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सिर्फ सात आदमी जुटे बाबा साहब की जयंती में
Updated Sun, 15 Apr 2018 02:36 AM IST
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कंकरखेड़ा (मेरठ) । डॉ. अंबेडकर जयंती पर जहां पल्हैड़ा में इस बार शोभायात्रा नहीं निकली, वहीं चर्चाओं में रहे शोभापुर गांव के पार्क में बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के लिए करीब सात लोग ही जुट पाए।
एससीएसटी एक्ट में बदलाव को लेकर कंकरखेड़ा इलाके में दो अप्रैल को हुए उपद्रव के बाद शोभापुर गांव में दलित युवक गोपी पुत्र ताराचंद की गोलियों बरसाकर हत्या कर दी गई थी। जिसमें गांव के ही मनोज गुर्जर व उसके साथी नामजद हुए थे। तभी से गांव में तनाव के बीच आरएएफ और पीएसी डेरा डाले हुए है। बताया जाता है कि उपद्रव और गोपी हत्याकांड के विरोध में ग्रामीणों ने इस बार डॉ. आंबेडकर जयंती न मनाने का निर्णय लिया था। यह भी चर्चा रही कि गांव के दूसरे पक्ष के लोग 14 अप्रैल को तरह-तरह के आयोजनों की बात कर रहे थे। इसे लेकर भी दलित इस बात को लेकर डरे थे कि अगर कोई बवाल हुआ तो फिर से गांव में गिरफ्तारियों का दौर जारी हो जाएगा।
शनिवार को दिन निकलते ही एडीएम सिटी मुकेश चंद, सीओ दौराला पंकज कुमार सिंह व एसडीएम सदर अमिताभ फोर्स के साथ गांव में पहुंच गए। फोर्स को देखते ही सभी ग्रामीण घरों में घुस गए। अधिकारियों के काफी अपील करने पर गोपी के पिता ताराचंद सहित करीब सात लोग गांव के पार्क में लगी डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर पहुंचे। माल्यार्पण करके बहुत ही जल्द अपने-अपने घरों को लौट गए। इस दौरान किसी ने न तो कोई नारेबाजी की और न ही किसी ने कोई विचार रखे।
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खुश तो कोई भी नहीं
इस दौरान दलित समाज के लोगों में जहां रोष व खौफ देखने को मिला तो दूसरे पक्ष के लोग भी जयंती के दिन गांव में पसरे सन्नाटे को देखकर खुश नजर नहीं आए। कई ग्रामीणों ने कहा कि हर बार जयंती के दिन गांव के लोग आपस में मिलजुल कर जयंती मनाते थे। बड़े कार्यक्रम होते थे और झांकी व शोभायात्रा भी निकलती थी। लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। न जाने गांव को किसकी नजर लग गई।
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एससीएसटी एक्ट में बदलाव को लेकर कंकरखेड़ा इलाके में दो अप्रैल को हुए उपद्रव के बाद शोभापुर गांव में दलित युवक गोपी पुत्र ताराचंद की गोलियों बरसाकर हत्या कर दी गई थी। जिसमें गांव के ही मनोज गुर्जर व उसके साथी नामजद हुए थे। तभी से गांव में तनाव के बीच आरएएफ और पीएसी डेरा डाले हुए है। बताया जाता है कि उपद्रव और गोपी हत्याकांड के विरोध में ग्रामीणों ने इस बार डॉ. आंबेडकर जयंती न मनाने का निर्णय लिया था। यह भी चर्चा रही कि गांव के दूसरे पक्ष के लोग 14 अप्रैल को तरह-तरह के आयोजनों की बात कर रहे थे। इसे लेकर भी दलित इस बात को लेकर डरे थे कि अगर कोई बवाल हुआ तो फिर से गांव में गिरफ्तारियों का दौर जारी हो जाएगा।
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शनिवार को दिन निकलते ही एडीएम सिटी मुकेश चंद, सीओ दौराला पंकज कुमार सिंह व एसडीएम सदर अमिताभ फोर्स के साथ गांव में पहुंच गए। फोर्स को देखते ही सभी ग्रामीण घरों में घुस गए। अधिकारियों के काफी अपील करने पर गोपी के पिता ताराचंद सहित करीब सात लोग गांव के पार्क में लगी डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर पहुंचे। माल्यार्पण करके बहुत ही जल्द अपने-अपने घरों को लौट गए। इस दौरान किसी ने न तो कोई नारेबाजी की और न ही किसी ने कोई विचार रखे।
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खुश तो कोई भी नहीं
इस दौरान दलित समाज के लोगों में जहां रोष व खौफ देखने को मिला तो दूसरे पक्ष के लोग भी जयंती के दिन गांव में पसरे सन्नाटे को देखकर खुश नजर नहीं आए। कई ग्रामीणों ने कहा कि हर बार जयंती के दिन गांव के लोग आपस में मिलजुल कर जयंती मनाते थे। बड़े कार्यक्रम होते थे और झांकी व शोभायात्रा भी निकलती थी। लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। न जाने गांव को किसकी नजर लग गई।