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भागवत कथा से नष्ट होती हैं कष्ट: संजीव
Updated Thu, 14 Sep 2017 03:11 AM IST
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भागवत कथा से नष्ट होते हैं कष्ट- संजीव
मेरठ। कथा ही एक ऐसा माध्यम है जो जगत में उपजी समस्त व्यथाओं को नष्ट करने की क्षमता रखती है। मानव हृदय में उपजी सभी समस्त व्यथाओं का मूल कारण राग-द्वेष है। मन तो समस्त भावों का निवास स्थान है। यह प्रवचन कथा वाचक आचार्य संजीव नारायण ने शास्त्रीनगर एल ब्लॉक में श्रीमद्भागवत कथा में दिए। उन्होंने कहा कि परमात्मा भाव के भूखे होते हैं तो मन को परमात्मा को ही सौंप दो। यदि मन को संसार में लगाया तो दुख के अतिरिक्त कुछ प्राप्त नहीं होगा। उन्होंने महाभारत के सूक्ष्म इतिहास का वर्णन करते हुए कहा कि जब महाभारत युद्ध के उपरांत प्रभु श्रीकृष्ण पांडवों से विदा लेने गए तो भगवान ने माता कुंती से वरदान मांगने को कहा। कुंती ने संसार का ऐसा अनोखा वरदान मांगा जो न पूर्व में किसी के द्वारा मांगा गया और न बाद में मांगा गया। इस दौरान राजा परीक्षित के जन्म और श्राप मिलने की कथा भी सुनाई गई। प्रशांत भारद्वाज, दीपा शर्मा, विशाल शर्मा, वीशु कुमार, संजीव पुंडीर, मुकुल गुर्जर आदि मौजूद रहे।
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मेरठ। कथा ही एक ऐसा माध्यम है जो जगत में उपजी समस्त व्यथाओं को नष्ट करने की क्षमता रखती है। मानव हृदय में उपजी सभी समस्त व्यथाओं का मूल कारण राग-द्वेष है। मन तो समस्त भावों का निवास स्थान है। यह प्रवचन कथा वाचक आचार्य संजीव नारायण ने शास्त्रीनगर एल ब्लॉक में श्रीमद्भागवत कथा में दिए। उन्होंने कहा कि परमात्मा भाव के भूखे होते हैं तो मन को परमात्मा को ही सौंप दो। यदि मन को संसार में लगाया तो दुख के अतिरिक्त कुछ प्राप्त नहीं होगा। उन्होंने महाभारत के सूक्ष्म इतिहास का वर्णन करते हुए कहा कि जब महाभारत युद्ध के उपरांत प्रभु श्रीकृष्ण पांडवों से विदा लेने गए तो भगवान ने माता कुंती से वरदान मांगने को कहा। कुंती ने संसार का ऐसा अनोखा वरदान मांगा जो न पूर्व में किसी के द्वारा मांगा गया और न बाद में मांगा गया। इस दौरान राजा परीक्षित के जन्म और श्राप मिलने की कथा भी सुनाई गई। प्रशांत भारद्वाज, दीपा शर्मा, विशाल शर्मा, वीशु कुमार, संजीव पुंडीर, मुकुल गुर्जर आदि मौजूद रहे।