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जीएसटी हेल्पलाइन शुरू, शंकाओं का समाधान
Updated Tue, 04 Jul 2017 03:23 AM IST
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मेरठ। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सेंट्रल एक्साइज) और राज्य वस्तु एवं सेवा कर (वाणिज्य कर) में बनी हेल्प डेस्क शुरू हो गई है। हेल्प डेस्क में व्यापारी कई तरह के सवाल कर अपनी जिज्ञासाएं शांत कर रहे हैं। राज्य वस्तु एवं सेवा कर के एडिशनल कमिश्नर वीएन सिन्हा ने बताया कि सोमवार को व्यापारियों ने हेल्प डेस्क पर कई सवाल पूछे।
सवाल : जीएसटी में कर का भुगतान किस प्रकार करेंगे।
- ऑनलाइन ही जमा किया जाएगा। सिर्फ छोटे व्यापारी बैंक में काउंटर पर ऑनलाइन जेनरेटेड चालान के द्वारा 10 हजार तक का कर जमा कर सकेंगे। व्यापारी को कर भुगतान के लिए डेबिट, क्रेडिट कार्ड से पेमेंट की सुविधा दी गई है।
सवाल: व्यापारी को रिटर्न कहां और कैसे दाखिल करना है।
- करदाता व्यापारी अपनी खरीद एवं बिक्री का विवरण इलेक्ट्रॉनिक रूप में ऑनलाइन जीएसटीएन पोर्टल पर दाखिल करेंगे। कार्यालय से किसी संपर्क की आवश्यकता नहीं होगी। जुलाई 2017 के आउटवर्ड सप्लाई को अपलोडिंग सुविधा 15 जुलाई 2017 से उपलब्ध होगी। कोई दंड या लेट फीस नहीं ली जाएगी।
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सवाल: समाधान योजना की क्या व्यवस्था है और उन्हें कब रिटर्न दाखिल करना होगा।
- समाधान योजना के व्यापारी त्रैमासिक रिटर्न देंगे। वे व्यापारी समाधान योजना का लाभ ले सकते हैं, जिनका पिछले वर्ष का टर्नओवर 75 लाख रुपये कम हो। प्रांत के बाहर से माल लाने वाले भी समाधान योजना लेने के लिए पात्र होंगे। लेकिन वे केंद्रीय बिक्री नहीं कर सकते। समाधान की दर एक प्रतिशत ट्रेडर्स के लिए और दो प्रतिशत निर्माता व पांच प्रतिशत रेस्टोरेंट के व्यापारियों के लिए रखी गई है।
सवाल : रिटर्न देर से दाखिल करने पर कितना अर्थदंड लगेगा।
- रोजाना 100 रुपये कर अर्थदंड देय होगा। इसकी अधिकतम सीमा पांच हजार रुपये होगी।
जीएसटी के बाद कस्टम हुआ अलग
मेरठ। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर कार्यालय में पहले कस्टम भी लगता था। अब कस्टम को अलग कर दिया गया है। हालांकि कार्यालय अभी केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सेंट्रल एक्साइज) में ही है, इसके जल्द ही अलग होने की उम्मीद है। इसके अलावा टैक्स के हिसाब से हापुड़ का कर पहले नोएडा कार्यालय के अंतर्गत आता था, अब इसे मेरठ स्थित कार्यालय से जोड़ा गया है।
दस्तावेजों में त्रुटि
मेरठ। रजिस्ट्रेशन कराने आ रहे कई कारोबारियों के दस्तावेजों में त्रुटि मिली है। उनके ऑनलाइन भेजे गए कई दस्तावेजों में नाम-पते साफ नजर नहीं आ रहे हैं।
- हेल्प डेस्क पर जीएसटी के बारे में कारोबारियों ने की सवालों की बौछार
- कहा गया, छोटे व्यापारियों को राहत, ऐसे व्यापारी बैंक में जमा कर सकेंगे कर
- केंद्रीय और राज्य जीएसटी विभाग में बनी हैं हेल्प डेस्क
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सवाल : जीएसटी में कर का भुगतान किस प्रकार करेंगे।
- ऑनलाइन ही जमा किया जाएगा। सिर्फ छोटे व्यापारी बैंक में काउंटर पर ऑनलाइन जेनरेटेड चालान के द्वारा 10 हजार तक का कर जमा कर सकेंगे। व्यापारी को कर भुगतान के लिए डेबिट, क्रेडिट कार्ड से पेमेंट की सुविधा दी गई है।
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सवाल: व्यापारी को रिटर्न कहां और कैसे दाखिल करना है।
- करदाता व्यापारी अपनी खरीद एवं बिक्री का विवरण इलेक्ट्रॉनिक रूप में ऑनलाइन जीएसटीएन पोर्टल पर दाखिल करेंगे। कार्यालय से किसी संपर्क की आवश्यकता नहीं होगी। जुलाई 2017 के आउटवर्ड सप्लाई को अपलोडिंग सुविधा 15 जुलाई 2017 से उपलब्ध होगी। कोई दंड या लेट फीस नहीं ली जाएगी।
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सवाल: समाधान योजना की क्या व्यवस्था है और उन्हें कब रिटर्न दाखिल करना होगा।
- समाधान योजना के व्यापारी त्रैमासिक रिटर्न देंगे। वे व्यापारी समाधान योजना का लाभ ले सकते हैं, जिनका पिछले वर्ष का टर्नओवर 75 लाख रुपये कम हो। प्रांत के बाहर से माल लाने वाले भी समाधान योजना लेने के लिए पात्र होंगे। लेकिन वे केंद्रीय बिक्री नहीं कर सकते। समाधान की दर एक प्रतिशत ट्रेडर्स के लिए और दो प्रतिशत निर्माता व पांच प्रतिशत रेस्टोरेंट के व्यापारियों के लिए रखी गई है।
सवाल : रिटर्न देर से दाखिल करने पर कितना अर्थदंड लगेगा।
- रोजाना 100 रुपये कर अर्थदंड देय होगा। इसकी अधिकतम सीमा पांच हजार रुपये होगी।
जीएसटी के बाद कस्टम हुआ अलग
मेरठ। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर कार्यालय में पहले कस्टम भी लगता था। अब कस्टम को अलग कर दिया गया है। हालांकि कार्यालय अभी केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सेंट्रल एक्साइज) में ही है, इसके जल्द ही अलग होने की उम्मीद है। इसके अलावा टैक्स के हिसाब से हापुड़ का कर पहले नोएडा कार्यालय के अंतर्गत आता था, अब इसे मेरठ स्थित कार्यालय से जोड़ा गया है।
दस्तावेजों में त्रुटि
मेरठ। रजिस्ट्रेशन कराने आ रहे कई कारोबारियों के दस्तावेजों में त्रुटि मिली है। उनके ऑनलाइन भेजे गए कई दस्तावेजों में नाम-पते साफ नजर नहीं आ रहे हैं।
- हेल्प डेस्क पर जीएसटी के बारे में कारोबारियों ने की सवालों की बौछार
- कहा गया, छोटे व्यापारियों को राहत, ऐसे व्यापारी बैंक में जमा कर सकेंगे कर
- केंद्रीय और राज्य जीएसटी विभाग में बनी हैं हेल्प डेस्क