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काली नदी के लिए स्वीकृत हुए कई काम
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काली नदी की स्वच्छता को स्वीकृत हुए कई काम
मेरठ। काली नदी की सफाई के लिए कई काम स्वीकृत हुए हैं। इनमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के साथ ही इंटरसेप्शन और डायवर्जन आदि के काम है।
सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि नमामी गंगे अभियान के तहत उन्होंने काली नदी की सफाई कराने की भी मांग रखी थी। क्योंकि आगे जाकर काली नदी गंगा में मिलती है। इसके साथ ही इस नदी के प्रदूषित जल से कई दर्जन गांवों के बड़ी संख्या में लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। इस नदी को प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ करने के लिए ओडियन नाला और आबू नाला में जहां अवरोधन के तहत मोड़ संरचनाएं तैयार की जाएंगी। 200 एमएलडी क्षमता का एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाया जाएगा। 14 एमएलडी क्षमता की ट्रीटमेंट क्षमता भी विकेंद्रीकृत की जाएगी। इसके अलावा भी अन्य काम होंगे। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 681.78 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस परियोजना के द्वारा मेरठ के सभी तीन नालों, अबू नाला -1, अबू नाला -2 और ओडियन नाला को काली नदी में अनुपचारित मल का निर्वहन नहीं किया जाएगा। परियोजना के पूरा होने से काली नदी को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी। इस काम को दो साल में पूरा करना होगा। जबकि संबंधित निर्माण इकाई को 15 साल के रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी भी दी जाएगी।
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मेरठ। काली नदी की सफाई के लिए कई काम स्वीकृत हुए हैं। इनमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के साथ ही इंटरसेप्शन और डायवर्जन आदि के काम है।
सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि नमामी गंगे अभियान के तहत उन्होंने काली नदी की सफाई कराने की भी मांग रखी थी। क्योंकि आगे जाकर काली नदी गंगा में मिलती है। इसके साथ ही इस नदी के प्रदूषित जल से कई दर्जन गांवों के बड़ी संख्या में लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। इस नदी को प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ करने के लिए ओडियन नाला और आबू नाला में जहां अवरोधन के तहत मोड़ संरचनाएं तैयार की जाएंगी। 200 एमएलडी क्षमता का एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाया जाएगा। 14 एमएलडी क्षमता की ट्रीटमेंट क्षमता भी विकेंद्रीकृत की जाएगी। इसके अलावा भी अन्य काम होंगे। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 681.78 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस परियोजना के द्वारा मेरठ के सभी तीन नालों, अबू नाला -1, अबू नाला -2 और ओडियन नाला को काली नदी में अनुपचारित मल का निर्वहन नहीं किया जाएगा। परियोजना के पूरा होने से काली नदी को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी। इस काम को दो साल में पूरा करना होगा। जबकि संबंधित निर्माण इकाई को 15 साल के रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी भी दी जाएगी।