाएगी। जहां पर निरीक्षण के साथ ही ड्रग इंस्पेक्टर सैंपल भर मुख्यालय को भेजेंगे। पहले चरण में मेरठ जैसे महानगरों से अभियान की शुरुआत हो चुकी है। इसके बाद बाकी जिलों में अभियान चलेगा।
जून में इनका हुआ निरीक्षण
स्वास्तिक मेडिकल स्टोर - कंकरखेड़ा
ईश कृपा फार्मेसी - शास्त्रीनगर
कृष्ण मेडिकल स्टोर - कंकरखेड़ा
वशिष्ठ मेडिकल कंपनी - गढ़ रोड
फराह मेडिकल स्टोर - सोहराब गेट
ओलंपिक मेडिकल - हापुड़ रोड
न्यू जनता मेडिकल - दबथुआ
सिंह मेडिकल - माधवपुरम
एनी मेडिकल - गढ़ रोड