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दूध में ‘जहर’, डिटर्जेंट और फॉर्मलीन की मिलावट
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Tue, 08 Dec 2015 01:52 AM IST
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आपके घर में जो दूध आ रहा है कहीं उसमें डिटर्जेंट और फॉर्मलीन तो नहीं है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। जिस दूध को सेहत बनाने वाला समझकर पी रहे हैं, हो सकता है वह सेहत बिगाड़ रहा हो। दूध में मिलावट की पोल सोमवार को अमर उजाला द्वारा लगाए गए जांच शिविर में खुली।
100 से अधिक लोगों ने अपने घरों से खाद्य पदार्थ लाकर चेक कराए। अधिकांश में मिलावट मिली। सबसे ज्यादा सैंपल दूध के फेल हुए। अमर उजाला की ओर से शास्त्रीनगर में आरटीओ रोड पर अग्रवाल एसोसिएट पर सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक शिविर लगाया। शुभारंभ मुख्य अतिथि भाजपा विधायक रविंद्र भड़ाना ने किया। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के टॉक्सीकोलॉजी विभाग और एफडीए के अधिकारियों का सहयोग रहा।
ऑन द स्पॉट खाद्य पदार्थों की जांच की गई। दूध के 70 सैंपल आए। इनमें 50 फेल हो गए। डिटर्जेंट और फॉर्मलीन की मिलावट मिली। सैंपल शास्त्रीनगर, गढ़ रोड, परीक्षितगढ़, गंगानगर, लखीपुरा आदि जगहों से आए। कुछ के सैंपल पास भी हुए। मसालों के 30 सैंपल आए। मसालों में हल्दी, धनिया और जीरा तो ठीक निकले, लेकिन लाल मिर्च पाउडर में मिलावट पाई। इसमें लाल रंग का इस्तेमाल किया गया था।
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महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी सैंपल लेकर आए। गढ़ रोड स्थित कई होटल के संचालक अपने यहां की खाद्य सामग्री लेकर आए। उन्होंने ऑन द स्पॉट जांच कराई। मसाले जांच में खरे उतरे। पनीर और दाल के सैंपल सही निकले। पांच सैंपल मावे के भी आए। वह सही निकले। छह सैंपल घी के आए। इनमें चार सैंपल में अरंडी के तेल की मिलावट मिली।
ये मिले हानिकारक पदार्थ
दूध में डिटर्जेंट और फॉर्मलीन की मिलावट
मिर्च पाउडर में लाल रंग की मिलावट
वनस्पति तेल में अरंडी के तेल की मिलावट
क्या है नुकसान
दूध में ग्रेेविटी बढ़ाने के लिए रिफाइंड के साथ डिटर्जेंट मिलाया जाता है। दूध को खराब होने से बचाने के लिए फॉर्मलीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि फॉर्मलीन डेड बॉडी सुरक्षित रखने में इस्तेमाल होती है। डिटर्जेंट और फॉर्मलीन का किडनी और लीवर पर असर पड़ता है। दोनों अंगों को यह नुकसान पहुंचाती हैं।
मिर्च में जो रंग मिलाया जा रहा है वह सिंथेटिक रसायनों से बनता है। इन रसायनों में भारी धातु होती है। जिनसे कैंसर तक हो सकता है। घी में मिलाया जा रहा अरंडी के तेल का असर लीवर और किडनी पर पड़ता है।
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100 से अधिक लोगों ने अपने घरों से खाद्य पदार्थ लाकर चेक कराए। अधिकांश में मिलावट मिली। सबसे ज्यादा सैंपल दूध के फेल हुए। अमर उजाला की ओर से शास्त्रीनगर में आरटीओ रोड पर अग्रवाल एसोसिएट पर सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक शिविर लगाया। शुभारंभ मुख्य अतिथि भाजपा विधायक रविंद्र भड़ाना ने किया। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के टॉक्सीकोलॉजी विभाग और एफडीए के अधिकारियों का सहयोग रहा।
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ऑन द स्पॉट खाद्य पदार्थों की जांच की गई। दूध के 70 सैंपल आए। इनमें 50 फेल हो गए। डिटर्जेंट और फॉर्मलीन की मिलावट मिली। सैंपल शास्त्रीनगर, गढ़ रोड, परीक्षितगढ़, गंगानगर, लखीपुरा आदि जगहों से आए। कुछ के सैंपल पास भी हुए। मसालों के 30 सैंपल आए। मसालों में हल्दी, धनिया और जीरा तो ठीक निकले, लेकिन लाल मिर्च पाउडर में मिलावट पाई। इसमें लाल रंग का इस्तेमाल किया गया था।
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महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी सैंपल लेकर आए। गढ़ रोड स्थित कई होटल के संचालक अपने यहां की खाद्य सामग्री लेकर आए। उन्होंने ऑन द स्पॉट जांच कराई। मसाले जांच में खरे उतरे। पनीर और दाल के सैंपल सही निकले। पांच सैंपल मावे के भी आए। वह सही निकले। छह सैंपल घी के आए। इनमें चार सैंपल में अरंडी के तेल की मिलावट मिली।
ये मिले हानिकारक पदार्थ
दूध में डिटर्जेंट और फॉर्मलीन की मिलावट
मिर्च पाउडर में लाल रंग की मिलावट
वनस्पति तेल में अरंडी के तेल की मिलावट
क्या है नुकसान
दूध में ग्रेेविटी बढ़ाने के लिए रिफाइंड के साथ डिटर्जेंट मिलाया जाता है। दूध को खराब होने से बचाने के लिए फॉर्मलीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि फॉर्मलीन डेड बॉडी सुरक्षित रखने में इस्तेमाल होती है। डिटर्जेंट और फॉर्मलीन का किडनी और लीवर पर असर पड़ता है। दोनों अंगों को यह नुकसान पहुंचाती हैं।
मिर्च में जो रंग मिलाया जा रहा है वह सिंथेटिक रसायनों से बनता है। इन रसायनों में भारी धातु होती है। जिनसे कैंसर तक हो सकता है। घी में मिलाया जा रहा अरंडी के तेल का असर लीवर और किडनी पर पड़ता है।