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सेंट्रल पार्किंग बनी तो सौंदर्यीकरण पर चलेगा हथौड़ा
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सेंट्रल पार्किंग बनी तो सौंदर्यीकरण पर चलेगा हथौड़ा
- आबूलेन पर वर्ष 2015 में खत्म की गई थी सेंट्रल पार्किंग व्यवस्था
-उपाध्यक्ष ने आबूलेन पर डिवाइडर खत्म करने का उठाया है मुद्दा
मेरठ।
आबूलेन में पार्किंग प्रकरण ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। वर्ष-2015 में आबूलेन में सेंट्रल पार्किंग हटाने को लेकर जमकर बखेड़ा हुआ था। तत्कालीन सीईओ डीएन यादव की सख्ती के आगे व्यापारियों को झुकना पड़ा था। अब फिर सेंट्रल पार्किंग बनाने की मांग उठने लगी है। खुद बोर्ड उपाध्यक्ष बीना वाधवा ने विशेष बोर्ड बैठक में सेंट्रल पार्किंग बनाने की मांग रखी।
कैंट बोर्ड ने आबूलेन से सेंट्रल पार्किंग को हटाकर बंगला नंबर 173 में व्यवस्था बनाई थी। इसका सख्ती से पालन न होने से बाजार आने वाले लोग दुकानों के आगे ही अपने वाहन पार्क करने लगे हैं। इससे व्यवस्था और बिगड़ गई है। वहीं, कुछ स्थानों पर जहां डिवाइडर नहीं बना है, वहां सेंट्रल पार्किंग की तर्ज पर ही कार पार्किंग की जा रही है। इससे भी अव्यवस्था फैल रही है। आबूलेन पर सेंट्रल पार्किंग खत्म होने के बाद कैंट बोर्ड की तरफ से डिवाइडर को गोलनुमा आकार का बनाया गया था। इस पर सोलर लाइट के साथ गमले भी लगाए गए हैं। अगर दोबारा से सेंट्रल पार्किंग बन जाती है तो सौंदर्यीकरण भी खत्म हो जाएगा। एक बार फिर आबूलेन पर बीच सड़क पर पार्किंग नजर आने लगेगी।
पार्किंग ठेके में होता है घपला
आबूलेन की सेंट्रल पार्किंग के ठेके में भी घपले के आरोप लगे हैं। इस तरफ सभी की नजरें लगी हैं। कैंट बोर्ड सेंट्रल पार्किंग का ठेका पांच लाख में देता था। जिसे बाद में ऊंची कीमतों पर बेच दिया जाता था। सूत्रों के अनुसार पार्किंग ठेके में घपला करने के लिए कई लोग लगे हैं।
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रोजाना मात्र 5-10 कार
बंगला नंबर 173 में बनीं पार्किंग में रोजाना 5-10 कार ही पार्क होती हैं। यहां एक घंटे की पार्किंग का किराया 30 रुपये और महीने का 1500 रुपये है। पार्किंग की सुरक्षा में तैनात कर्मचारी ने बताया कि अब तो एक दिन में मात्र 5-10 कार ही आती हैं। अधिकतर लोग बाजार में ही खड़ी कर देते हैं।
इन्होंने कहा -
मैं हमेशा व्यापारी भाइयों के हक की आवाज उठाती आई हूं। इससे व्यापारियों पर असर पड़ रहा है। वहां जाम बढ़ता जा रहा है। हमें जरूरत है कि इसे खत्म कर पार्किंग बना दी जाए।
बीना वाधवा, उपाध्यक्ष, कैंट बोर्ड
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- आबूलेन पर वर्ष 2015 में खत्म की गई थी सेंट्रल पार्किंग व्यवस्था
-उपाध्यक्ष ने आबूलेन पर डिवाइडर खत्म करने का उठाया है मुद्दा
मेरठ।
आबूलेन में पार्किंग प्रकरण ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। वर्ष-2015 में आबूलेन में सेंट्रल पार्किंग हटाने को लेकर जमकर बखेड़ा हुआ था। तत्कालीन सीईओ डीएन यादव की सख्ती के आगे व्यापारियों को झुकना पड़ा था। अब फिर सेंट्रल पार्किंग बनाने की मांग उठने लगी है। खुद बोर्ड उपाध्यक्ष बीना वाधवा ने विशेष बोर्ड बैठक में सेंट्रल पार्किंग बनाने की मांग रखी।
कैंट बोर्ड ने आबूलेन से सेंट्रल पार्किंग को हटाकर बंगला नंबर 173 में व्यवस्था बनाई थी। इसका सख्ती से पालन न होने से बाजार आने वाले लोग दुकानों के आगे ही अपने वाहन पार्क करने लगे हैं। इससे व्यवस्था और बिगड़ गई है। वहीं, कुछ स्थानों पर जहां डिवाइडर नहीं बना है, वहां सेंट्रल पार्किंग की तर्ज पर ही कार पार्किंग की जा रही है। इससे भी अव्यवस्था फैल रही है। आबूलेन पर सेंट्रल पार्किंग खत्म होने के बाद कैंट बोर्ड की तरफ से डिवाइडर को गोलनुमा आकार का बनाया गया था। इस पर सोलर लाइट के साथ गमले भी लगाए गए हैं। अगर दोबारा से सेंट्रल पार्किंग बन जाती है तो सौंदर्यीकरण भी खत्म हो जाएगा। एक बार फिर आबूलेन पर बीच सड़क पर पार्किंग नजर आने लगेगी।
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पार्किंग ठेके में होता है घपला
आबूलेन की सेंट्रल पार्किंग के ठेके में भी घपले के आरोप लगे हैं। इस तरफ सभी की नजरें लगी हैं। कैंट बोर्ड सेंट्रल पार्किंग का ठेका पांच लाख में देता था। जिसे बाद में ऊंची कीमतों पर बेच दिया जाता था। सूत्रों के अनुसार पार्किंग ठेके में घपला करने के लिए कई लोग लगे हैं।
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रोजाना मात्र 5-10 कार
बंगला नंबर 173 में बनीं पार्किंग में रोजाना 5-10 कार ही पार्क होती हैं। यहां एक घंटे की पार्किंग का किराया 30 रुपये और महीने का 1500 रुपये है। पार्किंग की सुरक्षा में तैनात कर्मचारी ने बताया कि अब तो एक दिन में मात्र 5-10 कार ही आती हैं। अधिकतर लोग बाजार में ही खड़ी कर देते हैं।
इन्होंने कहा -
मैं हमेशा व्यापारी भाइयों के हक की आवाज उठाती आई हूं। इससे व्यापारियों पर असर पड़ रहा है। वहां जाम बढ़ता जा रहा है। हमें जरूरत है कि इसे खत्म कर पार्किंग बना दी जाए।
बीना वाधवा, उपाध्यक्ष, कैंट बोर्ड