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युद्ध में जीते टैंकों पर सजा शौर्य का मंच
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sun, 13 Sep 2015 02:46 AM IST
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भारत-पाक युद्ध के स्वर्ण जयंती समारोह में शनिवार को सैनिक सम्मेलन हुआ। छावनी स्थित 22 इंफ्रेंट्री डिविजन की 17 पुणे हॉर्स की यूनिट में हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेंट्रल आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राजन बख्शी रहे। उन्होंने पुणे हॉर्स के जांबाजों की शौर्य गाथा का बखान किया। मंच युद्ध के दौरान पाकिस्तान से जीते गए टैंकों पर बनाया गया। वहीं युद्ध की तस्वीरें देख जवानों की आंखें नम हो गईं।
सैनिकों को संबोधित करते हुए जनरल बख्शी ने कहा कि पुणे हॉर्स ने हर मोर्चेे पर दुश्मनों को मात दी थी। वीर शहीदों ने 1965 के युद्ध में अपनी आखिरी सांस तक दुश्मनों से लोहा लिया और एक-एक जवान ने दर्जनों को मार गिराया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान से 8 सितबंर 1965 को जंग शुरू हुई थी, जो 23 सितंबर 1965 तक चली।
11 सितंबर 1965 को 17 पुणे हॉर्स रेजमेंट को पाकिस्तान स्थित स्याल कोर्ट सेक्टर में फुलौर पर कब्जा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। पुणे हॉर्स रेजिमेंट फुलौर की तरफ बढ़ रही थी, तभी दुश्मन ने आक्रमण कर दिया। लेकिन जवान नहीं रुके। 16 सितंबर को बतूर डोरगांडी पर हमला कर उस पर कब्जा कर लिया।
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पाकिस्तान के फुलौर और बतूर डोरगांडी तक कब्जे की लड़ाई छह दिनों तक चली थी। युद्ध की तस्वीरों को पुणे हॉर्स यूनिट ने फिल्म के रूप में समाहित किया है। शाम को फिल्म को दिखाया गया।
लेफ्टिनेंट कर्नल तारापोर की बेटी भी आईं
यूनिट की ओर से लड़ाई के हीरो रहे लेफ्टिनेंट कर्नल एबी तारापोर की शहादत को कोई नहीं भुला सकता। उनकी बेटी जरीन बोइस भी स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में हिस्सा लेने आईं। उन्होंने अपने पिता की वर्दी यूनिट को सौंपी। 13 सितंबर को पूर्व व वर्तमान सैनिकों की मीट आयोजित होगी और इसके बाद डिनर पार्टी होगी
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सैनिकों को संबोधित करते हुए जनरल बख्शी ने कहा कि पुणे हॉर्स ने हर मोर्चेे पर दुश्मनों को मात दी थी। वीर शहीदों ने 1965 के युद्ध में अपनी आखिरी सांस तक दुश्मनों से लोहा लिया और एक-एक जवान ने दर्जनों को मार गिराया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान से 8 सितबंर 1965 को जंग शुरू हुई थी, जो 23 सितंबर 1965 तक चली।
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11 सितंबर 1965 को 17 पुणे हॉर्स रेजमेंट को पाकिस्तान स्थित स्याल कोर्ट सेक्टर में फुलौर पर कब्जा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। पुणे हॉर्स रेजिमेंट फुलौर की तरफ बढ़ रही थी, तभी दुश्मन ने आक्रमण कर दिया। लेकिन जवान नहीं रुके। 16 सितंबर को बतूर डोरगांडी पर हमला कर उस पर कब्जा कर लिया।
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पाकिस्तान के फुलौर और बतूर डोरगांडी तक कब्जे की लड़ाई छह दिनों तक चली थी। युद्ध की तस्वीरों को पुणे हॉर्स यूनिट ने फिल्म के रूप में समाहित किया है। शाम को फिल्म को दिखाया गया।
लेफ्टिनेंट कर्नल तारापोर की बेटी भी आईं
यूनिट की ओर से लड़ाई के हीरो रहे लेफ्टिनेंट कर्नल एबी तारापोर की शहादत को कोई नहीं भुला सकता। उनकी बेटी जरीन बोइस भी स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में हिस्सा लेने आईं। उन्होंने अपने पिता की वर्दी यूनिट को सौंपी। 13 सितंबर को पूर्व व वर्तमान सैनिकों की मीट आयोजित होगी और इसके बाद डिनर पार्टी होगी