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प्राणघात होती है सीओपीडी : डॉ. वीरोत्तम तोमर
Meerut
Updated Wed, 19 Nov 2014 05:30 AM IST
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मेरठ। दमा का इलाज ठीक से न किया जाए तो मरीजों में सीओपीडी (क्रोनिक ऑबस्ट्रेक्टिव पल्मोनरी डिजीज) होने की संभावना बढ़ जाती है, जो प्राण घात साबित होती है। एक लिमिट के बाद सीओपीडी का इलाज किया जाना भी संभव नहीं होता है। हालांकि मेडिकल साइंस ने बीतेे कुछ वर्षों में काफी प्रोग्रेस की है। आज बाजार में ऐसे इन्हेलर मौजूद हैं, जिनके नियमित इस्तेमाल से सीओपीडी को कंट्रोल किया जा सकता है। विश्व सीओपीडी दिवस के अवसर पर मंगलवार को होटल क्रस्टिल पैलेस में आयोजित एक कार्यक्र म के दौरान वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर ने यह बात कही।
डॉ. तोमर ने कहा कि मेरठ और उसके आसपास के क्षेत्रों में सीओपीडी के मरीजों की संख्या में 20 से 30 फीसदी की वृद्धि हुई है। प्रदूषण और धूम्रपान लोगों को दमा रोगी बना रहा। कुछ लोग दमे को एक सामान्य बीमारी समझ कर इलाज नहीं कराते है और अगर कराते हैं तो कुछ समय दवाई लेने के बाद बंद कर देते हैं। ऐसे में यह बीमारी खतरनाक साबित हो सकती है। अगर दमे का सही तरीके से ट्रीटमेंट कराया जाए तो इसकी रोकथाम की जा सकती है। दमे की विकराल रूप सीओपीडी है, लेकिन दोनों के ट्रीटमेंट में अलग-अगल दवाओं की जरूरत होती है। सीओपीडी की जांच के लिए सीटी स्कैन से लेकर पीएफटी करनी पड़ती है।
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डॉ. तोमर ने कहा कि मेरठ और उसके आसपास के क्षेत्रों में सीओपीडी के मरीजों की संख्या में 20 से 30 फीसदी की वृद्धि हुई है। प्रदूषण और धूम्रपान लोगों को दमा रोगी बना रहा। कुछ लोग दमे को एक सामान्य बीमारी समझ कर इलाज नहीं कराते है और अगर कराते हैं तो कुछ समय दवाई लेने के बाद बंद कर देते हैं। ऐसे में यह बीमारी खतरनाक साबित हो सकती है। अगर दमे का सही तरीके से ट्रीटमेंट कराया जाए तो इसकी रोकथाम की जा सकती है। दमे की विकराल रूप सीओपीडी है, लेकिन दोनों के ट्रीटमेंट में अलग-अगल दवाओं की जरूरत होती है। सीओपीडी की जांच के लिए सीटी स्कैन से लेकर पीएफटी करनी पड़ती है।
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