आश्वासन पर शुरू हुआ गंगाजल शोधन प्लांट,जल्द खत्म होगी पानी की समस्या
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भोले की झाल पर 341 करोड़ की लागत से बने गंगाजल शोधन प्लांट ने जल निगम के आश्वासन पर सोमवार काम करना शुरू कर दिया। निजी कंपनी ने यह प्लांट एक माह पहले बंद कर दिया था। जिससे गर्मी के मौसम में शहर के करीब आठ लाख लोगों के सामने पानी का संकट गहरा गया था। ‘अमर उजाला’ ने जनहित से जुड़े इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके बाद हरकत में आए जल निगम और नगर निगम ने प्रतिभा कंपनी को आश्वासन देकर प्लांट से 43 क्यूसेक पानी छुड़वा दिया। महापौर और नगरायुक्त का कहना है कि प्लांट के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी।
15 लाख की थी दिक्कत
जल निगम और नगर निगम के पास टेक्निकल टीम न होने पर प्लांट को चलाने की जिम्मेदारी प्रतिभा कंपनी के पास है। इस अत्याधुनिक प्लांट को चलाने के लिए बिजली और कर्मचारियों के वेतन आदि पर हर माह करीब 15 लाख रुपये का खर्चा आता है। जल निगम द्वारा इसकी व्यवस्था न करने पर कंपनी ने एक माह पूर्व यह प्लांट बंद कर दिया था।
40 प्रतिशत हिस्से में आपूर्ति
भोला की झाल से शहर तक बिछी लाइन से सर्किट हाउस, घंटाघर टाउन हॉल, शर्मा स्मारक और विकासपुरी जलाशय तक गंगाजल पहुंचता है। जहां से यह गंगाजल इन जलाशयों से जुड़े 51 से ज्यादा बड़ी कॉलोनियों और मोहल्लों में जलापूर्ति करता है। जो शहर का 40 प्रतिशत हिस्सा है। सोमवार से इन इलाकों में गंगाजल पहुंचना शुरू हो गया।
हमें मिला, हमने दिया
अधिशासी अभियंता भारतभूषण ने कहा कि जल निगम हमने प्रतिभा कंपनी को आश्वासन देकर प्लांट चालू करा दिया है। नगर निगम से हमें सहयोग का पूर्ण आश्वासन मिला है।
हम देंगे बजट
नगरायुक्त डीके कुशवाहा ने बताया कि हमने जल निगम को बजट देने का आश्वासन दिया है। अगर शासन से धन नहीं मिलता है तो निगम अपनी मद से धन देगा।
जलापूर्ति प्राथमिकता पर
महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने कहा कि जनता को जलापूर्ति प्राथमिकता पर है। अगर शासन से समय पर धन नहीं मिलता है तो निगम के खजाने से प्लांट संचालन की धनराशि दिलाने का काम करेंगे।