फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   गर्भवती की नहीं परवाह और संतान चाहिए सेहतमंद

गर्भवती की नहीं परवाह और संतान चाहिए सेहतमंद

Mon, 27 May 2019 02:31 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 27 May 2019 02:31 AM IST
विज्ञापन
गर्भवती की नहीं परवाह और संतान चाहिए सेहतमंद
गर्भवती की नहीं परवाह और संतान चाहिए सेहतमंद
विज्ञापन

90 फीसदी गर्भवती महिलाओं में सामान्य से कम निकला हीमोग्लोबिन
11.5 से 15.5 तक है सामान्य रेंज, 4803 गर्भवती महिलाओं पर स्टडी
एक अप्रैल 2018 से 31 मार्च 2019 तक इलाज कराने आईं महिलाएं
अरीश रिजवी
मेरठ।
संतान तो सब सेहतमंद चाहते हैं, मगर उन्हें जन्म देने वाली महिलाओं की परवाह नहीं की जा रही है। एक अप्रैल 2018 से 31 मार्च 2019 तक महिला जिला अस्पताल में डिलीवरी कराने आईं 4803 गर्भवती महिलाओं में से करीब 90 फीसदी में हीमोग्लोबिन की सामान्य रेंज भी नहीं मिली। सिर्फ 10 फीसदी गर्भवती महिलाएं ही हीमोग्लोबिन की सामान्य रेंज (11.5 से 15.5 ग्राम डेसीलीटर) में पाई गईं।
खून की कमी के कारण ही डिलीवरी के दौरान तबियत बिगड़ने पर इनमें से 299 महिलाओं को हायर सेंटर रेफर किया गया। एक हजार से ज्यादा महिलाओं को ब्लड चढ़ाया गया। इनमें रक्त की मात्रा 10 डेसीलीटर से भी कम थी। एक सामान्य महिला के शरीर में 11.5 से 15 ग्राम प्रति डेसीलीटर रक्त होता है। महिला जिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. मनीषा वर्मा ने बताया कि खून की लगातार आ रही कमी के कारण अब 10 ग्राम डेसीलीटर तक भी रक्त की मात्रा को सामान्य मान लिया जा रहा है। मगर इससे कम खतरनाक होता है। काफी संख्या में ऐसी महिलाएं आती हैं, जिनमें रक्त की मात्रा 10 ग्राम डेसीलीटर से भी कम निकलती है। उन्होंने बताया कि कम हीमोग्लोबिन मां के साथ-साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी घातक है।
विज्ञापन

सही नहीं आयरन टेबलेट का वितरण
स्वास्थ्य विभाग अपनी जिम्मेदारी सही से नहीं निभा रहा है, यही वजह है कि इस तरह की समस्याएं आ रही हैं। अफसर इसका ठीकरा कर्मचारियों और आशाओं पर फोड़ते हैं तो आशा और कर्मचारी अफसरों पर। आयरन टेबलेट का वितरण सही तरीके से नहीं हो पाता है। जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाले पैसों के लिए भी महिलाओं को भटकना पड़ता है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अफसर इसकी वजह महिलाओं का सरकार से मिलने वाले पैसों का सही इस्तेमाल न करना बताते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसलिए कम हो जाता है हीमोग्लोबिन
महिला एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीषा वर्मा ने बताया कि गर्भ में पल रहे शिशु की देखभाल करने के लिए शरीर का आकार तो बढ़ जाता है, मगर उसमें लाल रक्त कोशिका की वृद्धि नहीं होती है। इसलिए हीमोग्लोबिन लेवल कम हो जाता है। इसके लिए पौष्टिक आहार और आयरन टेबलेट खानी पड़ती हैं। महिलाओं में जागरूकता की कमी भी इसकी एक वजह है।

खून की कमी के कारण
- शरीर में फॉलिक एसिड की कमी
- विटामिन बी और आयरन की कमी
3226 नॉर्मल और 1577 सिजेरियन
महिला जिला अस्पताल में आईं गर्भवती महिलाओं में से 3226 महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी हुई है, जबकि 1577 महिलाओं की डिलीवरी सिजेरियन करनी पड़ी। जिन महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी की गई हैं, उनमें हीमोग्लोबिन का स्तर 10 ग्राम डेसीलीटर से भी कम था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed