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जातिगत राजनीति को साधने की कवायद में मेरठ के हाथ फिर मायूसी
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जातिगत राजनीति को साधने की कवायद में मेरठ के हाथ फिर मायूसी
- लगातार तीसरी बार सांसद बने राजेन्द्र अग्रवाल को इस बार भी मंत्रिमंडल में नहीं मिली जगह
- डा. महेंद्र नाथ पांडे के मंत्री बनने के बाद वाजपेयी को फिर से मिल सकती है यूपी की जिम्मेदारी
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में मेरठ को एक बार फिर से मायूसी हाथ लगी। पिछले कार्यकाल में भी कई बार मंत्रिमंडल में फेरबदल हुआ। लेकिन मेरठ को प्रतिनिधित्व नहीं मिला। इस बार उम्मीद की जा रही थी कि लगातार तीसरी बार सांसद बनने पर राजेंद्र अग्रवाल को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। लेकिन इस बार भी मेरठ की झोली खाली ही रह गई। इसके पीछे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जातिगत आंकड़ों को साधने की कवायद मना जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी लोकसभा में बड़े बहुमत के साथ पहुंची है। खुद भाजपा के 300 से ऊपर सांसद जीतकर आए हैं। ऐसे में क्षेत्रीय संतुलन बनाने के साथ सहयोगी दलों को साधने की भी जिम्मेदारी भाजपा नेतृत्व की थी। इन सभी को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई मंत्री बने। लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश से गाजियाबाद से जनरल (सेवानिवृत्त) वीके सिंह और मुजफ्फरनगर से डॉ. संजीव बालियान को मंत्रिमंडल में जगह दी गई। जबकि पिछले कार्यकाल में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से गौतमबुद्धनगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा भी मंत्री बनाया गया था।
हालांकि पिछले कार्यकाल में डॉ. बालियान को पहले मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। लेकिन करीब दो साल बाद उनकी जगह बागपत सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह को जगह दे दी गई। मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल को पहले भी मंत्रिमंडल से दूर ही रखा गया था। इस बार फिर राजेंद्र अग्रवाल लगातार तीसरी बार सांसद निर्वाचित हुए हैं। शैक्षिक योग्यता और लोकसभा में उनकी सक्रियता को देखते हुए माना जा रहा था कि वह इस बार मंत्रिमंडल में अवश्य शामिल होंगे। लेकिन बृहस्पतिवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में उनका नाम मंत्रिमंडल की सूची से बाहर देख मेरठ के लोगों को मायूसी हाथ लगी। माना यह भी जा रहा है कि उनकी जीत में वोटों का अंतर काफी कम रहा। इससे भी उनका नाम मंत्रियों की सूची में नहीं रखा गया। हालांकि यही समीकरण मुजफ्फरनगर में भी रहा। लेकिन वहां संजीव बालियान को जैसे चौधरी अजित सिंह को पटखनी देने का इनाम दिया गया।
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डॉ. वाजपेयी का बढ़ सकता है कद
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी का कद अब बढ़ सकता है। क्योंकि प्रदेशाध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडे जो कि इस बार भी सांसद निर्वाचित हुए हैं, उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। डॉ. वाजपेयी 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष थे और उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 73 सीट जीतने का रिकॉर्ड बनाया था। लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले डॉ. वाजपेयी को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। इसे लेकर संगठन के कुछ पदाधिकारियों से उनकी न बनने की चर्चा ज्यादा रही। लेकिन अब एक बार फिर से उनको संगठन में अहम जिम्मेदारी देने की उम्मीद जताई जा रही है।
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- लगातार तीसरी बार सांसद बने राजेन्द्र अग्रवाल को इस बार भी मंत्रिमंडल में नहीं मिली जगह
- डा. महेंद्र नाथ पांडे के मंत्री बनने के बाद वाजपेयी को फिर से मिल सकती है यूपी की जिम्मेदारी
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में मेरठ को एक बार फिर से मायूसी हाथ लगी। पिछले कार्यकाल में भी कई बार मंत्रिमंडल में फेरबदल हुआ। लेकिन मेरठ को प्रतिनिधित्व नहीं मिला। इस बार उम्मीद की जा रही थी कि लगातार तीसरी बार सांसद बनने पर राजेंद्र अग्रवाल को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। लेकिन इस बार भी मेरठ की झोली खाली ही रह गई। इसके पीछे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जातिगत आंकड़ों को साधने की कवायद मना जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी लोकसभा में बड़े बहुमत के साथ पहुंची है। खुद भाजपा के 300 से ऊपर सांसद जीतकर आए हैं। ऐसे में क्षेत्रीय संतुलन बनाने के साथ सहयोगी दलों को साधने की भी जिम्मेदारी भाजपा नेतृत्व की थी। इन सभी को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई मंत्री बने। लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश से गाजियाबाद से जनरल (सेवानिवृत्त) वीके सिंह और मुजफ्फरनगर से डॉ. संजीव बालियान को मंत्रिमंडल में जगह दी गई। जबकि पिछले कार्यकाल में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से गौतमबुद्धनगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा भी मंत्री बनाया गया था।
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हालांकि पिछले कार्यकाल में डॉ. बालियान को पहले मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। लेकिन करीब दो साल बाद उनकी जगह बागपत सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह को जगह दे दी गई। मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल को पहले भी मंत्रिमंडल से दूर ही रखा गया था। इस बार फिर राजेंद्र अग्रवाल लगातार तीसरी बार सांसद निर्वाचित हुए हैं। शैक्षिक योग्यता और लोकसभा में उनकी सक्रियता को देखते हुए माना जा रहा था कि वह इस बार मंत्रिमंडल में अवश्य शामिल होंगे। लेकिन बृहस्पतिवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में उनका नाम मंत्रिमंडल की सूची से बाहर देख मेरठ के लोगों को मायूसी हाथ लगी। माना यह भी जा रहा है कि उनकी जीत में वोटों का अंतर काफी कम रहा। इससे भी उनका नाम मंत्रियों की सूची में नहीं रखा गया। हालांकि यही समीकरण मुजफ्फरनगर में भी रहा। लेकिन वहां संजीव बालियान को जैसे चौधरी अजित सिंह को पटखनी देने का इनाम दिया गया।
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डॉ. वाजपेयी का बढ़ सकता है कद
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी का कद अब बढ़ सकता है। क्योंकि प्रदेशाध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडे जो कि इस बार भी सांसद निर्वाचित हुए हैं, उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। डॉ. वाजपेयी 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष थे और उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 73 सीट जीतने का रिकॉर्ड बनाया था। लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले डॉ. वाजपेयी को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। इसे लेकर संगठन के कुछ पदाधिकारियों से उनकी न बनने की चर्चा ज्यादा रही। लेकिन अब एक बार फिर से उनको संगठन में अहम जिम्मेदारी देने की उम्मीद जताई जा रही है।