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राष्ट्रोदय गीत दे रहा राष्ट्रोदय का संदेश
Updated Wed, 21 Feb 2018 02:12 AM IST
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‘राष्ट्रोदय’ गीत दे रहा राष्ट्रोदय का संदेश
मेरठ।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बड़े कार्यक्रमों में अलग से वर्ग गीत तैयार होता है। यह गीत उसी कार्यक्रम को समर्पित होता है। इस बार भी होने वाले विशाल स्वयं सेवक समागम के लिए वर्ग गीत लिखा गया है। जिसका नाम राष्ट्रोदय गीत रखा गया है। इस गीत में जहां देश की एकता और अखंडता, छूआछूत को दूर करने का संदेश है, तो देश को विश्वगुरु बनाने की भी बात कही गई है। लेकिन पहली बार इस गीत में पर्यावरण बचाओ का संदेश भी दिया गया है।
‘विश्व गगन में फिर से गूंजे, भारत मां की जय जय जय’ इन शब्दों के साथ राष्ट्रोदय गीत का प्रारंभ किया गया है। इसके साथ इस गीत में जो संदेश दिया गया है उसमें कहा गया है कि संघ परिवार की जो सोच है वह सभी को सुखी देखने की है। यह जगत हमारा परिवार है। हमारा शील और विनय हमेशा चमकता रहे और निर्भय होकर आगे बढ़ते जाएं। इसके बाद गीत में आपसी भेदों को दूर करने और पर्यावरण का संदेश दिया गया है, जिसमें कहा है कि सृष्टि की रचनाएं समझें और सम्यक विकास पथ अपनाएं। वायु, जल, भूमि के सभी तत्वों को सदैव शुद्ध रखें। अपनी भारत माता के लिए तन मन धन सर्वस्व समर्पित करते हुए जगत गुरु के सिंहासन पर फिर से विराजमान हों।
राष्ट्रोदय के लिए तैयार किए गए इस गीत को इन दिनों सभी शाखाओं में गाया जा रहा है और स्वयं सेवक इस गीत को याद कर चुके हैं।
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मेरठ।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बड़े कार्यक्रमों में अलग से वर्ग गीत तैयार होता है। यह गीत उसी कार्यक्रम को समर्पित होता है। इस बार भी होने वाले विशाल स्वयं सेवक समागम के लिए वर्ग गीत लिखा गया है। जिसका नाम राष्ट्रोदय गीत रखा गया है। इस गीत में जहां देश की एकता और अखंडता, छूआछूत को दूर करने का संदेश है, तो देश को विश्वगुरु बनाने की भी बात कही गई है। लेकिन पहली बार इस गीत में पर्यावरण बचाओ का संदेश भी दिया गया है।
‘विश्व गगन में फिर से गूंजे, भारत मां की जय जय जय’ इन शब्दों के साथ राष्ट्रोदय गीत का प्रारंभ किया गया है। इसके साथ इस गीत में जो संदेश दिया गया है उसमें कहा गया है कि संघ परिवार की जो सोच है वह सभी को सुखी देखने की है। यह जगत हमारा परिवार है। हमारा शील और विनय हमेशा चमकता रहे और निर्भय होकर आगे बढ़ते जाएं। इसके बाद गीत में आपसी भेदों को दूर करने और पर्यावरण का संदेश दिया गया है, जिसमें कहा है कि सृष्टि की रचनाएं समझें और सम्यक विकास पथ अपनाएं। वायु, जल, भूमि के सभी तत्वों को सदैव शुद्ध रखें। अपनी भारत माता के लिए तन मन धन सर्वस्व समर्पित करते हुए जगत गुरु के सिंहासन पर फिर से विराजमान हों।
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राष्ट्रोदय के लिए तैयार किए गए इस गीत को इन दिनों सभी शाखाओं में गाया जा रहा है और स्वयं सेवक इस गीत को याद कर चुके हैं।