खास रिपोर्ट: स्वास्थ्य विभाग के हवा-हवाई दावों की खुली पोल, खूब हो रही जांच, मरीजों का नहीं हिसाब
- सैंपल लेते समय स्वास्थ्य विभाग नहीं ले रहा कोई पहचान पत्र
- जिला अस्पताल रिपोर्ट लेने पहुंचा व्यक्ति निकला पॉजिटिव, चकमा देकर फरार
- मरीजों के इलाज और जांच को लेकर स्वास्थ्य विभाग बिल्कुल भी गंभीर नहीं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में बढ़ते कोरोना संक्रमण को रोकने, मरीजों के इलाज और जांच को लेकर स्वास्थ्य विभाग बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। विभाग हवा-हवाई दावों के साथ अपनी पीठ थपथपाने में लगा है। विभागीय अफसरों की लापरवाही का आलम यह है कि उनके पास मरीजों के नाम पते की कोई पुख्ता जानकारी तक नहीं है। वजह सैंपल लेते समय किसी भी व्यक्ति से कोई पहचान पत्र नहीं लिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग जांच कराने वालों का नाम, पता और मोबाइल नंबर लेकर जिम्मेदारी की इतिश्री कर रहा है।
जिला अस्पताल में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जब कोरोना पॉजिटिव मरीजों का नाम पता सही नहीं निकला। जांच के बाद एंबुलेंस और स्वास्थ्य विभाग टीम संक्रमित की तलाश में भटकती रही। शुक्रवार को ऐसा ही एक मामला सामने आया। एक व्यक्ति कोरोना की जांच की रिपोर्ट लेने जिला अस्पताल पहुंचा। कंप्यूटर ऑपरेटर ने उसकी स्लिप के आधार पर रिपोर्ट का प्रिंट निकाला तो वह पॉजिटिव मिला। ऑपरेटर ने उससे कहा कि तुम यहां क्यों घूम रहे हो, तुमको लेने के लिए एंबुलेंस घर गई होगी। इस पर मरीज कंप्यूटर ऑपरेटर को चकमा देकर फरार हो गया। इसके बाद जिला अस्पताल प्रशासन में खलबली मच गई। मामले को दबाने की कोशिश करते हुए अस्पताल प्रशासन ने कंप्यूटर ऑपरेटर को गोपनीय ढंग से क्वारंटीन कर दिया।
सैंपल के साथ ली जाएगी आईडी
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीके बंसल ने बताया कि एक व्यक्ति जिला अस्पताल में कोरोना रिपोर्ट लेने आया था। रिपोर्ट पॉजिटिव थी। उसने बताया कि खैरनगर के जिस व्यक्ति की रिपोर्ट है, वह उसका भतीजा है। मामले की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दे दी गई है। रिपोर्ट देने वाले ऑपरेटर को क्वारंटीन कर दिया गया है। निर्देश दिए गए हैं कि अब सैंपल देने वाले हर व्यक्ति से आईडी ली जाएगी।
यह भी पढ़ें: घर से एक साथ उठीं तीन अर्थियां, गांव में पसरा मातम, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, देखें तस्वीरें
सीएमओ के पास आती है पॉजिटिव की रिपोर्ट
कोरोना जांच के सैंपल जिला अस्पताल में लिए जा रहे हैं। इसके बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब भेजा जाता है। सैंपल की निगेटिव रिपोर्ट जिला अस्पताल भेज दी जाती है, जबकि पॉजिटिव आने वाले सैंपल की सूची बनाकर सीएमओ को भेजी जाती है। सीएमओ जिला सर्विलांस अधिकारी के माध्यम से पॉजिटिव मरीजों के घर एंबुलेंस भेजकर उन्हें मेडिकल कॉलेज, सुभारती, मुलायम सिंह यादव मेडिकल कॉलेज या अन्य कोविड सेंटरों में भर्ती कराते हैं।
पॉजिटिव मरीज का पता नहीं चला
बृहस्पतिवार को कोरोना संक्रमित एक मरीज को स्वास्थ्य विभाग की टीम टेस्ट रिपोर्ट में दर्ज नाम-पते के आधार पर लेने गई। लेकिन नाम और पता गलत मिला। स्वास्थ्य विभाग की टीम कई घंटे तक भटकती रही। उसके बाद पता चला कि कोई नाम बदल कर टेस्ट करवा चुका है। मामले को स्वास्थ्य विभाग दबा कर बैठ गया।
कम्प्यूटर ऑपरेटर की नींद उड़ी
रिपोर्ट लेने आए व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद से कंप्यूटर ऑपरेटर की नींद उड़ी हुई है। ऑपरेटर के पास शुक्रवार को दो अलग- अलग व्यक्ति अपनी रिपोर्ट लेने पहुंच गए। कंप्यूटर ऑपरेटर ने उनकी रिपोर्ट निकाली तो वह पॉजिटिव थी। दोनों व्यक्ति उसे चकमा देकर गायब हो गए। मामले की जानकारी ऑपरेटर ने एसआईसी डॉ. पीके बंसल को दी। उन्होंने आनन फानन कंप्यूटर ऑपरेटर को क्वारंटीन करा दिया।
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/