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250 की किताबों का सेट ढाई हजार में

Wed, 04 May 2016 02:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 04 May 2016 02:07 AM IST
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250 ki kitabo ka set
किताबे - फोटो : अमर उजाला
स्कूलों में एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की किताबाें क ो तवज्जो दी जा रही है। सीबीएसई के नियमों को ताक पर रखकर पब्लिक स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें लगाई गई हैं। इतना ही नहीं निर्धारित दुकानों से किताबें खरीदने के लिए छात्रों पर दबाव भी बनाया जा रहा है।
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प्री नर्सरी से आठवीं कक्षा की किताबों में स्कूल अच्छी कमाई कर रहे हैं। एनसीईआरटी में किताबों का जो सेट 250 रुपये में पड़ता है, निजी प्रकाशकों में उसी क्लास की किताबों का पूरा सेट 2500 रुपये तक आता है। कई बार तो रेट इससे अधिक निकल जाते हैं।
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स्कूल और निजी प्रकाशक आपसी कमीशन तय करके उसे किताबों के दाम में जोड़कर अभिभावकों से वसूलते हैं। इससे किताबों के दाम कई गुना बढ़ जाते हैं।

150 से सस्ती नहीं कोई किताब
निजी प्रकाशकों की नर्सरी कक्षा से लेकर सीनियर कक्षाओं की कोई भी किताब 150 रुपसे से कम नहीं है। ड्राइंग बुक और एक्ससाइज बुक की कीमत नर्सरी क्लास के लिए 250 रुपये से शुरू है, जो आम तौर पर 60 रुपये में मिलती है। निजी विद्यालयों में पूरी तरह से निजी प्रकाशकों की किताबों से ही पढ़ाई हो रही है। कई स्कूल तो छात्रों से एनसीईआरटी व निजी प्रकाशकों दोनों की किताबों के सेट खरीदवा रहे हैं। पढ़ाई निजी प्रकाशकों की बुक्स से होती है। चेकिंग के दौरान एनसीईआरटी की किताबें दिखाकर अपना दामन बचा लेते हैं।
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क्लास वही रेट अलग
क्लास    विषय          निजी प्रकाशक रेट     एनसीईआरटी

तीन     अंग्रेजी ग्रामर    250 रुपये               50 रुपये
छठी       गणित         220                     50
सातवीं    साइंस         395                     50
आठवीं   कंप्यूटर्स       320                     50

नोटबुक्स, स्टेशनरी में भी खेल
स्कूलों में किताबें ही नहीं स्टेशनरी और कॉपियों के नाम पर भी खेल हो रहा है। स्कूल का नाम छपी कॉपियां लगाई गई हैं। जो सामान्य कॉपी से महंगी हैं। दुकानदार इसका फायदा उठाकर अभिभावकों को लूट रहे हैं।


हर साल बदलती हैं किताब
स्कूल अपनी कमाई के चक्कर में हर साल किताबों में बदलाव कर देते हैं। पिछले वर्ष जो किताबें उस कक्षा में लगाई होती हैं, नए सत्र में सिरे से उन सभी किताबों को सिलेबस से आउट कर देते हैं, ताकि दूसरे छात्र पुरानी किताबों क ो प्रयोग ही न कर पाएं। हर साल महंगी किताबों का पूरा सेट लेना पड़ता है। 
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