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निगम चुनाव में भाजपा देगी नये चेहरों को तरजीह
Updated Tue, 19 Sep 2017 02:23 AM IST
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निगम चुनाव में भाजपा देगी नए चेहरों को तरजीह
दिल्ली निगम चुनाव की तर्ज पर पुराने पार्षदों को नहीं मिलेगा मौका
पार्टी नीति को लेकर चुनाव की तैयारी में जुटे वर्तमान पार्षदाें में बेचैनी
मेरठ।
नगर निगम चुनाव में भाजपा इस बार नए चेहरों को तरजीह देने की नीति बना रही है। पुराने पार्षदों को किनारे करते हुए नए कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाएगा। पार्टी की इस नीति की चर्चा से ही चुनाव लड़ने के मंसूबे तैयार कर रहे पुराने पार्षदों में बेचैनी बढ़ गई है।
भाजपा ने इस बार दिल्ली निगम चुनाव में पुराने चेहरों को किनारे करते हुए नए चेहरों को चुनाव में उतारा था। इस रणनीति से चुनाव में सफलता भी हासिल हुई। अब इस नीति को यूपी के निकाय चुनाव में खासतौर पर नगर निगम में अपनाने पर विचार चल रहा है। पार्टी का प्रांतीय नेतृत्व नगर निगम चुनाव में पार्षद से लेकर महापौर तक नए चेहरों को सामने लाने की रणनीति पर मंथन कर रहा है। इसके पीछे पार्टी थिंक टैंक का सोचना है कि एक तरफ जहां निर्विवाद प्रत्याशी मैदान में होंगे तो नये कार्यकर्ता पार्टी के साथ निष्ठा से जुड़ेंगे। क्योंकि लगातार पुराने नेताओं के चुनाव लड़ने से कार्यकर्ताओं की एक टीम लगातार आहत होती जा रही है।
पार्टी नेतृत्व के इस विचार की चर्चा से ही नगर निगम के वर्तमान पार्षद जो नए वार्ड परिसीमन के बाद अपनी गोटियां बिछाते हुए चुनाव की तैयारी में जुटे हैं, उनके बीच बेचैनी है। क्योंकि नगर निगम में इस बार नये परिसीमन के बाद 90 वार्ड हो गए हैं और भाजपा करीब 80 वार्ड में मजबूत प्रत्याशी मैदान में उतारेगी। ऐसे में नये चेहरों की तलाश स्थानीय नेतृत्व के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं होगा। इसके बीच पार्टी की यह नई नीति भीतरीघात को भी बढ़ावा देगी, इसकी संभावना पर भी पार्टी में मंथन हो रहा है। क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनाव से पूर्व पार्टी किसी तरह के अंदरूनी बड़े विवाद से दूर रहने को भी ध्यान में रखे हुए है।
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महापौर पर चलेगा जातिगत आंकड़ा
महापौर पद पर आरक्षण का इंतजार है। लेकिन पार्टी सूत्रों की मानें तो यदि सीट सामान्य या पिछड़ा वर्ग में जाती है तो जातिगत आंकड़ों को ध्यान में रखा जाएगा। सामान्य सीट होने पर भाजपा महापौर पद पर पंजाबी या जैन बिरादरी से प्रत्याशी चयन कर सकती है। क्योंकि सांसद और विधायक के साथ संगठनात्मक पदों पर भी वैश्य सहित अन्य बिरादरियों को तरजीह दी हुई है। लेकिन भाजपा के लिए मेरठ शहर में निर्णायक भूमिका निभाने वाला पंजाबी और जैन समाज बड़े पद पर उपेक्षित है।
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दिल्ली निगम चुनाव की तर्ज पर पुराने पार्षदों को नहीं मिलेगा मौका
पार्टी नीति को लेकर चुनाव की तैयारी में जुटे वर्तमान पार्षदाें में बेचैनी
मेरठ।
नगर निगम चुनाव में भाजपा इस बार नए चेहरों को तरजीह देने की नीति बना रही है। पुराने पार्षदों को किनारे करते हुए नए कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाएगा। पार्टी की इस नीति की चर्चा से ही चुनाव लड़ने के मंसूबे तैयार कर रहे पुराने पार्षदों में बेचैनी बढ़ गई है।
भाजपा ने इस बार दिल्ली निगम चुनाव में पुराने चेहरों को किनारे करते हुए नए चेहरों को चुनाव में उतारा था। इस रणनीति से चुनाव में सफलता भी हासिल हुई। अब इस नीति को यूपी के निकाय चुनाव में खासतौर पर नगर निगम में अपनाने पर विचार चल रहा है। पार्टी का प्रांतीय नेतृत्व नगर निगम चुनाव में पार्षद से लेकर महापौर तक नए चेहरों को सामने लाने की रणनीति पर मंथन कर रहा है। इसके पीछे पार्टी थिंक टैंक का सोचना है कि एक तरफ जहां निर्विवाद प्रत्याशी मैदान में होंगे तो नये कार्यकर्ता पार्टी के साथ निष्ठा से जुड़ेंगे। क्योंकि लगातार पुराने नेताओं के चुनाव लड़ने से कार्यकर्ताओं की एक टीम लगातार आहत होती जा रही है।
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पार्टी नेतृत्व के इस विचार की चर्चा से ही नगर निगम के वर्तमान पार्षद जो नए वार्ड परिसीमन के बाद अपनी गोटियां बिछाते हुए चुनाव की तैयारी में जुटे हैं, उनके बीच बेचैनी है। क्योंकि नगर निगम में इस बार नये परिसीमन के बाद 90 वार्ड हो गए हैं और भाजपा करीब 80 वार्ड में मजबूत प्रत्याशी मैदान में उतारेगी। ऐसे में नये चेहरों की तलाश स्थानीय नेतृत्व के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं होगा। इसके बीच पार्टी की यह नई नीति भीतरीघात को भी बढ़ावा देगी, इसकी संभावना पर भी पार्टी में मंथन हो रहा है। क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनाव से पूर्व पार्टी किसी तरह के अंदरूनी बड़े विवाद से दूर रहने को भी ध्यान में रखे हुए है।
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महापौर पर चलेगा जातिगत आंकड़ा
महापौर पद पर आरक्षण का इंतजार है। लेकिन पार्टी सूत्रों की मानें तो यदि सीट सामान्य या पिछड़ा वर्ग में जाती है तो जातिगत आंकड़ों को ध्यान में रखा जाएगा। सामान्य सीट होने पर भाजपा महापौर पद पर पंजाबी या जैन बिरादरी से प्रत्याशी चयन कर सकती है। क्योंकि सांसद और विधायक के साथ संगठनात्मक पदों पर भी वैश्य सहित अन्य बिरादरियों को तरजीह दी हुई है। लेकिन भाजपा के लिए मेरठ शहर में निर्णायक भूमिका निभाने वाला पंजाबी और जैन समाज बड़े पद पर उपेक्षित है।