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1000 करोड़ की जमीन पर कब्जा लेगा एमडीए
Meerut
Updated Sun, 28 Apr 2013 05:30 AM IST
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मेरठ। मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) को 1000 करोड़ रुपये की जमीन पर कब्जा मिलने का रास्ता साफ हो गया है। महीनों की मशक्कत के बाद शताब्दी नगर योजना पर कायम स्टे को वैकेट करा लिया गया है। स्पोर्ट्स गुड्स कॉम्पलेक्स ध्यानचंद नगर योजना में भी किसानों के साथ कायम विवाद में प्राधिकरण को ही राहत मिली है। गंगानगर विस्तार योजना में 700 करोड़ की जमीन पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही प्राधिकरण के पक्ष में फैसला सुना चुका है। एमडीए अब फोर्स की मदद से इन जमीनों पर कब्जे की तैयारी में है।
एमडीए ने वर्ष 1986-87 में शताब्दी नगर के रूप में अंतिम अधिग्रहण किया था। किसानों को भारी भरकम मुआवजा देने के बावजूद आज भी आवंटियों की जमीन पर फसल लहलहा रही है। मुआवजा विवाद को सुलझाने के लिए एमडीए 218 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रतिकर भी बांटा, पर मामला उलझा ही रहा। रिठानी गांव के 50 किसानों ने मुआवजा विवाद को लेकर हाईकोर्ट में वाद दायर किया था। इस पर हाईकोर्ट ने स्टे जारी कर दिया था। तत्कालीन उपाध्यक्ष तनवीर जफर अली ने इस स्टे को वैकेट कराने के लिए भरसक प्रयास किए थे। करीब छह माह बाद प्राधिकरण को स्टे वैकेट कराने में सफलता मिल गई है। जबकिगंगा नगर विस्तार योजना में 700 करोड़ की जमीन पर सुप्रीम कोर्ट प्राधिकरण के पक्ष में फैसला सुना चुका है। गंगानगर, शताब्दी नगर और ध्यानचंद नगर योजना में 1000 करोड़ रुपये से अधिक की जमीन पर जल्द ही फोर्स की सहायता से कब्जा लिया जाएगा।
इनसेट
महीनों बाद हो सकेगा विकास
मेरठ। शताब्दी नगर में महीनों बाद जल्द ही नए सिरे से विकास कार्य शुरू हो सकेंगे। कुल 11 सेक्टरों में विभाजित शताब्दी नगर के सेक्टर 5,8,9,10,11 में किसानों के विरोध के चलते आंतरिक विकास कार्य महीनों से ठप पड़े हैं। बाहरी हिस्से में डाली गई ट्रंक सीवर लाइन को आंतरिक हिस्सों से नहीं जोड़ा जा सका है। पार्क, सड़क समेत अंदरूनी भाग में किए जाने वाले अन्य कार्य भी अधर में हैं।
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योजना का नाम कुल विकसित भूमि एकड़ में
स्पोर्ट्स गुड्स आवासीय
योजना 78.12
शताब्दी नगर आवासीय 1620
क्या है कहना :
: शताब्दी नगर योजना में हाईकोर्ट का स्टे वैकेट कराने मेें सफलता मिल गई है। ध्यानचंद नगर योजना में भी आवंटियों को भूमि पर कब्जा मिल सकेगा। हाईकोर्ट ने किसानों के पक्ष को सही नहीं माना है। किसानों को अब सिविल कोर्ट में अपनी बात रखनी होगी। प्राधिकरण पुलिस फोर्स की सहायता से जल्द ही इन योजनाओं की जमीन पर कब्जा लेकर विकास कार्य शुरू कराएगा- बैजनाथ, संयुक्त सचिव, एमडीए
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एमडीए ने वर्ष 1986-87 में शताब्दी नगर के रूप में अंतिम अधिग्रहण किया था। किसानों को भारी भरकम मुआवजा देने के बावजूद आज भी आवंटियों की जमीन पर फसल लहलहा रही है। मुआवजा विवाद को सुलझाने के लिए एमडीए 218 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रतिकर भी बांटा, पर मामला उलझा ही रहा। रिठानी गांव के 50 किसानों ने मुआवजा विवाद को लेकर हाईकोर्ट में वाद दायर किया था। इस पर हाईकोर्ट ने स्टे जारी कर दिया था। तत्कालीन उपाध्यक्ष तनवीर जफर अली ने इस स्टे को वैकेट कराने के लिए भरसक प्रयास किए थे। करीब छह माह बाद प्राधिकरण को स्टे वैकेट कराने में सफलता मिल गई है। जबकिगंगा नगर विस्तार योजना में 700 करोड़ की जमीन पर सुप्रीम कोर्ट प्राधिकरण के पक्ष में फैसला सुना चुका है। गंगानगर, शताब्दी नगर और ध्यानचंद नगर योजना में 1000 करोड़ रुपये से अधिक की जमीन पर जल्द ही फोर्स की सहायता से कब्जा लिया जाएगा।
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इनसेट
महीनों बाद हो सकेगा विकास
मेरठ। शताब्दी नगर में महीनों बाद जल्द ही नए सिरे से विकास कार्य शुरू हो सकेंगे। कुल 11 सेक्टरों में विभाजित शताब्दी नगर के सेक्टर 5,8,9,10,11 में किसानों के विरोध के चलते आंतरिक विकास कार्य महीनों से ठप पड़े हैं। बाहरी हिस्से में डाली गई ट्रंक सीवर लाइन को आंतरिक हिस्सों से नहीं जोड़ा जा सका है। पार्क, सड़क समेत अंदरूनी भाग में किए जाने वाले अन्य कार्य भी अधर में हैं।
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योजना का नाम कुल विकसित भूमि एकड़ में
स्पोर्ट्स गुड्स आवासीय
योजना 78.12
शताब्दी नगर आवासीय 1620
क्या है कहना :
: शताब्दी नगर योजना में हाईकोर्ट का स्टे वैकेट कराने मेें सफलता मिल गई है। ध्यानचंद नगर योजना में भी आवंटियों को भूमि पर कब्जा मिल सकेगा। हाईकोर्ट ने किसानों के पक्ष को सही नहीं माना है। किसानों को अब सिविल कोर्ट में अपनी बात रखनी होगी। प्राधिकरण पुलिस फोर्स की सहायता से जल्द ही इन योजनाओं की जमीन पर कब्जा लेकर विकास कार्य शुरू कराएगा- बैजनाथ, संयुक्त सचिव, एमडीए