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दूध के दाम गिरे, घाटे में किसान
Updated Mon, 09 Jul 2018 12:13 AM IST
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बहसूमा। दूध के दाम गिरने से किसानों को बड़ा झटका लगा है। जहां किसानों को इस बार गन्ने का भुगतान सही समय पर नहीं मिल पाया। वहीं, दूध के दाम में गिरावट से किसानों के सामने घर खर्च चलाने की समस्या आ खड़ी हुई है।
सत्ता में आने से पहले भाजपा की केंद्र और प्रदेश सरकार ने किसानों को गन्ना मूल्य के लिए स्वामी रंगानाथन की रिपोर्ट लागू कर किसानों को लागत का डेढ़ गुना मूल्य देने एवं गन्ना किसानों को 14 दिन के भीतर भुगतान दिलाने तथा समय पर भुगतान नहीं होने पर ब्याज दिलाने का प्रलोभन दिया था। प्रदेश सरकार के गन्ना किसानों से किए सभी दावे फेल होते दिख रहे हैं। गन्ना किसानों को जहां समय से भुगतान नहीं मिल पा रहा है। वहीं, गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने से किसान मवेशियों का दूध को बेचकर परिवार का जैसे-तैसे पालन पोषण कर रहे थे। इस बार दूध के दाम में गिरावट आने से किसानों को दोहरी मार पड़ रही है। जिससे मध्यम किसान के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
दूध पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों का सहायक व्यवसाय है। बीते कुछ सालों में किसानों ने पारंपरिक पशुपालन को डेयरी व्यवसाय के रूप में विकसित किया है। पश्चिम उत्तर प्रदेश के हर गांव में किसान दूध बेच रहे हैं। दूध खरीदने के लिए पराग, अमूल, पारस, परम व मदर डेयरी आदि में होड़ मची रहती है। यदि बात केवल बहसूमा कस्बे की करे तो एक दिन औसतन 1100 सौ लीटर का उत्पादन होता है। दूध उत्पादक सतीश चाहल, ओमपाल और सतीश का कहना है कि पिछले साल दूध के दाम 40 रुपये प्रति लीटर तक मिले। शहर से दूर गांवों में किसानों के लिए दूध की यह अच्छी खासी रकम थी। उपभोक्ताओं को डेरियां पॉली पैक का दूध 52 रुपये प्रति लीटर बेचती थी। इस बार दूध के दाम में गिरावट दिख रही है। दूध के दाम 34 रुपये प्रति लीटर तक आ गए हैं।
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डेयरी संचालकों की माने तो देश में अंतराष्ट्रीय स्तर पर मिल्क पाउडर का बहुत स्टाक जमा हो गया है।
दूध व उसके उत्पाद विदेशों को निर्यात नहीं हो रहे हैं। इस कारण डेयरियों ने भी दूध के दाम कम कर दिए हैं। पिछले साल पॉलीपैक दूध 52 रुपये प्रति लीटर था। अमूल डेरी संचालक राजू राठी का कहना है कि दूध के उत्पादन में बढ़ोतरी व मिल्क पाउडर का जमा होना है। पराग डेयरी के संचालक देवेंद्र कुमार ने बताया कि शासन द्वारा र्निधारित मूल्य पर दूध खरीद जा रहा है।
मुख्य बातें
पिछले वर्ष दूध 40 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा गया था
इस वर्ष दूध का दाम गिर कर 34 रुपये लीटर हो जाने से बढ़ी दुश्वारी
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सत्ता में आने से पहले भाजपा की केंद्र और प्रदेश सरकार ने किसानों को गन्ना मूल्य के लिए स्वामी रंगानाथन की रिपोर्ट लागू कर किसानों को लागत का डेढ़ गुना मूल्य देने एवं गन्ना किसानों को 14 दिन के भीतर भुगतान दिलाने तथा समय पर भुगतान नहीं होने पर ब्याज दिलाने का प्रलोभन दिया था। प्रदेश सरकार के गन्ना किसानों से किए सभी दावे फेल होते दिख रहे हैं। गन्ना किसानों को जहां समय से भुगतान नहीं मिल पा रहा है। वहीं, गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने से किसान मवेशियों का दूध को बेचकर परिवार का जैसे-तैसे पालन पोषण कर रहे थे। इस बार दूध के दाम में गिरावट आने से किसानों को दोहरी मार पड़ रही है। जिससे मध्यम किसान के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
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दूध पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों का सहायक व्यवसाय है। बीते कुछ सालों में किसानों ने पारंपरिक पशुपालन को डेयरी व्यवसाय के रूप में विकसित किया है। पश्चिम उत्तर प्रदेश के हर गांव में किसान दूध बेच रहे हैं। दूध खरीदने के लिए पराग, अमूल, पारस, परम व मदर डेयरी आदि में होड़ मची रहती है। यदि बात केवल बहसूमा कस्बे की करे तो एक दिन औसतन 1100 सौ लीटर का उत्पादन होता है। दूध उत्पादक सतीश चाहल, ओमपाल और सतीश का कहना है कि पिछले साल दूध के दाम 40 रुपये प्रति लीटर तक मिले। शहर से दूर गांवों में किसानों के लिए दूध की यह अच्छी खासी रकम थी। उपभोक्ताओं को डेरियां पॉली पैक का दूध 52 रुपये प्रति लीटर बेचती थी। इस बार दूध के दाम में गिरावट दिख रही है। दूध के दाम 34 रुपये प्रति लीटर तक आ गए हैं।
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डेयरी संचालकों की माने तो देश में अंतराष्ट्रीय स्तर पर मिल्क पाउडर का बहुत स्टाक जमा हो गया है।
दूध व उसके उत्पाद विदेशों को निर्यात नहीं हो रहे हैं। इस कारण डेयरियों ने भी दूध के दाम कम कर दिए हैं। पिछले साल पॉलीपैक दूध 52 रुपये प्रति लीटर था। अमूल डेरी संचालक राजू राठी का कहना है कि दूध के उत्पादन में बढ़ोतरी व मिल्क पाउडर का जमा होना है। पराग डेयरी के संचालक देवेंद्र कुमार ने बताया कि शासन द्वारा र्निधारित मूल्य पर दूध खरीद जा रहा है।
मुख्य बातें
पिछले वर्ष दूध 40 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा गया था
इस वर्ष दूध का दाम गिर कर 34 रुपये लीटर हो जाने से बढ़ी दुश्वारी