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अर्जन को आधार बनाकर उत्पीड़न बंद करे प्राधिकरण
Updated Mon, 30 Apr 2018 02:52 AM IST
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मेरठ। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने दांतल और नंगलाताशी मामले को लेकर एमडीए पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर कब्जे का कभी भी समर्थन नहीं किया जा सकता और कब्जा खाली कराया ही जाना चाहिए। लेकिन अर्जन की खामियां तत्कालीन अधिकारियों की जानबूझकर लापरवाही के कारण हुई हैं, तो जनता का उत्पीड़न क्यों किया जा रहा है।
डॉ. वाजपेयी ने कहा कि कंकरखेड़ा क्षेत्र के दांतल और नंगलाताशी गांव की भूमि पर लंबे समय से लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई या कर्ज लेकर भूमि खरीदकर मकान बनाए हैं। इस पर गृहकर तो बिजली के कनेक्शन भी हैं। जिस दिन जमीन खरीदी गयी थी, उस दिन उस व्यक्ति ने रजिस्ट्री आफिस से बाहरसाला निकाला तथा खसरा और खतौनी को देखकर मालिक से रजिस्ट्री करायी। जिस दिन रजिस्ट्री हुई उस दिन तक किसी रिकॉर्ड में प्राधिकरण का नाम अंकित नहीं था। तब जनता की क्या गलती है।
डॉ. वाजपेयी ने कहा कि प्राधिकरण अर्जन के बाद औसतन एक दशक बाद कागजों पर अपना कब्जा दिखाता है। उसके भी वर्षों बाद अपना नाम कागजों में अंकित कराता है। यही नहीं एडीएम एलए कार्यालय भी खेल करता है। मुआवजा राशि 20 साल बाद कोर्ट में जमा कराता है। अर्जन न तो उस मालिक को दे रहे हैं जो अर्जन के वक्त था और न ही उस मालिक को दे रहे हैं जो अब मालिक है। इसलिए प्राधिकरण की लापरवाही का नुकसान जनता को नहीं भुगतना चाहिए।
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डॉ. वाजपेयी ने कहा कि कंकरखेड़ा क्षेत्र के दांतल और नंगलाताशी गांव की भूमि पर लंबे समय से लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई या कर्ज लेकर भूमि खरीदकर मकान बनाए हैं। इस पर गृहकर तो बिजली के कनेक्शन भी हैं। जिस दिन जमीन खरीदी गयी थी, उस दिन उस व्यक्ति ने रजिस्ट्री आफिस से बाहरसाला निकाला तथा खसरा और खतौनी को देखकर मालिक से रजिस्ट्री करायी। जिस दिन रजिस्ट्री हुई उस दिन तक किसी रिकॉर्ड में प्राधिकरण का नाम अंकित नहीं था। तब जनता की क्या गलती है।
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डॉ. वाजपेयी ने कहा कि प्राधिकरण अर्जन के बाद औसतन एक दशक बाद कागजों पर अपना कब्जा दिखाता है। उसके भी वर्षों बाद अपना नाम कागजों में अंकित कराता है। यही नहीं एडीएम एलए कार्यालय भी खेल करता है। मुआवजा राशि 20 साल बाद कोर्ट में जमा कराता है। अर्जन न तो उस मालिक को दे रहे हैं जो अर्जन के वक्त था और न ही उस मालिक को दे रहे हैं जो अब मालिक है। इसलिए प्राधिकरण की लापरवाही का नुकसान जनता को नहीं भुगतना चाहिए।
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