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कोरोना का बड़ा असर: दूसरी लहर में 17 हजार बच्चों का सुरक्षा चक्र टूटा, पढ़िए खास रिपोर्ट
Mon, 31 May 2021 06:37 PM IST
कपिल kapil
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: कपिल kapil
Updated Mon, 31 May 2021 06:37 PM IST
सार
कोरोना महामारी का मेरठ जिले में बड़ा असर देखने को मिला है। कोरोना के चलते शहर में 17,333 शिशुओं को रुटीन का टीका नहीं लग सका। पढ़िए अमर उजाला की खास रिपोर्ट।
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टीका।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
वैश्वकि महामारी कोरोना के कारण विभिन्न बीमारियों से बचाव के लिए शिशुओं का टीकाकरण प्रभावित हुआ है। मेरठ जिले में पिछले करीब दो माह में 17,333 शिशुओं को रुटीन का टीका नहीं लग सका। इसके अलावा करीब 19 हजार गर्भवती महिलाओं का भी टीकाकरण नहीं हो सका।
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नियमित टीकाकरण के लिए आशा, एएनएम की बड़ी भूमिका मानी जाती है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन दिनों आशा और एएनएम की ड्यूटी कोरोना से संबंधित कामों में लगा दी गई है। इस वजह वे टीकाकरण के काम में समय नहीं दे पा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग का बाकी स्टाफ भी वैक्सीनेशन में लगा हुआ है।
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बच्चों के जन्म से लेकर एक वर्ष के भीतर कुल सात बार टीके लगाए जाते हैं। जिले में कभी टीकाकरण पूरी तरह बंद तो नहीं हुआ लेकिन रफ्तार कम जरूर हुई है। बुधवार और शनिवार को स्वास्थ्य केंद्रों पर टीके तो लगे लेकिन अभियान नहीं चल सका, जिस कारण बड़ी संख्या में टीकाकरण नहीं हो सका।
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एक से दो साल की अवधि महत्वपूर्ण
नवजात बच्चों में टीकाकरण से प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती हैं। गंभीर बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। टीके संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर देते हैं। 12 से 24 महीने तक बच्चों को दो महीने, चार महीने, नौ महीने और 12 व 24 महीने के अंतराल पर वैक्सीन लगाई जाती हैं।
मार्च में चला था मिशन इंद्रधनुष
इन दिनों कोरोना वैक्सीनेशन प्राथमिकता में है। मार्च में मिशन इंद्रधनुष भी चलाया गया था, जिसमें बच्चों और गर्भवतियों को टीके लगे थे। - डॉ. प्रवीण गौतम, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
टीके हैं जीवनरक्षक
टीका बीमारी से बचाव
बीसीजी तपेदिक या टीबी
पेंटा काली खांसी, डिप्थीरिया, टिटनेस
चिकिनपॉक्स चिकिनपॉक्स
इन्फ्लूएंजा सर्दी, खांसी और जुकाम
एमएमआर खसरा, गलसुआ और रूबैला
रोटावायरस संक्रमण
नियोमोकोकल निमोनिया
पोलियो अपंगता से बचाव
हीमोफिलस बी हेपेटाइटिस