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सैनी गांव में काली नदी पर 18वीं सदी में बना पुल, जिसे अब तोड़ा जा रहा
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हाईवे चौड़ीकरण के लिए टूट रहा 18वीं सदी का पुल
गंगानगर। हाईवे चौड़ीकरण के लिए सैनी गांव में काली नदी पर बना 18वीं सदी का पुल तोड़ा जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह पुल करीब 200 साल पुराना है। हालांकि संकरा होने के कारण काफी समय से यह बंद है।
यातायात एवं व्यापार सुविधाओं के लिए अंग्रेेजों ने 18वीं सदी में बड़े स्तर पर नदियों पर पुलों का निर्माण कराया। इनमें से एक पुल मेरठ-पौड़ी हाईवे पर गांव सैनी में है। दो पिलर पर खड़ा यह पुल लोहे व लकड़ी से बना है। ग्रामीणों की माने तो करीब 70 साल पहले पुल की मरम्मत कराई गई थी। इस दौरान खराब लकड़ी के ब्लॉक के स्थान पर लोहे के गार्डर लगाए गए थे। पुल की चौड़ाई कम होने और यातायात बढ़ने पर उसी के बराबर में दूसरा पुल बनाया गया। अब मेरठ-पौड़ी हाईवे के चौड़ीकरण के चलते इस पुल को तोड़ा जा रहा है।
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गंगानगर। हाईवे चौड़ीकरण के लिए सैनी गांव में काली नदी पर बना 18वीं सदी का पुल तोड़ा जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह पुल करीब 200 साल पुराना है। हालांकि संकरा होने के कारण काफी समय से यह बंद है।
यातायात एवं व्यापार सुविधाओं के लिए अंग्रेेजों ने 18वीं सदी में बड़े स्तर पर नदियों पर पुलों का निर्माण कराया। इनमें से एक पुल मेरठ-पौड़ी हाईवे पर गांव सैनी में है। दो पिलर पर खड़ा यह पुल लोहे व लकड़ी से बना है। ग्रामीणों की माने तो करीब 70 साल पहले पुल की मरम्मत कराई गई थी। इस दौरान खराब लकड़ी के ब्लॉक के स्थान पर लोहे के गार्डर लगाए गए थे। पुल की चौड़ाई कम होने और यातायात बढ़ने पर उसी के बराबर में दूसरा पुल बनाया गया। अब मेरठ-पौड़ी हाईवे के चौड़ीकरण के चलते इस पुल को तोड़ा जा रहा है।
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