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हाईस्कूल रहा खास, इंटरमीडिएट ने किया उदास
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- इंटर में विषयों का एक पेपर होने से गिरा रिजल्ट, पहले होते थे दो
- एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू होने से भी पड़ा फर्क
- 10वीं में नकल पर सख्ती भी आई रास, छह साल में पहली बार 90 प्रतिशत
अरीश रिजवी
मेरठ। नकल पर नकेल का हाईस्कूल में रिजल्ट पर सकारत्मक असर दिखा। हाईस्कूल का रिजल्ट बेहद खास रहा। पिछले छह साल में पहली बार 90 प्रतिशत से ज्यादा रिजल्ट रहा। दूसरी तरफ, इंटरमीडिएट में पिछले छह साल में सबसे कम प्रतिशत रहा है। इस बार इंटरमीडिएट का रिजल्ट 80 प्रतिशत भी पार नहीं कर पाया। इससे पहले छह सालों में यह स्थिति नहीं रही थी। 2013 और 2015 में तो इंटर का रिजल्ट 93 और 92 प्रतिशत से भी ज्यादा रहा था।
इंटरमीडिएट में 7.6 प्रतिशत रिजल्ट के गिरने की वजह विषय के दो पेपर का एक होना माना जा रहा है। पहले इंटर में हर विषय के दो पेपर होते थे, लेकिन इस बार पेपर की संख्या कम की गई थी। सारे विषयों के एक-एक पेपर कर दिए गए थे। इसका विपरीत असर इंटर के रिजल्ट पर पड़ा है। वहीं, इसकी दूसरी वजह यह मानी जा रही है कि एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू हुए दूसरा साल ही हुआ है। विद्यार्थी भी इन पुस्तकों को पढ़ने में पूरी तरह से कंफर्टेबल नहीं हुए हैं। यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय सचिव राणा सहस्त्रांशु सिंह सुमन का कहना है कि एनसीईआरटी की पुस्तकें और विषय केदो पेपर की जगह एक पेपर इसकी वजह प्रतीत हो रही है। क्योंकि नकल पर सख्ती तो हाईस्कूल के लिए भी थी, लेकिन हाईस्कूल का रिजल्ट पिछले छह साल में सबसे टॉप पर रहा है।
हाईस्कूल में मॉडरेशन का भी ‘कमाल’
हाईस्कूल के रिजल्ट के 4.19 प्रतिशत बेहतर होने में मॉडरेशन का भी ‘कमाल’ है। सूत्रों का कहना है कि हाईस्कूल में हिंदी, सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी में 8-8 अंक के मॉडरेशन दिए जाते हैं, जबकि गणित, प्रारंभिक गणित और विज्ञान में 10-10 अंक का। हालांकि इंटरमीडिएट में हिंदी, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी, भूगोल और अर्थशास्त्र में 8-8 अंक का मॉडरेशन दिए जाते हैं और भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान में 14-14 अंक का मॉडरेशन दिए जाते हैं, लेकिन इस बार इंटरमीडिएट में इसका असर रिजल्ट पर ज्यादा नहीं दिखा।
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मेरठ का क्षेत्रीय कार्यालय फिर बना नंबर वन
मेरठ। प्रदेश में पांच क्षेत्रीय कार्यालय हैं। मेरठ, बरेली, इलाहाबाद (प्रयागराज) , वाराणसी और गोरखपुर। गोरखपुर पिछली बार बना था। मेरठ के क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत 17 जिले आते हैं। इस बार मेरठ क्षेत्रीय कार्यालय हाईस्कूल में पहला स्थान है। यहां का रिजल्ट 84.49 प्रतिशत रहा है। बरेली का 83.36 प्रतिशत, प्रयागराज 80.02, वाराणसी 76.07 और गोरखपुर क्षेत्रीय कार्यालय का प्रतिशत 79.63 प्रतिशत रहा। हालांकि 12वीं में बरेली पहले नंबर है। इलाहाबाद या प्रयागराज दूसरे नंबर और 70.75 प्रतिशत अंकों केसाथ मेरठ तीसरे नंबर है। मेरठ स्थित यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय केअंतर्गत अलीगढ़, आगरा, एटा, मैनपुरी, मथुरा, फिरोजाबाद, मेरठ, हाथरस, कासगंज, बुलंदशहर, सहारनपुर, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, गौतमबुद्धनगर, बागपत, हापुड़ और शामली जिले आते हैं।
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- एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू होने से भी पड़ा फर्क
- 10वीं में नकल पर सख्ती भी आई रास, छह साल में पहली बार 90 प्रतिशत
अरीश रिजवी
मेरठ। नकल पर नकेल का हाईस्कूल में रिजल्ट पर सकारत्मक असर दिखा। हाईस्कूल का रिजल्ट बेहद खास रहा। पिछले छह साल में पहली बार 90 प्रतिशत से ज्यादा रिजल्ट रहा। दूसरी तरफ, इंटरमीडिएट में पिछले छह साल में सबसे कम प्रतिशत रहा है। इस बार इंटरमीडिएट का रिजल्ट 80 प्रतिशत भी पार नहीं कर पाया। इससे पहले छह सालों में यह स्थिति नहीं रही थी। 2013 और 2015 में तो इंटर का रिजल्ट 93 और 92 प्रतिशत से भी ज्यादा रहा था।
इंटरमीडिएट में 7.6 प्रतिशत रिजल्ट के गिरने की वजह विषय के दो पेपर का एक होना माना जा रहा है। पहले इंटर में हर विषय के दो पेपर होते थे, लेकिन इस बार पेपर की संख्या कम की गई थी। सारे विषयों के एक-एक पेपर कर दिए गए थे। इसका विपरीत असर इंटर के रिजल्ट पर पड़ा है। वहीं, इसकी दूसरी वजह यह मानी जा रही है कि एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू हुए दूसरा साल ही हुआ है। विद्यार्थी भी इन पुस्तकों को पढ़ने में पूरी तरह से कंफर्टेबल नहीं हुए हैं। यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय सचिव राणा सहस्त्रांशु सिंह सुमन का कहना है कि एनसीईआरटी की पुस्तकें और विषय केदो पेपर की जगह एक पेपर इसकी वजह प्रतीत हो रही है। क्योंकि नकल पर सख्ती तो हाईस्कूल के लिए भी थी, लेकिन हाईस्कूल का रिजल्ट पिछले छह साल में सबसे टॉप पर रहा है।
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हाईस्कूल में मॉडरेशन का भी ‘कमाल’
हाईस्कूल के रिजल्ट के 4.19 प्रतिशत बेहतर होने में मॉडरेशन का भी ‘कमाल’ है। सूत्रों का कहना है कि हाईस्कूल में हिंदी, सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी में 8-8 अंक के मॉडरेशन दिए जाते हैं, जबकि गणित, प्रारंभिक गणित और विज्ञान में 10-10 अंक का। हालांकि इंटरमीडिएट में हिंदी, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी, भूगोल और अर्थशास्त्र में 8-8 अंक का मॉडरेशन दिए जाते हैं और भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान में 14-14 अंक का मॉडरेशन दिए जाते हैं, लेकिन इस बार इंटरमीडिएट में इसका असर रिजल्ट पर ज्यादा नहीं दिखा।
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मेरठ का क्षेत्रीय कार्यालय फिर बना नंबर वन
मेरठ। प्रदेश में पांच क्षेत्रीय कार्यालय हैं। मेरठ, बरेली, इलाहाबाद (प्रयागराज) , वाराणसी और गोरखपुर। गोरखपुर पिछली बार बना था। मेरठ के क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत 17 जिले आते हैं। इस बार मेरठ क्षेत्रीय कार्यालय हाईस्कूल में पहला स्थान है। यहां का रिजल्ट 84.49 प्रतिशत रहा है। बरेली का 83.36 प्रतिशत, प्रयागराज 80.02, वाराणसी 76.07 और गोरखपुर क्षेत्रीय कार्यालय का प्रतिशत 79.63 प्रतिशत रहा। हालांकि 12वीं में बरेली पहले नंबर है। इलाहाबाद या प्रयागराज दूसरे नंबर और 70.75 प्रतिशत अंकों केसाथ मेरठ तीसरे नंबर है। मेरठ स्थित यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय केअंतर्गत अलीगढ़, आगरा, एटा, मैनपुरी, मथुरा, फिरोजाबाद, मेरठ, हाथरस, कासगंज, बुलंदशहर, सहारनपुर, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, गौतमबुद्धनगर, बागपत, हापुड़ और शामली जिले आते हैं।