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मेडिकल
Updated Thu, 14 Sep 2017 02:23 AM IST
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मेरठ। चिकित्सा शिक्षा मंत्री बुधवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों से रूबरू हुए। उनकी समस्याएं सुनीं और उनका शीघ्र निराकरण करने का आश्वासन दिया।
मेडिकल कॉलेज के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी ने बताया कि एनआईसी भवन में चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से कहा कि मेडिकल कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन की व्यवस्था जल्द चालू करायी जाएगी। रेडियोथेरेपी मशीन की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है। साथ ही हिदायत दी कि मेडिकल के सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। पीआरओ सिस्टम लागू होना चाहिए, जो मरीजों को गाइड करें कि उन्हें किस डॉक्टर को दिखाना है, कहां जाना है, ताकि वे परेशान न हों।
इस दौरान मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. कीर्ति दूबे, डॉ. सुभाष दहिया, डॉ. नवरत्न, डॉ. रियाज, डॉ. सुभाष और डॉ. दिनेश राणा मौजूद रहे। वीडियो कांफ्रेंसिंग शाम पांच से रात आठ बजे तक चली। डॉ. अजीत चौधरी ने बताया कि केजीएमयू प्रोफेसर भी अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज का केजीएमयू प्रोफेसर और उनकी टीम ने दो दिन तक निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की है। वे शासन के निर्देश पर यहां आए थे। मेरठ मेडिकल के अलावा छह कॉलेजों में इसी तरह निरीक्षण कराया गया है।
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मेडिकल कॉलेज के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी ने बताया कि एनआईसी भवन में चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से कहा कि मेडिकल कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन की व्यवस्था जल्द चालू करायी जाएगी। रेडियोथेरेपी मशीन की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है। साथ ही हिदायत दी कि मेडिकल के सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। पीआरओ सिस्टम लागू होना चाहिए, जो मरीजों को गाइड करें कि उन्हें किस डॉक्टर को दिखाना है, कहां जाना है, ताकि वे परेशान न हों।
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इस दौरान मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. कीर्ति दूबे, डॉ. सुभाष दहिया, डॉ. नवरत्न, डॉ. रियाज, डॉ. सुभाष और डॉ. दिनेश राणा मौजूद रहे। वीडियो कांफ्रेंसिंग शाम पांच से रात आठ बजे तक चली। डॉ. अजीत चौधरी ने बताया कि केजीएमयू प्रोफेसर भी अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज का केजीएमयू प्रोफेसर और उनकी टीम ने दो दिन तक निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की है। वे शासन के निर्देश पर यहां आए थे। मेरठ मेडिकल के अलावा छह कॉलेजों में इसी तरह निरीक्षण कराया गया है।
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