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देवशयनी एकादशी आज, चार माह तक योग निद्रा में रहेंगे भगवान विष्णु
Updated Mon, 23 Jul 2018 02:12 AM IST
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मेरठ। देवशयनी एकादशी आज है। यह भगवान विष्णु के आध्यात्मिक जगत में अपने कर्म कर्तव्य निभाने के लिए प्रस्थान करने की तिथि कहलाती है। यह आषाढ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी है। अब चार माह तक भगवान विष्णु आध्यात्मिक जगत के क्षीर सागर के विराजे शेषनाग की शैय्या पर योग निद्रा में चले जाएंगे।
नाभि कमल में विराजे, सृष्टि रचयिता ब्रह्मा के साथ चरण सेवा के लिए लक्ष्मी तो साथ होती ही हैं। अन्य दिव्य शक्तियां भी आध्यात्मिक जगत में प्रस्थान कर जाती हैं। चतुर्मास में सतोगुणी व रजोगुणी दिव्य शक्तियों के आध्यात्मिक जगत में प्रस्थान करने पर पृथ्वी पर भगवान शंकर की तमोगुणी संहारक शक्ति ही रह जाती है। इसलिए इन चार माह में सतोगुणी जप, पूजन, ध्यान, साधना, दान, पुण्य, हवन अवश्य करने चाहिए। ज्योतिष भारत ज्ञान भूषण का कहना है कि प्रत्येक त्योहार दिव्यता पूर्ण उत्साह से मनाना चाहिए। भगवान शिव को शीतल जल से अभिषेक, रुद्र रूप को कल्याणकारी शिव में परिवर्तित करने के लिए स्वयं का स्वभाव भी शीतल सौम्य व आनंदमयी बनाना चाहिए। भगवान रुद्र भी आशुतोष रूप में शीघ्र ही प्रसन्न होकर आनंददायी कल्याणकारी वरदान प्रदान करते हैं। इनका कहना है कि देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु का चतुर्भुजी रूप शेषनाग की शैय्या पर विराजे, उनकी नाभि कमल में विराजे ब्रह्माजी एवं भगवान विष्णु के चरणों पर सेवारत लक्ष्मी के चित्र का ध्यान करें। यदि इस प्रकार के चित्र मौजूद हो तो पीले, सफेद, लाल सुगंधित फूलों से सुसज्जित करना चाहिए।
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नाभि कमल में विराजे, सृष्टि रचयिता ब्रह्मा के साथ चरण सेवा के लिए लक्ष्मी तो साथ होती ही हैं। अन्य दिव्य शक्तियां भी आध्यात्मिक जगत में प्रस्थान कर जाती हैं। चतुर्मास में सतोगुणी व रजोगुणी दिव्य शक्तियों के आध्यात्मिक जगत में प्रस्थान करने पर पृथ्वी पर भगवान शंकर की तमोगुणी संहारक शक्ति ही रह जाती है। इसलिए इन चार माह में सतोगुणी जप, पूजन, ध्यान, साधना, दान, पुण्य, हवन अवश्य करने चाहिए। ज्योतिष भारत ज्ञान भूषण का कहना है कि प्रत्येक त्योहार दिव्यता पूर्ण उत्साह से मनाना चाहिए। भगवान शिव को शीतल जल से अभिषेक, रुद्र रूप को कल्याणकारी शिव में परिवर्तित करने के लिए स्वयं का स्वभाव भी शीतल सौम्य व आनंदमयी बनाना चाहिए। भगवान रुद्र भी आशुतोष रूप में शीघ्र ही प्रसन्न होकर आनंददायी कल्याणकारी वरदान प्रदान करते हैं। इनका कहना है कि देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु का चतुर्भुजी रूप शेषनाग की शैय्या पर विराजे, उनकी नाभि कमल में विराजे ब्रह्माजी एवं भगवान विष्णु के चरणों पर सेवारत लक्ष्मी के चित्र का ध्यान करें। यदि इस प्रकार के चित्र मौजूद हो तो पीले, सफेद, लाल सुगंधित फूलों से सुसज्जित करना चाहिए।
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