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साढे़ पांच सौ वर्ष पूर्व जिन्न ने कराया था मस्जिद का निर्माण
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साढे़ पांच सौ वर्ष पूर्व जिन्न ने कराया था मस्जिद का निर्माण
सरधना। नगर में वैसे तो बीस से अधिक मस्जिदें हैं। जिनमें मुख्य रूप से बुद्ध बाजार स्थित जामा मस्जिद (मर्कज) एवं बूढ़ा बाबा स्थित मस्जिद शामिल हैं। इन सब में मोहल्ला ऊंचापुर स्थित जिन्न वाली मस्जिद की अपनी पहचान है। इस मस्जिद को जिन्न ने बनाया या इंसानों ने स्पष्ट नहीं है। मस्जिद के इमाम का कहना है कि उन्हें भी यही बताया गया कि इस मस्जिद का निर्माण जिन्न ने किया था। यह अन्य मस्जिदों से अलग दिखती है। इसका निर्माण करीब साढे़ पांच सौ वर्ष पूर्व होने का अनुमान है।
सरधना कस्बा इतिहास के पन्नों में अलग पहचान रखता है। यहां पर महाभारतकालीन-पांडवकालीन महादेव मंदिर के साथ ऐतिहासिक चर्च भी है। इसका निर्माण बेगम समरू ने कराया था। बेगम समरू ने सरधना को राजधानी भी बनाया था। यहां मस्जिद का निर्माण कैसे हुआ और किसने किया यह रहस्य बरकरार है। जनश्रुति के अनुसार मोहल्ला ऊंचापुर स्थित जिन्न वाली मस्जिद करीब साढे़ पांच सौ वर्ष पूर्व जिन्न द्वारा बनाई गई थी। इसी दौरान एक महिला की नींद खुली तो जिन्न निर्माण पूरा किए बगैर ही भाग खडे़ हुए थे। यह मस्जिद अन्य से कुछ हटकर बनी है। इसकी मिनारें ऊंची नहीं बल्कि गुंबदनुमा हैं। नगर में अंगूर वाली मस्जिद, मस्जिद तकियाकैत, मस्जिद गोमतीनगर, मस्जिद सुलेमानशाह आदि समेत अन्य मस्जिदें भी हैं। जिन्न वाली मस्जिद के इमाम मोहम्मद उमर ने बताया कि उन्होंने भी इस मस्जिद के बारे में यही सुना है कि इसका निर्माण जिन्न द्वारा कराया गया था। हालांकि सच्चाई अल्लाह ही जानता है। मोहतमिम-मुत्वल्ली मोहम्मद शाह आलम खान ने भी यही बताया। उधर, नगर निवासी 65 वर्षीय मेराजुद्दीन का कहना है कि उन्होंने भी बचपन से मस्जिद निर्माण के बारे में यही सुना है। हालांकि अब मस्जिद कमेटी निर्माण करा रही है। विद्यार्थी विकास मंच के अध्यक्ष फैय्याज अहमद व पूर्व चेयरमैन निजाम अंसारी का कहना है कि इस मस्जिद को और बेहतर बनाने की तैयारी है।
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सरधना। नगर में वैसे तो बीस से अधिक मस्जिदें हैं। जिनमें मुख्य रूप से बुद्ध बाजार स्थित जामा मस्जिद (मर्कज) एवं बूढ़ा बाबा स्थित मस्जिद शामिल हैं। इन सब में मोहल्ला ऊंचापुर स्थित जिन्न वाली मस्जिद की अपनी पहचान है। इस मस्जिद को जिन्न ने बनाया या इंसानों ने स्पष्ट नहीं है। मस्जिद के इमाम का कहना है कि उन्हें भी यही बताया गया कि इस मस्जिद का निर्माण जिन्न ने किया था। यह अन्य मस्जिदों से अलग दिखती है। इसका निर्माण करीब साढे़ पांच सौ वर्ष पूर्व होने का अनुमान है।
सरधना कस्बा इतिहास के पन्नों में अलग पहचान रखता है। यहां पर महाभारतकालीन-पांडवकालीन महादेव मंदिर के साथ ऐतिहासिक चर्च भी है। इसका निर्माण बेगम समरू ने कराया था। बेगम समरू ने सरधना को राजधानी भी बनाया था। यहां मस्जिद का निर्माण कैसे हुआ और किसने किया यह रहस्य बरकरार है। जनश्रुति के अनुसार मोहल्ला ऊंचापुर स्थित जिन्न वाली मस्जिद करीब साढे़ पांच सौ वर्ष पूर्व जिन्न द्वारा बनाई गई थी। इसी दौरान एक महिला की नींद खुली तो जिन्न निर्माण पूरा किए बगैर ही भाग खडे़ हुए थे। यह मस्जिद अन्य से कुछ हटकर बनी है। इसकी मिनारें ऊंची नहीं बल्कि गुंबदनुमा हैं। नगर में अंगूर वाली मस्जिद, मस्जिद तकियाकैत, मस्जिद गोमतीनगर, मस्जिद सुलेमानशाह आदि समेत अन्य मस्जिदें भी हैं। जिन्न वाली मस्जिद के इमाम मोहम्मद उमर ने बताया कि उन्होंने भी इस मस्जिद के बारे में यही सुना है कि इसका निर्माण जिन्न द्वारा कराया गया था। हालांकि सच्चाई अल्लाह ही जानता है। मोहतमिम-मुत्वल्ली मोहम्मद शाह आलम खान ने भी यही बताया। उधर, नगर निवासी 65 वर्षीय मेराजुद्दीन का कहना है कि उन्होंने भी बचपन से मस्जिद निर्माण के बारे में यही सुना है। हालांकि अब मस्जिद कमेटी निर्माण करा रही है। विद्यार्थी विकास मंच के अध्यक्ष फैय्याज अहमद व पूर्व चेयरमैन निजाम अंसारी का कहना है कि इस मस्जिद को और बेहतर बनाने की तैयारी है।
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