{"_id":"5b4e59544f1c1b51748b593a","slug":"191531861332-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेडिकल कॉलेज में इलाज के साथ मिल रहा संक्रमण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेडिकल कॉलेज में इलाज के साथ मिल रहा संक्रमण
Updated Wed, 18 Jul 2018 02:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में मरीजों को इलाज के साथ-साथ ‘संक्रमण’ भी मिल रहा है। दरअसल, बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण संबंधी दिशा-निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियमों को ताक पर रखकर जैव चिकित्सीय अपशिष्ट इधर-उधर फेंके जा रहे हैं, जो संक्रामक बीमारियों को दावत दे रहे हैं।
बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एंड हैंडलिंग नियम-2000 के प्रावधानों और जैविक परिसंकट से सुरक्षा के मानकों का मेडिकल कॉलेज में किस तरह पालन किया जा रहा है, इसका उदाहरण वहां फैले बायो मेडिकल वेस्ट और अन्य खाने के जगह-जगह पड़े सामान से आसानी से लगाया जा सकता है। हालांकि अस्पताल में लाल, पीले और नीले रंग के डस्टबिन अलग-अलग प्रकार के मेडिकल वेस्ट डालने के लिए रखे हुए हैं। लेकिन इनका पूरी तह से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
दवा काउंटर के पीछे और ब्लड बैंक के सामने जाली वाले गेट के पास बायो मेडिकल वेस्ट फैला रहता है। इसमें इस्तेमाल की हुईं बैंडेज, खून से सनी पट्टियां, खाली बोतलें और दवाइयों के रैपर आदि पड़े रहते हैं। मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों में स्टेट इंफेक्शन कंट्रोल पॉलिसी लागू की हुई है, जिसके तहत मरीजों के कक्ष में हैंड सेनेटाइजर होना चाहिए, जिससे उनसे मिलने वाले व्यक्ति भी अपने हाथ साफ कर सकें। लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है।
विज्ञापन
---
डस्टबिन का इस तरह करें इस्तेमाल
लाल रंग : दस्ताने, यूरिन बैग, प्लास्टिक की बोतलें आदि।
पीला रंग : प्लास्टर, रूई और ब्लड बैग, खून से सनी पट्टी आदि।
नीला रंग : ब्लेड, कांच की टूटी बोतलें, सीरिंज और दवाओं की खाली रेपर आदि।
---
लिफ्ट भी खराब, सेफ्टी गार्ड लगा वाटर कूलर गायब
मेडिकल कॉलेज की लिफ्ट नंबर पांच भी लंबे समय से खराब पड़ी है। इसे दुरुस्त कराने की जहमत नहीं उठाई जा रही है। इसके अलावा नए पर्चा काउंटर के बराबर में लगा वाटर कूलर भी काफी समय से गायब है। उसका सेफ्टी गार्ड लगा है। लेकिन वाटर कूलर नहीं है।
करेंगे जागरूक, लगेगा वाटर कूलर
कई बार मरीज या तीमारदार बायो मेडिकल वेस्ट इधर-उधर फेंक देते हैं। इसके लिए उन्हें और मेडिकल स्टाफ को भी जागरूक किया जाएगा कि डस्टबिन का इस्तेमाल करें। वाटर कूलर लगाने और लिफ्ट चालू कराने की भी तैयारी चल रही है। -डॉ. अजीत चौधरी, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज
खास बातें:
- जगह-जगह बिखरा पड़ा जैव चिकित्सीय अपशिष्ट दे रहा संक्रामक बीमारियों को दावत
विज्ञापन
बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एंड हैंडलिंग नियम-2000 के प्रावधानों और जैविक परिसंकट से सुरक्षा के मानकों का मेडिकल कॉलेज में किस तरह पालन किया जा रहा है, इसका उदाहरण वहां फैले बायो मेडिकल वेस्ट और अन्य खाने के जगह-जगह पड़े सामान से आसानी से लगाया जा सकता है। हालांकि अस्पताल में लाल, पीले और नीले रंग के डस्टबिन अलग-अलग प्रकार के मेडिकल वेस्ट डालने के लिए रखे हुए हैं। लेकिन इनका पूरी तह से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
विज्ञापन
दवा काउंटर के पीछे और ब्लड बैंक के सामने जाली वाले गेट के पास बायो मेडिकल वेस्ट फैला रहता है। इसमें इस्तेमाल की हुईं बैंडेज, खून से सनी पट्टियां, खाली बोतलें और दवाइयों के रैपर आदि पड़े रहते हैं। मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों में स्टेट इंफेक्शन कंट्रोल पॉलिसी लागू की हुई है, जिसके तहत मरीजों के कक्ष में हैंड सेनेटाइजर होना चाहिए, जिससे उनसे मिलने वाले व्यक्ति भी अपने हाथ साफ कर सकें। लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है।
विज्ञापन
---
डस्टबिन का इस तरह करें इस्तेमाल
लाल रंग : दस्ताने, यूरिन बैग, प्लास्टिक की बोतलें आदि।
पीला रंग : प्लास्टर, रूई और ब्लड बैग, खून से सनी पट्टी आदि।
नीला रंग : ब्लेड, कांच की टूटी बोतलें, सीरिंज और दवाओं की खाली रेपर आदि।
---
लिफ्ट भी खराब, सेफ्टी गार्ड लगा वाटर कूलर गायब
मेडिकल कॉलेज की लिफ्ट नंबर पांच भी लंबे समय से खराब पड़ी है। इसे दुरुस्त कराने की जहमत नहीं उठाई जा रही है। इसके अलावा नए पर्चा काउंटर के बराबर में लगा वाटर कूलर भी काफी समय से गायब है। उसका सेफ्टी गार्ड लगा है। लेकिन वाटर कूलर नहीं है।
करेंगे जागरूक, लगेगा वाटर कूलर
कई बार मरीज या तीमारदार बायो मेडिकल वेस्ट इधर-उधर फेंक देते हैं। इसके लिए उन्हें और मेडिकल स्टाफ को भी जागरूक किया जाएगा कि डस्टबिन का इस्तेमाल करें। वाटर कूलर लगाने और लिफ्ट चालू कराने की भी तैयारी चल रही है। -डॉ. अजीत चौधरी, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज
खास बातें:
- जगह-जगह बिखरा पड़ा जैव चिकित्सीय अपशिष्ट दे रहा संक्रामक बीमारियों को दावत