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गन्ना भुगतान नहीं होने पर भी बढ़ा रकबा, रकबा बढ़ाने में मेरठ दूसरे स्थान पर
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
Updated Mon, 03 Jul 2017 10:45 AM IST
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गन्ने की खेती
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शुगर मिलें भले ही किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान करने में खून के आंसू रुला रही हों, लेकिन किसानों का गन्ने की फसल से मोह भंग नहीं हो रहा है। मंडल में पिछले साल के मुकाबले इस साल भी गन्ने का रकबा बढ़ा है। जीपीएस से अब तक हो चुके करीब 95 फीसदी सर्वे में करीब 10.50 फीसदी की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। मंडल में सर्वाधिक रकबा बढ़ोतरी बुलंदशहर जिले में हुई है। इसके बाद मेरठ ने बाजी मारी है। वहीं किसानों ने अगेती प्रजाति की बुआई में रिकार्ड बढ़ोतरी की है। अगेती प्रजाति बुआई से किसानों के साथ शुगर मिलों को भी चीनी रिकवरी से फायदा होगा।
हर साल प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए गन्ना मूल्य भुगतान समय पर मिलना चुनौती भरा होता है। प्रदेश सरकारें बकाया भुगतान का दम भरकर सत्ता में आती हैं, लेकिन भुगतान समय पर नहीं करा पातीं। भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले 14 दिन के अंदर आपूर्ति किए गए गन्ने का भुगतान कराने का वादा किया था। लेकिन पेराई सत्र समाप्ति के तीन महीने के बाद भी कुछ मिलों ने संपूर्ण भुगतान नहीं किया है। इसके बावजूद किसान गन्ने की भरपूर बुआई कर रहे हैं। जीपीएस से चल रहे गन्ना सर्वे में प्रदेश में पिछले साल के मुकाबले करीब तीन फीसदी रकबे की वृद्धि दर्ज की जा रही है। मेरठ मंडल की बात करें तो अब तक करीब 95 फीसदी सर्वे हो चुका है। इसमें पिछले साल के मुकाबले 10.50 फीसदी रकबे की वृद्धि दर्ज की गई है।
उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र हरपाल सिंह ने बताया कि मंडल में पिछले साल के मुकाबले करीब 10.50 फीसदी गन्ना रकबा बढ़ा है। सर्वाधिक बढ़ोतरी बुलंदशहर में हुई है। किसानों ने जागरूकता का परिचय देते हुए अगेती प्रजाति गन्ने की सर्वाधिक बुआई की है, जो भविष्य के लिए बेहतर परिणाम देने वाली है। अब तक 95 फीसदी सर्वे हो चुका है।
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294214 हेक्टेयर पहुंचा रकबा
पेराई सत्र 2016-17 के लिए कराए गए सर्वे में मंडल का गन्ना रकबा 263229 हेक्टेयर था। लेकिन इस साल यह रकबा करीब 10.50 फीसदी बढ़कर 294214 हेक्टेयर पहुंच गया है। मंडल में सर्वाधिक गन्ना रकबा बुलंदशहर में बढ़ा है। इसके बाद मेरठ जनपद के किसानों ने भी रकबे में बढ़ोतरी की है।
अगेती प्रजाति की बंपर बुआई
सर्वे में निकलकर आया है कि किसानों ने अस्वीकृत गन्ना प्रजाति की बुआई छोड़कर अगेती प्रजाति की बुआई की तरफ रुझान किया है। मवाना, दौराला, नंगलामल, सकौती, माहिउद्दीनपुर, सिंभावली, बृजनाथपुर, अनामिका आदि शुगर मिल क्षेत्रों में 76 फीसदी से लेकर 96 फीसदी तक अगेती प्रजाति के गन्ने की बुआई की गई है। अभी तक अस्वीकृत प्रजातियों का दंश झेल रही सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलें बागपत, रमाला और अनूपशहर के तहत भी इस बार अगेती प्रजाति की बुुआई 60 फीसदी से ज्यादा हुई है। अगेती प्रजाति गन्ने से जहां किसानों को सामान्य प्रजाति गन्ने से 10 रुपये प्रति कुंतल रेट ज्यादा मिलेगा, वहीं चीनी रिकवरी बढ़ने से चीनी मिलों को भी फायदा होगा।
गन्ना पेराई और चीनी उत्पादन
वर्ष गन्ना पेराई चीनी उत्पादन
2015-16 972 100
2016-17 1251 127
नोट- गन्ना पेराई और चीनी उत्पादन लाख क्विंटल में
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हर साल प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए गन्ना मूल्य भुगतान समय पर मिलना चुनौती भरा होता है। प्रदेश सरकारें बकाया भुगतान का दम भरकर सत्ता में आती हैं, लेकिन भुगतान समय पर नहीं करा पातीं। भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले 14 दिन के अंदर आपूर्ति किए गए गन्ने का भुगतान कराने का वादा किया था। लेकिन पेराई सत्र समाप्ति के तीन महीने के बाद भी कुछ मिलों ने संपूर्ण भुगतान नहीं किया है। इसके बावजूद किसान गन्ने की भरपूर बुआई कर रहे हैं। जीपीएस से चल रहे गन्ना सर्वे में प्रदेश में पिछले साल के मुकाबले करीब तीन फीसदी रकबे की वृद्धि दर्ज की जा रही है। मेरठ मंडल की बात करें तो अब तक करीब 95 फीसदी सर्वे हो चुका है। इसमें पिछले साल के मुकाबले 10.50 फीसदी रकबे की वृद्धि दर्ज की गई है।
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उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र हरपाल सिंह ने बताया कि मंडल में पिछले साल के मुकाबले करीब 10.50 फीसदी गन्ना रकबा बढ़ा है। सर्वाधिक बढ़ोतरी बुलंदशहर में हुई है। किसानों ने जागरूकता का परिचय देते हुए अगेती प्रजाति गन्ने की सर्वाधिक बुआई की है, जो भविष्य के लिए बेहतर परिणाम देने वाली है। अब तक 95 फीसदी सर्वे हो चुका है।
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294214 हेक्टेयर पहुंचा रकबा
पेराई सत्र 2016-17 के लिए कराए गए सर्वे में मंडल का गन्ना रकबा 263229 हेक्टेयर था। लेकिन इस साल यह रकबा करीब 10.50 फीसदी बढ़कर 294214 हेक्टेयर पहुंच गया है। मंडल में सर्वाधिक गन्ना रकबा बुलंदशहर में बढ़ा है। इसके बाद मेरठ जनपद के किसानों ने भी रकबे में बढ़ोतरी की है।
अगेती प्रजाति की बंपर बुआई
सर्वे में निकलकर आया है कि किसानों ने अस्वीकृत गन्ना प्रजाति की बुआई छोड़कर अगेती प्रजाति की बुआई की तरफ रुझान किया है। मवाना, दौराला, नंगलामल, सकौती, माहिउद्दीनपुर, सिंभावली, बृजनाथपुर, अनामिका आदि शुगर मिल क्षेत्रों में 76 फीसदी से लेकर 96 फीसदी तक अगेती प्रजाति के गन्ने की बुआई की गई है। अभी तक अस्वीकृत प्रजातियों का दंश झेल रही सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलें बागपत, रमाला और अनूपशहर के तहत भी इस बार अगेती प्रजाति की बुुआई 60 फीसदी से ज्यादा हुई है। अगेती प्रजाति गन्ने से जहां किसानों को सामान्य प्रजाति गन्ने से 10 रुपये प्रति कुंतल रेट ज्यादा मिलेगा, वहीं चीनी रिकवरी बढ़ने से चीनी मिलों को भी फायदा होगा।
गन्ना पेराई और चीनी उत्पादन
वर्ष गन्ना पेराई चीनी उत्पादन
2015-16 972 100
2016-17 1251 127
नोट- गन्ना पेराई और चीनी उत्पादन लाख क्विंटल में