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न्यू सैनिक कालोनी के लोगों ने कमिश्नरी पर किया प्रदर्शन
Updated Fri, 27 Apr 2018 01:56 AM IST
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न्यू सैनिक विहार के लोगों का कमिश्नरी गेट पर हंगामा
मेरठ। एमडीए द्वारा कब्जा हटाए जाने के नोटिस के विरोध में कंकरखेड़ा क्षेत्र के न्यू सैनिक विहार के लोगों ने कमिश्नरी गेट पर हंगामा किया। कमिश्नरी में जबरन घुसने पर लोगों की पुलिस से धक्का-मुक्की भी हुई। मंडलायुक्त ने प्रतिनिधि मंडल से वार्ता कर तीन दिन का आश्वासन दिया है।
न्यू सैनिक विहार में एमडीएम ने अवैध कब्जा बताकर 15 दिन में जगह खाली करने के नोटिस दिए थे। इसके विरोध में बृहस्पतिवार को रालोद और सपा नेताओं की मौजूदगी में काफी संख्या में लोग कमिश्नरी गेट पर पहुंचे। जहां उन्होंने जमकर हंगामा किया। कमिशनर ने प्रदर्शन कर रहे लोगों में से 5 से 6 लोगों के एक प्रतिनिधि मंडल से वार्ता करने को अंदर बुलाया। जब अन्य लोग भी अंदर जाने लगे तो इस दौरान सीओ सिविल लाइन और पुलिसकर्मियों से उनकी धक्का-मुक्की हुई। इंद्रपाल फौजी, रालोद के राजकुमार सांगवान, नरेंद्र खजूरी, सपा जिलाध्यक्ष राजपाल एडवोकेट आदि ने मंडलायुक्त से बात की। उन्होंने बताया कि 15-20 साल से खसरा नं.19 न्यू सैनिक कॉलोनी में दर्जनों परिवार बैनामा रजिस्ट्री कराकर ही मकानों में रह रहे हैं। वहां रह रहे लोगाें के पास वैधानिक कागजात भी हैं। उन्होंने मंडलायुक्त से समस्या का समाधान कराने की मांग की है। मंडलायुक्त ने उन्हें तीन दिन का आश्वासन दिया। नीरज तोमर, सरिता, यशवीर सिंह, पंकज शर्मा, राखी चौधरी, अर्मिला मलिक आदि रहे।
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वहीं इस पूरे मामले पर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजेपयी भी पूर्व सैनिकों के पक्ष में आ गए। वाजपेयी ने कहा कि एमडीए ने इस भूमि पर अर्जन के लिए धारा 4 की कार्रवाई 11 जून 1985 की बतायी है और 13 जून 1985 को धारा 6 की कार्रवाई करना बताया है। लगभग 17 साल बाद मई 2002 में दखल लेना बताया है। जो कि नियमों के पूरी तरह विपरीत है। वाजपेयी ने एमडीए पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब धारा 4 और 6 की कार्रवाई 1985 में हुई तो एमडीए ने खसरा खतौनी में अपना नाम वर्ष 2014 में दर्ज क्यों कराया। यही नहीं 2002 में एमडीए ने अपना दखल देना बताया है, लेकिन सारे बैनामे वर्ष 1998 में हो चुके थे। यही नहीं इस मामले में जब कालोनी के लोगों ने आरटीआई में एडीएम एलए से जानकारी मांगी तो 20 अप्रैल 2018 को उनके कार्यालय से जानकारी दी गयी कि प्रतिकर जमा करने का कोई अभिलेख पत्रावली उपलब्ध नहीं है। जबकि एमडीए 21 दिसंबर 2015 को प्रतिकर जमा करना बता रहा है। ऐसे में मंडलायुक्त को इस मामले में बहुत ही गंभीरता से निष्पक्ष कार्रवाई तय करनी चाहिए।
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खास बातें:
एमडीए द्वारा कब्जा हटाए जाने के नोटिस से आक्रोशित है न्यू सैनिक विहार के लोग
हंगामे के दौरान पुलिस से भी हुई धक्का-मुक्की