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संस्कृत के बिना संस्कृति नहीं, विश्व में बढ़ाई प्रतिष्ठा
Updated Sat, 05 Aug 2017 02:52 AM IST
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- बिल्लेश्वर संस्कृत महाविद्यालय में संस्कृत सप्ताह समारोह का आयोजन
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मेरठ। बिल्लेश्वर संस्कृत महाविद्यालय में शुक्रवार को संस्कृत सप्ताह का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य कहा कि यह कंप्यूटर की भाषा हो गई है। विदेशों में इस पर बड़े-बड़े शोध हो रहे हैं। रोजगार के साधन बढ़ रहे हैं। इसका व्याकरण सरल और शुद्ध है। संस्कृत के बिना संस्कृति नहीं बच सकती।
प्राचार्य डॉ. चिंतामणि जोशी ने कहा कि चारों वेद, उपनिषद और धार्मिक ग्रंथ संस्कृत भाषा में लिखे हैं। देश का ज्ञान, शोध, सभ्यता और संस्कृति सब इसमें है। यह भाषा विश्व की अमूल्य निधि है। इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि दूसरे देशों ने संस्कृत को महत्व देना शुरू कर दिया है। विदेश के कई बड़े संस्थानों में संस्कृत पढ़ाई जा रही है। यह साइंस के करीब है। संस्कृत की धरोहर की रक्षा और प्रसार के लिए इसे जन-जन की भाषा बनाने की आवश्यकता है। छात्र कौशल कुमार मिश्र, घनश्याम न्योपाने, कृष्णा, हर्षित, राजेंद्र ने संस्कृत श्लोक पढ़े और गीत प्रस्तुत किए। मुख्य अतिथि उपनिरीक्षक संस्कृत डॉ. लोकेश कुमार वर्मा और पूर्व मंडलायुक्त डॉ. आरके भटनागर ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में दिनेश दत्त शर्मा, डॉ. भारत भूषण चौबे, रविकांत शर्मा, संजीव उनियाल, प्रियंका यादव, सुमन यादव मौजूद रहीं। डॉ. पंकज कुमार झा ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
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मेरठ। बिल्लेश्वर संस्कृत महाविद्यालय में शुक्रवार को संस्कृत सप्ताह का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य कहा कि यह कंप्यूटर की भाषा हो गई है। विदेशों में इस पर बड़े-बड़े शोध हो रहे हैं। रोजगार के साधन बढ़ रहे हैं। इसका व्याकरण सरल और शुद्ध है। संस्कृत के बिना संस्कृति नहीं बच सकती।
प्राचार्य डॉ. चिंतामणि जोशी ने कहा कि चारों वेद, उपनिषद और धार्मिक ग्रंथ संस्कृत भाषा में लिखे हैं। देश का ज्ञान, शोध, सभ्यता और संस्कृति सब इसमें है। यह भाषा विश्व की अमूल्य निधि है। इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि दूसरे देशों ने संस्कृत को महत्व देना शुरू कर दिया है। विदेश के कई बड़े संस्थानों में संस्कृत पढ़ाई जा रही है। यह साइंस के करीब है। संस्कृत की धरोहर की रक्षा और प्रसार के लिए इसे जन-जन की भाषा बनाने की आवश्यकता है। छात्र कौशल कुमार मिश्र, घनश्याम न्योपाने, कृष्णा, हर्षित, राजेंद्र ने संस्कृत श्लोक पढ़े और गीत प्रस्तुत किए। मुख्य अतिथि उपनिरीक्षक संस्कृत डॉ. लोकेश कुमार वर्मा और पूर्व मंडलायुक्त डॉ. आरके भटनागर ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में दिनेश दत्त शर्मा, डॉ. भारत भूषण चौबे, रविकांत शर्मा, संजीव उनियाल, प्रियंका यादव, सुमन यादव मौजूद रहीं। डॉ. पंकज कुमार झा ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
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