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मेला नौचंदी को एक्सपोमार्ट से जोड़ने का सपना धड़ाम
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हस्तकला को बढ़ावा देने के लिए मेला नौचंदी को एक्सपोमार्ट और अवध मार्ट से लिंक करने का सपना हवा हवाई ही साबित हुआ। आश्चर्य की बात यह है कि इसे विकसित करने के लिए मेरठ विकास प्राधिकरण ने साढ़े चार करोड़ रुपये भी मंजूर कर दिए थे। लेकिन बात बनी ही नहीं।
यह था प्रस्ताव
मेरठ के ऐतिहासिक मेला नौचंदी को ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपोमार्ट तथा लखनऊ अवध मार्ट से लिंक करने की तैयारी थी। पिछली सरकार में भी इस पर विस्तृत प्लान तैयार किया गया था, जिसे वर्तमान सरकार ने भी आगे बढ़ाया था। अहम था कि हस्तशिल्पियों के लिए एक बड़ा शिल्पगृह भी दिया जाए। चूंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश हस्तकला का बड़ा केंद्र है। लेकिन विडंबना यह है कि सही बाजार एवं सुविधाएं न मिलने के कारण यह कला यहां सही तरह से परवान नहीं चढ़ पा रही है।
मेलों में मिलता है बड़ा बाजार
मेला नौचंदी हस्तशिल्पियों को बड़ा बाजार मुहैया कराता है। दरअसल, मेरठ के अलावा मुरादाबाद, अलीगढ़, आगरा, सहारनपुर, खुर्जा, बुलंदशहर और बिजनौर में हस्त शिल्पकला न केवल जीवित है बल्कि रोजगार का आधार बनी है। इन्हीं स्थानों के कारीगर अपनी कला के जरिए तैयार किए गए माल को मेला नौचंदी में लेकर आते हैं। इससे न केवल आय होती है बल्कि इस कला को पहचान भी मिलती है। शिल्पकार हमेशा से ही यह मांग सरकार से करते रहे हैं कि इसके लिए और बड़ा मंच दिया जाए। बड़ा बाजार मिलेगा तो इससे रोजगार के अवसर और ज्यादा पैदा होंगे।
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एक्सपोमार्ट के जरिए खुलनी थी राहें
एशिया का सबसे बड़ा फूड पार्क यमुना सिटी में यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे बनाने की घोषणा की गई थी। कहा गया था कि इस एक्सपोमार्ट से नौचंदी मेले को लिंक किया जाए। हस्तशिल्पियों को बढ़ावा के लिए एक्सपोमॉर्ट और लखनऊ के अवधमार्ट को एक साथ लिंक करने का प्रस्ताव था। मंशा यह थी कि हस्तशिल्प उत्पादों को एक्सपोर्ट के जरिए बाजार मिलेगा तो यह सकारात्मक दिशा में उठाया गया यह एक बड़ा कदम साबित होगा। अवध मार्ट भी साथ में लिंक रहेगा तो यह राह और आगे तक जाएगा।
यह होना था काम
एमडीए ने अपनी अवस्थापना निधि से चार करोड़ 47 लाख रुपये मेला नौचंदी के लिए स्वीकृत किए थे। इस रकम से पटेल मंडप को नया लुक देना था। इसके अलावा ओपन एयर थियेटर, मल्टी पर्पज थियेटर बनाने, कियोस्क बनाने की योजना थी। ढाई करोड़ की लागत से यहां आर्टिजंस होम यानी शिल्प गृह बनाने का प्रस्ताव था जिसमें कलाकारों के लिए बनाए जाने वाले इस होम में हस्तशिल्पकारों की कला को प्रोत्साहन देने की योजना थी।
अटक गया मामला
इस प्रोजेक्ट पर सही तरीके से काम ही नहीं हो पाया। मेला नौचंदी में पहले निगम और जिला पंचायत विभाग की आपसी खींचतान और उसके बाद आम नागरिकों की जमीनों में दावेदारी ने सारे प्रस्ताव चौपट कर दिए। यहां हाट बाजार बनाने का प्रस्ताव भी इन्हीं अड़ंगों के चलते पूरा नहीं हो पाया।
गंभीरता से होगा काम
जमीनों के विवाद के कारण इस प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया जा सका है। विवाद निपट जाएंगे तो हाट बाजार जैसे अहम प्रस्ताव पर गंभीरता से काम करेंगे। -अनीता सी. मेश्राम, मंडलायुक्त
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मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हस्तकला को बढ़ावा देने के लिए मेला नौचंदी को एक्सपोमार्ट और अवध मार्ट से लिंक करने का सपना हवा हवाई ही साबित हुआ। आश्चर्य की बात यह है कि इसे विकसित करने के लिए मेरठ विकास प्राधिकरण ने साढ़े चार करोड़ रुपये भी मंजूर कर दिए थे। लेकिन बात बनी ही नहीं।
यह था प्रस्ताव
मेरठ के ऐतिहासिक मेला नौचंदी को ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपोमार्ट तथा लखनऊ अवध मार्ट से लिंक करने की तैयारी थी। पिछली सरकार में भी इस पर विस्तृत प्लान तैयार किया गया था, जिसे वर्तमान सरकार ने भी आगे बढ़ाया था। अहम था कि हस्तशिल्पियों के लिए एक बड़ा शिल्पगृह भी दिया जाए। चूंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश हस्तकला का बड़ा केंद्र है। लेकिन विडंबना यह है कि सही बाजार एवं सुविधाएं न मिलने के कारण यह कला यहां सही तरह से परवान नहीं चढ़ पा रही है।
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मेलों में मिलता है बड़ा बाजार
मेला नौचंदी हस्तशिल्पियों को बड़ा बाजार मुहैया कराता है। दरअसल, मेरठ के अलावा मुरादाबाद, अलीगढ़, आगरा, सहारनपुर, खुर्जा, बुलंदशहर और बिजनौर में हस्त शिल्पकला न केवल जीवित है बल्कि रोजगार का आधार बनी है। इन्हीं स्थानों के कारीगर अपनी कला के जरिए तैयार किए गए माल को मेला नौचंदी में लेकर आते हैं। इससे न केवल आय होती है बल्कि इस कला को पहचान भी मिलती है। शिल्पकार हमेशा से ही यह मांग सरकार से करते रहे हैं कि इसके लिए और बड़ा मंच दिया जाए। बड़ा बाजार मिलेगा तो इससे रोजगार के अवसर और ज्यादा पैदा होंगे।
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एक्सपोमार्ट के जरिए खुलनी थी राहें
एशिया का सबसे बड़ा फूड पार्क यमुना सिटी में यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे बनाने की घोषणा की गई थी। कहा गया था कि इस एक्सपोमार्ट से नौचंदी मेले को लिंक किया जाए। हस्तशिल्पियों को बढ़ावा के लिए एक्सपोमॉर्ट और लखनऊ के अवधमार्ट को एक साथ लिंक करने का प्रस्ताव था। मंशा यह थी कि हस्तशिल्प उत्पादों को एक्सपोर्ट के जरिए बाजार मिलेगा तो यह सकारात्मक दिशा में उठाया गया यह एक बड़ा कदम साबित होगा। अवध मार्ट भी साथ में लिंक रहेगा तो यह राह और आगे तक जाएगा।
यह होना था काम
एमडीए ने अपनी अवस्थापना निधि से चार करोड़ 47 लाख रुपये मेला नौचंदी के लिए स्वीकृत किए थे। इस रकम से पटेल मंडप को नया लुक देना था। इसके अलावा ओपन एयर थियेटर, मल्टी पर्पज थियेटर बनाने, कियोस्क बनाने की योजना थी। ढाई करोड़ की लागत से यहां आर्टिजंस होम यानी शिल्प गृह बनाने का प्रस्ताव था जिसमें कलाकारों के लिए बनाए जाने वाले इस होम में हस्तशिल्पकारों की कला को प्रोत्साहन देने की योजना थी।
अटक गया मामला
इस प्रोजेक्ट पर सही तरीके से काम ही नहीं हो पाया। मेला नौचंदी में पहले निगम और जिला पंचायत विभाग की आपसी खींचतान और उसके बाद आम नागरिकों की जमीनों में दावेदारी ने सारे प्रस्ताव चौपट कर दिए। यहां हाट बाजार बनाने का प्रस्ताव भी इन्हीं अड़ंगों के चलते पूरा नहीं हो पाया।
गंभीरता से होगा काम
जमीनों के विवाद के कारण इस प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया जा सका है। विवाद निपट जाएंगे तो हाट बाजार जैसे अहम प्रस्ताव पर गंभीरता से काम करेंगे। -अनीता सी. मेश्राम, मंडलायुक्त