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गैस गीजर के हादसे से बचना है तो रहे सावधान
Updated Tue, 21 Nov 2017 03:02 AM IST
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गैस गीजर हादसे से बचना है, तो सावधानी से करें इस्तेमाल
- विशेषज्ञों की राय में सिलेंडर और गीजर बाथरूम से रखें बाहर
- गीजर से निकलने वाली कार्बन मोनो-ऑक्साइड शरीर को पहुंचा रही नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। सर्दियां बढ़ते ही आम तौर पर घरों में एलपीजी गैस का इस्तेमाल बढ़ जाता है। सर्दी में घरों में गैस गीजर इस्तेमाल करने वाले परिवारों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। गैस से चलने वाले गीजर से सावधान रहने की भी सख्त जरूरत है।
बिजली के बिल से बचने के लिए गैस गीजर का इस्तेमाल घरों में होने लगा है। बिजली की अपेक्षा गैस गीजर सस्ता भी पड़ता है। यह गीजर सिलेंडर सहित बाजार में 4 हजार से 8 हजार रुपये तक उपलब्ध है। जिससे यह आम आदमी के बजट में आसानी से आ जाता है। विशेषज्ञों की माने गर्म पानी के लिए गैस गीजर जितना सुविधाजनक है। उतना ही यह जोखिम भरा भी है। गैस गीजर चलाते समय उससे निकलने वाली कार्बन मोनो-ऑक्साइड शरीर को नुकसान देती है।
ये सावधानी रखें
शहर में गैस गीजर के इस्तेमाल में लापरवाही के कारण कई बड़े हादसे हो चुके हैं। जिसमें कई जाने भी जा चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार गैस गीजर लगाने के लिए बाथरूम को हवादार बनाने की सलाह दी जाती है। इसके बावजूद लोग लापरवाही बरतते हैं और बंद मकानों में बने बाथरूम के अंदर गैस गीजर लगा देते हैं। जिन बाथरूम में पर्याप्त वेंटीलेशन नहीं है उसमें गैस गीजर भी बाहर ही लगाएं।
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चिकित्सकों की राय
गैस गीजर को बाथरूम से बाहर ही लगाया जाए। बाहर से ही गर्म पानी की लाइन बाथरूम तक लाई जाए। जिससे गीजर से निकलने वाली कार्बन मोनो-ऑक्साइड के खतरे से बचा जा सकता है। लेकिन बाथरूम के अंदर गीजर का इस्तेमाल पर ध्यान देने की जरूरत है। विशेष रूप से दिल के मरीजों को गैस गीजर के इस्तेमाल से बचना चाहिए। गीजर से विषैली गैस शुरूआत में ही निकलती है इसलिए उसे ऑन करते ही बाथरूम में न घुसें। पहले पानी बाल्टी में भर लें और गीजर बंद कर दें। बाद में जाकर नहाएं- डा. हरीश मारवाह हृदय एवं श्वांस रोग विशेषज्ञ
गैस गीजर से निकलने वाला कार्बन मोनो-ऑक्साइड स्लो पॉयजन के रूप में काम करता है। जो शरीर को महसूस तो नहीं होगा और फेफड़ों को चपेट में ले लेती है। कार्बन मोनो-ऑक्साइड धीरे-धीरे शरीर में घर बना लेती है। कई ऐसे हादसे में इंसान की सोते सोते मृत्यु हो जाती है। यह स्लो पायजन के कारण ही होती है। ऐसे में सावधानी बेहद जरूरी है। सिलेंडर से ज्यादा खतरा गीजर से है। उसे ही बार लगाएं। खास तौर से बच्चों का ध्यान रखें कि वे गीजर चलाकर भीतर देर तक स्नान न करें। इसके लिए सभी को अलर्ट रहने की जरूरत है। - डा. तनुराज सिरोही फिजिशियन
हानिकारक क्यों
कार्बन मोनो-ऑक्साइड शरीर को ऑक्सिजन पहुंचाने वाले रेड ब्लड सेल्स पर असर डालती है। आमतौर पर जब कोई सांस लेता है तो हवा में मौजूद ऑक्सिजन हीमोग्लोबिन के साथ मिल जाती है। हीमोग्लोबिन की मदद से ही ऑक्सिजन फेफड़ों से होकर शरीर के अन्य हिस्सों तक जाती है। कार्बन मोनोऑक्साइड सूंघने से हीमोग्लोबिन मॉलिक्यूल ब्लॉक हो जाते हैं और शरीर का पूरा ऑक्सिजन ट्रांसपोर्ट सिस्टम प्रभावित हो जाता है। ऑक्सिजन न मिलने के कारण शरीर के सेल्स मरने लगते हैं।
समस्या के लक्षण
सिर दर्द, सांस लेने में दिक्कत, घबराहट, मितली आना, सोचने की क्षमता पर असर, हाथों और आंखों का कोऑर्डिनेशन गड़बड़ होना, पेट में तकलीफ व उलटी, हार्ट रेट बढ़ना, शरीर का तापमान कम होना, लो ब्लड प्रेशर, कार्डिएक एवं रेस्पिरेटरी फेलियर आदि।
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- विशेषज्ञों की राय में सिलेंडर और गीजर बाथरूम से रखें बाहर
- गीजर से निकलने वाली कार्बन मोनो-ऑक्साइड शरीर को पहुंचा रही नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। सर्दियां बढ़ते ही आम तौर पर घरों में एलपीजी गैस का इस्तेमाल बढ़ जाता है। सर्दी में घरों में गैस गीजर इस्तेमाल करने वाले परिवारों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। गैस से चलने वाले गीजर से सावधान रहने की भी सख्त जरूरत है।
बिजली के बिल से बचने के लिए गैस गीजर का इस्तेमाल घरों में होने लगा है। बिजली की अपेक्षा गैस गीजर सस्ता भी पड़ता है। यह गीजर सिलेंडर सहित बाजार में 4 हजार से 8 हजार रुपये तक उपलब्ध है। जिससे यह आम आदमी के बजट में आसानी से आ जाता है। विशेषज्ञों की माने गर्म पानी के लिए गैस गीजर जितना सुविधाजनक है। उतना ही यह जोखिम भरा भी है। गैस गीजर चलाते समय उससे निकलने वाली कार्बन मोनो-ऑक्साइड शरीर को नुकसान देती है।
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ये सावधानी रखें
शहर में गैस गीजर के इस्तेमाल में लापरवाही के कारण कई बड़े हादसे हो चुके हैं। जिसमें कई जाने भी जा चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार गैस गीजर लगाने के लिए बाथरूम को हवादार बनाने की सलाह दी जाती है। इसके बावजूद लोग लापरवाही बरतते हैं और बंद मकानों में बने बाथरूम के अंदर गैस गीजर लगा देते हैं। जिन बाथरूम में पर्याप्त वेंटीलेशन नहीं है उसमें गैस गीजर भी बाहर ही लगाएं।
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चिकित्सकों की राय
गैस गीजर को बाथरूम से बाहर ही लगाया जाए। बाहर से ही गर्म पानी की लाइन बाथरूम तक लाई जाए। जिससे गीजर से निकलने वाली कार्बन मोनो-ऑक्साइड के खतरे से बचा जा सकता है। लेकिन बाथरूम के अंदर गीजर का इस्तेमाल पर ध्यान देने की जरूरत है। विशेष रूप से दिल के मरीजों को गैस गीजर के इस्तेमाल से बचना चाहिए। गीजर से विषैली गैस शुरूआत में ही निकलती है इसलिए उसे ऑन करते ही बाथरूम में न घुसें। पहले पानी बाल्टी में भर लें और गीजर बंद कर दें। बाद में जाकर नहाएं- डा. हरीश मारवाह हृदय एवं श्वांस रोग विशेषज्ञ
गैस गीजर से निकलने वाला कार्बन मोनो-ऑक्साइड स्लो पॉयजन के रूप में काम करता है। जो शरीर को महसूस तो नहीं होगा और फेफड़ों को चपेट में ले लेती है। कार्बन मोनो-ऑक्साइड धीरे-धीरे शरीर में घर बना लेती है। कई ऐसे हादसे में इंसान की सोते सोते मृत्यु हो जाती है। यह स्लो पायजन के कारण ही होती है। ऐसे में सावधानी बेहद जरूरी है। सिलेंडर से ज्यादा खतरा गीजर से है। उसे ही बार लगाएं। खास तौर से बच्चों का ध्यान रखें कि वे गीजर चलाकर भीतर देर तक स्नान न करें। इसके लिए सभी को अलर्ट रहने की जरूरत है। - डा. तनुराज सिरोही फिजिशियन
हानिकारक क्यों
कार्बन मोनो-ऑक्साइड शरीर को ऑक्सिजन पहुंचाने वाले रेड ब्लड सेल्स पर असर डालती है। आमतौर पर जब कोई सांस लेता है तो हवा में मौजूद ऑक्सिजन हीमोग्लोबिन के साथ मिल जाती है। हीमोग्लोबिन की मदद से ही ऑक्सिजन फेफड़ों से होकर शरीर के अन्य हिस्सों तक जाती है। कार्बन मोनोऑक्साइड सूंघने से हीमोग्लोबिन मॉलिक्यूल ब्लॉक हो जाते हैं और शरीर का पूरा ऑक्सिजन ट्रांसपोर्ट सिस्टम प्रभावित हो जाता है। ऑक्सिजन न मिलने के कारण शरीर के सेल्स मरने लगते हैं।
समस्या के लक्षण
सिर दर्द, सांस लेने में दिक्कत, घबराहट, मितली आना, सोचने की क्षमता पर असर, हाथों और आंखों का कोऑर्डिनेशन गड़बड़ होना, पेट में तकलीफ व उलटी, हार्ट रेट बढ़ना, शरीर का तापमान कम होना, लो ब्लड प्रेशर, कार्डिएक एवं रेस्पिरेटरी फेलियर आदि।